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11 माह इंतजार के बाद एनएचडी यूनिट शुरू:रैफर के इंतजार में गंभीर बीमार बच्चों की होती थी मौतें, अब यहीं इलाज शुरू

उज्जैनएक महीने पहले
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चरक अस्पताल में 11 माह के लंबे इंतजार के बाद एनएचडी (नियोनेटल हाई-डिपेंडेंसी) यूनिट शुरू कर दी गई है। यहां पर कम वजन के नवजात व पीलिया ग्रस्त  बच्चों का इलाज किया जा सकेगा। वैसे यूनिट को  15 अगस्त  2019 को शुरू किया जाना था, जो अब शुरू हो पाई है। यूनिट का संचालन शुरू होने से गंभीर बच्चों को इंदौर रैफर नहीं करना पड़ेगा। बच्चों की मृत्यु दर भी कम हो सकेगी। 10 बेड की यूनिट में 7 बच्चों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया है। कम वजन के जन्म लेने वाले बच्चों को अब यहां पर केयर मिलना शुरू हो गई है।  
शिशु स्वास्थ्य सलाहकार ने नवंबर 2019 में चरक अस्पताल में संचालित एसएनसीयू का निरीक्षण कर यहां एनएचडीयू को शुरू 
करने के आदेश दिए थे। मिशन संचालक एनएचएम भोपाल ने भी 30 नवंबर 2019 को एनएचडीयू शुरू करने की तारीख तय करने के लिए जिला प्रशासन को आदेशित किया था। एसएनसीयू में हर माह औसत 250 बच्चे भर्ती होते हैं, उनमें से 100 से 120 बच्चों को एनएचडीयू की जरूरत होती है। यानि इतने बच्चों को अब यूनिट में इलाज मिल सकेगा। 
रिपोर्ट के अनुसार जिले के अस्पतालों में जन्म लेने वाले डेढ़ किलों से कम वजन के 250 बच्चों में से 5 से 8 प्रतिशत नवजात शिशु की मौत हो जाती है, जिसे रोकने के लिए ही यूनिट से मदद मिल सकेगी। यहां पर बच्चों के साथ में उनकी मां भी रह सकेगी। 
वजन नहीं बढ़ने से जान का खतरा : जन्म के बाद बच्चे का वजन डेढ़ किलों से कम है तथा बाद में भी वजन नहीं बढ़ रहा है तो बच्चे की जान को खतरा रहता है। अधिकांश बच्चे शारीरिक रूप से डेवलप नहीं हो पाते हैं। ऐसे में उनकी मौत हो जाती है।

मां को देंगे बच्चों के केयर की ट्रेनिंग : मां को बच्चे के केयर की ट्रेनिंग स्टॉफ नर्स की तरह दी जाएगी। बच्चे को एसएनसीयू की चिकित्सकीय सेवाएं दी सकेगी। वजन बढ़ने पर अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी। मां को यूनिट में इस तरह से ट्रेनिंग दी जाएगी कि वह बच्चे की घर पर भी केयर नर्सिंग स्टॉफ की तरह से कर सके। 

ये हैं एनएचडीयू के मापदंड

  • ऐसे सभी नवजात शिशु जो कि एसएनसीयू में इलाज के बाद हीमोडायनेमिकल स्टेबल हों।
  • कम वजन 1800 ग्राम से कम।
  • समय पूर्व जन्मे (34 सप्ताह) {पीलिया ग्रस्त। 
  • एंटीबायोटिक कोर्स पूर्ण किए जाने के लिए।
  • दूसरे अस्पताल या सेंटर्स से रैफर किए गए 
  • शिशु जिन्हें मॉनिटरिंग की आवश्यकता हो।
  • फीडिंग सपोर्ट। {क्लीनिकल कंडीशन के आधार पर चिकित्सक द्वारा भर्ती किया जाना।

इसलिए जरूरी यूनिट 
बच्चे का वजन बढ़ने में सहायक होगी। इससे काफी हद तक बाल मृत्यु दर कम हो सकेगी। बच्चों में संक्रमण का खतरा कम होगा। पहली बार मां की मौजूदगी में बच्चे का इलाज होगा।
अभी सात बच्चे भर्ती 
^चरक अस्पताल में एनएचडी यूनिट शुरू कर दी गई है। यहां पर कम वजन और पीलियाग्रस्त बच्चों का इलाज किया जा रहा है। 10 बेड की यूनिट में 7 बच्चे भर्ती हैं।
डॉ दिलीप वास्के, प्रभारी एसएनसीयू

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