लहसुन में किसानों को नुकसान:महंगे बीज बोए लेकिन कम दाम मिल रहे, कमजोर रंग वाली नहीं बिकती

उज्जैन9 महीने पहले
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  • चिमनगंज मंडी में रोज तीन हजार कट्‌टे लहसुन की आवक
  • क्वालिटी वाली नहीं आने से स्टॉक वाले भी खरीदी से दूर

इस साल किसानों ने 16 हजार रुपए क्विंटल का बीज लिया और लहसुन की बोवनी कर दी लेकिन बीमारू उपज मिलने से उसका खर्च बढ़ गया। खराब लहसुन कम भाव में भी नहीं बिक रही। किसानों ने इस साल लहसुन की भरपूर बोवनी की लेकिन अज्ञात बीमारी ने उनका सुख छीन लिया।

नई लहसुन की आवक इन दिनों मंडियों में हो रही है। कमजोर रंग वाली लहसुन के अच्छे भाव नहीं मिलते। क्वालिटी वाली लहसुन नहीं आने से स्टॉक वाले भी खरीदी से दूर हैं। चिमनगंज मंडी में तीन हजार कट्‌टे की आवक रोज हो रही है। उनके भाव 500 से 4800 रुपए क्विंटल मिल रहे हैं। लहसुन उत्पादक बड़ी लागत लगाकर परेशान हो रहे हैं। कहीं-कहीं तो अच्छे रंग वाली लहसुन के बाद इनमें से पानी निकलने लगता है।

ऐसी उपज को किसानों को फेंकना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार पहली बार लहसुन में बीमारी आई। यह कौन सी बीमारी है पता नहीं लगा। कहीं-कहीं मौसम की प्रतिकुलता भी उपज को बर्बाद करने में सहायक रही। खराब लहसुन की पैदावार ज्यादा रही तो अच्छी लहसुन खरीदारों की पहुंच से दूर हो जाएगी। उज्जैन मंडी लहसुन की बड़ी मंडी है।

जावरा, नीमच, मंदसौर मसाला मंडी मानी जाती है। इस क्षेत्र के लहसुन उत्पादक किसानों को क्वालिटी वाले लहसुन के सबसे ऊंचे दाम मिलते हैं। लहसुन का उपयोग खाने के साथ दवा बनाने के काम मेें आने से देश के बड़े नगरों में भी ऊंचे भाव पर बिकने जाती है लेकिन इस साल इस प्रकार के व्यापारी में कमी की संभावना अभी से बताई जाने लगी है। व्यापारी राय में इन दिनों किसान खराब लहसुन अधिक ला रहे हैं। कुछ दिन बाद अच्छी और क्वालिटी वाली लहसुन आने की संभावना है।

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