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कोरोना संक्रमण काल:स्वच्छता व मजबूत इरादे का श्रावणी उपाकर्म

उज्जैन6 दिन पहले
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  • रोग प्रतिरोधक सामग्री से होता है स्नान ताकि शरीर साफ रहे, कोरोना से बचाव में यह मददगार
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ब्राह्मण श्रावण पूर्णिमा को श्रावणी उपाकर्म करेंगे। यह विधि सालभर के लिए स्वास्थ्य उपचार और आंतरिक संकल्प शक्ति का विकास करना है। इस दिन ऐसी सामग्री से स्नान किया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली औषधीय मानी जाती है। यह बाहरी शरीर की स्वच्छता का संदेश देती है। मंत्रों से आत्मिक संकल्प को मजबूती दी जाती है। संदेश यह है कि हम स्वास्थ्य के लिए बाहरी रूप से स्वच्छता रखें और समाज के विकास के लिए अंतरमन से जुटे रहें। ब्राह्मण मानते हैं कोरोना संक्रमण काल में यह पर्व हमें शारीरिक शुद्धि और मानसिक रूप से मजबूत रहने का संदेश है। धर्मशास्त्रों में जीवन जीने की कला सिखाने वाली कई विधियां बताई गई हैं। इसमें श्रावणी उपाकर्म भी है। साल में एक बार होने वाली इस विधि के माध्यम से ब्राह्मण अपने आप को फिर से एक साल के लिए समाजसेवा के लिए तैयार करते हैं। पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार यह विधि ब्राह्मणों के साथ-साथ उनके लिए भी है जो सनातन धर्म में श्रद्धा रखते हैं। मुख्यतः श्रावणी उपाकर्म, वेद तथा शाखा से संबंधित ब्राह्मण करते हैं लेकिन इसे कोई भी सनातनी परंपरा में विश्वास करने वाला समाजजन कर सकता है। इसमें चारों वेद-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद तथा इनकी शाखाओं से जुड़े ब्राह्मणों का अलग-अलग तिथि व नक्षत्रों पर उपाकर्म होता है। यह अधिकतर श्रावण तथा भादौ में किया जाता है। इसका कारण यह भी है कि श्रावण में नक्षत्र का चक्र परिवर्तन तथा भादौ में तिथि विशेष का परिवर्तन होते हैं जिनसे प्रकृति के द्वारा दी गई विशिष्ट ऊर्जा प्रभावित होती है।

चंद्रमा देता है संकल्प को मजबूती
ऋग्वेदी, यजुर्वेदी ब्राह्मणों का श्रावणी उपाकर्म श्रावण के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा रक्षाबंधन पर किया जाता है। इस दिन शुक्ल पक्ष का चंद्रमा अपनी पूर्ण कला के साथ रहता है। यह मनुष्य के दृढ़ संकल्प का कारक है। कहते हैं यदि मन मजबूत हो तो व्यक्ति आकाश छू लेता है। चंद्रमा की पूर्णता संकल्प को मजबूत करती है। स्नान में दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर से अलग-अलग स्नान होता है। यह एंटीबायोटिक औषधियां हैं जो शरीर के बाहरी तथा आंतरिक रोगों का नाश करते हैं। 10 विधि स्नान में हल्दी, पीली सरसों, आंवला, भस्म, मिट्टी का उपयोग होता है। हल्दी को सर्व औषधी कहा गया है। सरसों कई रोगों की दवा है। मौजूदा कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हेमाद्रि व दशविधि स्नान किया जा सकता है।
गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज सिंहपुरी का श्रावणी उपाकर्म
होगा : श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर यजुर्वेदी ब्राह्मणों का उपाकर्म होगा। पं. उमाकांत शुक्ल के अनुसार श्रावणी उपाकर्म वर्ष भर के ज्ञात अज्ञात दोष की निवृत्ति के लिए किया जाता है। इस बार श्रावणी उपाकर्म नदी दरवाजा स्थित दशोरा की धर्मशाला में सुबह 8 बजे से होगा

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