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  • The Injection With Which Corona Is Treated In Private Hospitals, Proved To Be Ineffective In ICMR Research, Injections Worth Rs 1.25 Crore In Ujjain

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रिपोर्ट:जिस इंजेक्शन से निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज, आईसीएमआर की रिसर्च में वो बेअसर साबित, उज्जैन में लग चुके सवा करोड़ रुपए के इंजेक्शन

उज्जैनएक महीने पहले
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प्रतिकात्मक चित्र

कोरोना मरीजों के इलाज के लिए जिस इंंजेक्शन के नाम पर मरीजों से हजारों रुपए वसूले जा रहे हैं, उसे आईसीएमआर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च के सॉलिडेरिटी ट्रायल में बेअसर पाया गया है।

उज्जैन सहित देश-प्रदेश और विदेशों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिवीर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। हाल ही में हुई रिसर्च में मरीजों के जीवन को बचाने या अस्पताल में रहने की अवधि कम करने के लिए व्यापक रूप से यह इंजेक्शन असरकारक नहीं है।

किसी भी श्रेणी के मरीज यानी लक्षण वाले, बगैर लक्षण वाले या गंभीर मरीजों पर रेमडेसिवीर, हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन एचसीक्यू, लोपावेविर या इंटरफेरॉन का परिणाम अच्छा नहीं पाया गया है। यह रिसर्च डब्ल्यूएचओ के निर्देशन में 30 देशों के 11000 से अधिक अस्पतालों में भर्ती मरीजों तथा भारत के 26 अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर की गई है।

सॉलिडेरिटी ट्रायल के नतीजों में रेमेडीसवीर इंजेक्शन का उपयोग ज्यादा प्रभावशाली नहीं पाया गया है। साथ ही अन्य तीन रीप्रपोज्ड ड्रग्स हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, लेपीरवीर और इंटरफेरॉन का 28 दिन की कोविड महामारी से देखी जाने वाली मृत्यु दर पर भी कोई प्रभाव नहीं पाया गया।

उज्जैन में 2505 इंजेक्शन लगा चुके हैं अस्पताल वाले

उज्जैन में 13 अक्टूबर तक की स्थिति में 2505 रेमेडिसवीर इंजेक्शन बिक चुके हैं। यानी इतने मरीजों को कोविड अस्पतालों में यह इंजेक्शन लगाया जा चुका है। अकेले आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही 100 से ज्यादा मरीजों को यह इंजेक्शन लगाए गए हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उक्त इंजेक्शन से मरीजों के स्वास्थ्य में कोई फायदा नहीं तो मरीजों और उनके अटेंडर को हजारों रुपए का खर्च क्यों भुगतना पड़ रहा है। उन पर इलाज का यह अतिरिक्त आर्थिक भार है, क्योंकि मरीज को अपने खर्च पर इंजेक्शन खरीदना होता है। अब आईसीएमआर भारत में कोविड-19 मरीजों के रेमेडिसवीर के अंधाधुंध उपयोग को रोकने के लिए सतर्क करेगा।

यह है कमाई का गणित

एक मरीज को करीब 12 इंजेक्शन लगते हैं। इंजेक्शन 2800 से 4800 रु. तक आता है। इसे लगवाने के लिए करीब 30000 रुपए तक का खर्च आता है। उज्जैन में करीब 10 मरीजों को हर रोज ये इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। इसमें मेडिकल संचालकों को 20 % तो होलसेलर को 8 % का मुनाफा होता है। डॉक्टर्स को इसका कमिशन मिलता है, इस वजह से वे मरीजों को यह इंजेक्शन लिखते हैं।

इसे प्रभावी नहीं पाया

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. सुधाकर वैद्य ने कहा कि कोविड मरीजों के इलाज में उक्त दवाइयों का उपयोग किया जा रहा था। सॉलिडेरिटी ट्रायल में भर्ती मरीजों की मृत्यु दर पर रेमडेसिवीर या अन्य दवाई का प्रभाव नहीं पाया है। आगे जो गाइड लाइन तय होगी, उसका पालन किया जाएगा।

मरीज खुद लगवाते हैं

काेविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. एचपी सोनानिया ने कहा कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन मरीजों की इच्छा के अनुसार लगाए जा रहे थे। मरीज के अटेंडर ही खरीद कर लाते हैं। कोविड मरीजों के इलाज की जो भी गाइड लाइन आएगी, उसका पालन किया जाएगा। उसके अनुसार मरीजों का इलाज किया जाएगा।

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