स्कूल की छुट्टियों में अध्यात्म की पाठशाला:ग्रीष्म कालीन  संस्कार शिविर , बच्चे को गीता, यज्ञ, पूजन, योग की शिक्षा

उज्जैनएक महीने पहले

उज्जैन। शहर का यह पहला शिविर है, जिसमें खेलकूद मस्ती के साथ बच्चों को गीता, योग, यज्ञ, हवन, पूजन, श्लोक का पाठ याद कराया जा रहा है। संस्कार शिविर में आने वाले 6 से 8 वर्ष तक के बच्चे लगन से अध्यात्म के पाठ सीख रहे है।अंकपात मार्ग गायत्री शक्ति पीठ उज्जैन पर विद्यार्थियों के लिए ग्रीष्म कालीन संस्कार शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर में 6 से 15 आयु वर्ग के करीब 75 विद्यार्थी भागीदारी कर रहे हैं। उम्र और रूचि के अनुसार दो वर्गों में बांट कर इनको प्रशिक्षण दिया जा रहा है।बच्चो को यज्ञ करना और गीता अध्ययन सिखाया जा रहा है। व्यक्तित्व विकास के लिए खेलकूद, अभिव्यक्ति तथा रुचि कर स्वस्थ मनोरंजन भी यहां कराया जा रहा है। यह ज्ञान उन्हें आगामी जीवन में अनेक समस्याओं से निपटने में सहायक सिद्ध होगा।

9 मई से प्रारंभ हुए इस संस्कार शिविर को 31 मई तक आयोजित किया जाना था, लेकिन विद्यार्थियों और अभिभावकों के आग्रह पर इसे 5 जून तक बढ़ाया गया है । शिविर का संचालन आशा सेन, लक्ष्मी कांडे, सोनू सोलंकी कर रहे हैं।

गीता अध्ययन, यज्ञ संस्कार विधि, नैतिक शिक्षा दी जा रही

बच्चों की रूचि के अनुसार शिक्षा शिविर संचालक मंजु त्रिपाठी का कहना है कि संस्कार शिविर में आने वाले छोटे से छोटे बच्चों को रूचि के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें योग, प्रणायम, गीता अध्ययन, यज्ञ संस्कार विधि, नैतिक शिक्षा दी जा रही है। ज्ञान संवर्धन के प्रति आस्था ही विद्यार्थी का जीवन गौरव है। इसके लिए समुचित तत्परता और तन्मयता का उपयोग करना पड़ता है। यह सद्गुण शिक्षा प्राप्ति के साथ-साथ बढ़ते जाएं तो उसमें सफलता के साथ-साथ स्वभाव को प्रगतिशील बनाने का दोहरा लाभ मिलता है।