संतो-पुजारियों का विरोध:शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर इसी महीने सीएम से मिलेंगे संत

उज्जैन4 महीने पहले
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  • संत अवधेशपुरी के अमर्यादित व्यवहार का विरोध

उज्जैन महाकाल मंदिर स्थित महानिर्वाणी अखाड़े में षट्दर्शन साधु समाज, भारतीय अखाड़ा परिषद् के संत और महाकाल मंदिर के पुजारियों ने एकमत होकर निर्णय लिया कि शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर जल्द ही सीएम से मुलाकात की जाएगी।

महाकाल मंदिर परिसर में महा निर्वाणी अखाड़े के संत विनीत गिरी के आश्रम में शुक्रवार दोपहर को संत व पुजारी इकट्‌ठा हुए। बैठक में तय किया गया कि महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं से लिए जा रहे अलग-अलग शुल्क का विरोध किया जाएगा। सभी ने संत अवधेशपुरी का बहिष्कार कर सर्वसम्मति से उन्हें किसी भी मंच पर आमंत्रण देने को लेकर भी सहमति जताई।

करीब एक घंटे चली चर्चा में बैठक में कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। षट्दर्शन संत समाज के प्रमुख संत रामेश्वर दास और महा निर्वाणी अखाड़े के विनीत गिरी महाराज और महाकाल मंदिर के प्रमुख पुजारी महेश पुजारी सहित अलग-अलग अखाड़े से जुड़े संत व पुजारी इस अहम बैठक में सम्मलित हुए थे।

शिप्रा शुद्धिकरण –

शिप्रा शुद्धि करण को लेकर इसी महीने में संत समाज का एक दल सीएम से मिलने भोपाल जाएगा। संतों ने कहा कि सरकार शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर जनप्रतिनिधि वादा करके चले जाते हैं, लेकिन कुछ काम नहीं कर पाते। इसके चलते सीएम को एक बार पूरे मामले की रिपोर्ट देकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए।

संत अवधेशपुरी का विरोध -

चर्चा में रामेश्वर दास ने कहा कि खुद को महा निर्वाणी अखाड़े का संत कहने वाले अवधेश पुरी का सभी संतों और भारतीय अखाड़ा समाज को विरोध दर्ज करना चाहिए। अवधेश पुरी महाकाल मंदिर और संत समाज के बारे में अनर्गल टिप्पणियां करते रहते हैं। पहले भी संत समाज उनका बहिष्कार कर चुका है। अब संत समाज ने कहा है कि अब जिस भी मंच पर अवेधश पुरी को आमंत्रित किया जाएगा वहां पर कोई सभी संत नहीं जाएगा। इसके साथ ही संतों ने बाहर से आने वाले संतो के लिए महाकाल मंदिर में अलग से व्यवस्था करने का सुझाव भी मंदिर समिति को दिया है।

महाकाल में अलग-अलग राशि का विरोध -

संतों ने ये भी कहा कि मंदिर समिति श्रद्धालुओं से अलग-अलग राशि वसूल रही है। जिसमे शीघ्र दर्शन, प्रोटोकॉल, भस्म आरती शुल्क शामिल है। संतो ने कहा शुल्क का निर्धारण कर एक राशि तय कर ली जाए।

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