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गाइड्स पहली परीक्षा में ही फेल:कलेक्टर ने पूछा- नागचंद्रेश्वर मंदिर में कौन से नाग विराजित हैं? गाइड्स जवाब नहीं दे सके

उज्जैन20 दिन पहले
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प्रशिक्षण ले रहे गाइड्स से बातचीत करते कलेक्टर आशीष सिंह। - Dainik Bhaskar
प्रशिक्षण ले रहे गाइड्स से बातचीत करते कलेक्टर आशीष सिंह।

शहर में पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के क्रम में प्रशासन ने 50 गाइड्स को प्रशिक्षण देकर तैयार किया है। बुधवार को इन गाइड्स की कलेक्टर आशीष सिंह से मुलाकात कराई गई। कलेक्टर ने गाइड्स से सवाल किया- महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में कौन से नाग विराजित हैं? इस पर गाइड्स जवाब नहीं दे सके। कलेक्टर ने फिर सवाल किया- महाकाल मंदिर के बारे में और क्या जानते हो? इस पर गाइड्स मौन रहे। कलेक्टर ने मंदिर समिति के अधिकारियों से कहा- इनकी दूसरी ट्रेनिंग कराओ, यह अभी कच्चे हैं।

मंदिर समिति ने गाइड्स के लिए आवेदन बुलाए थे। इनमें से 50 का चयन ट्रेनिंग के लिए किया गया था। इनकी ट्रेनिंग हो जाने पर विक्रम कीर्ति मंदिर में उन्हें मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर सिंह से मिलाया गया। सिंह ने गाइड्स की जानकारी और मनोबल की परीक्षा ले ली। दो ही सवालों में गाइड्स के मानसिक स्तर को भांप लेने के बाद कलेक्टर ने उन्हें फिर से ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सभी गाइड्स महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी हुई पौराणिक कथाएं टूरिस्ट को बताएंगे तो निश्चित रूप से उनकी रूचि यहां के विभिन्न दर्शनीय स्थलों के लिए जागेगी। उज्जैन आने वाले टूरिस्ट एक अच्छा अनुभव लेकर यहां से वापस जाएंगे। कलेक्टर ने कहा कि मंदिर के स्थापत्य, इतिहास एवं अन्य तथ्यों को जोड़कर रोचक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

पर्यटन को प्रोत्साहन देने के किए जा रहे प्रयास
उज्जैन में पर्यटन विकास और प्रोत्साहन के लिए गाइड्स सेवा शुरू करने की योजना है। इसके लिए पहले चरण में 50 गाइड तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें महाकालेश्वर मंदिर से लेकर शहर के अन्य पौराणिक, ऐतिहासिक स्थलों, मंदिरों आदि की जानकारी दी जा रही है। उन्हें सिखाया जा रहा है कि कैसे पर्यटकों और यात्रियों को वे शहर का महत्व बताएंगे। ट्रेनिंग के बाद इन्हें कलेक्टर से मिलाया गया था।

प्रशासन चाहता है कि महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों को शहर के अन्य स्थलों की भी प्रामाणिक जानकारी मिले। गाइड्स यात्रियों को बेहतर तरीके से जानकारी दे सकते हैं। इससे उन्हें रोजगार भी मिलेगा। इस अवसर पर प्रशासक एवं एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी, महाकालेश्वर संस्कृत एवं वैदिक संस्थान के प्रधान डॉ. पीयूष त्रिपाठी, सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल मौजूद थे।

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