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दबाव के लिए मकान तोड़ने की थी तैयारी:मामला निगम ठेकेदार की आत्महत्या का परिजन बोले- इतना परेशान कभी नहीं देखा

उज्जैन8 दिन पहले
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निगम ठेकेदार शुभम खंडेलवाल की आत्महत्या के मामले में परिजन के आरोप हैं कि दबाव बनाने के लिए उनके मकान को तोड़ने की भी योजना थी। शुभम ने पहली बार निगम के लिए काम नहीं किया। सिंहस्थ के पहले से वह निर्माण कार्य में है। शुरुआत में उसे पुड़िया यानी दो लाख के काम दिए गए।

इन कामों के लिए तब वरिष्ठों की अनुमति की भी जरूरत नहीं थी। यह काम अफसर अपने क्षेत्र की आवश्यकता के अनुसार करवा सकते थे। इसके बाद शुभम ने बड़े काम लेना शुरू किए। उसने सबसे ज्यादा काम वार्ड 25 में किए हैं। इसी वार्ड के एक काम का भुगतान अटक जाने से वह तनाव में था। परिजन का आरोप है कि इसके लिए निगम के उपयंत्रियों ने दबाव भी डाला। दबाव में वह परिवार से भी चिड़चिड़ा रहने लगा। किसी से ठीक से बात नहीं करता। दिन-रात भुगतान को लेकर चिंता में था। बताया जाता है कि उसका निगम में 50 लाख रुपए बकाया है। वार्ड 25 में उसने तो काम किया। उसका बिल भुगतान नहीं होने से वह तनाव था।

निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया शुभम ने शहर में कहां-कहां काम करवाए। उसकी नपती करवाई जा रही है। उसका नियमानुसार कितना भुगतान होता है और उसने कितने का बिल पेश किया है। इसकी भी जांच करवाई जा रही है। एक-दो दिन में समिति की रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि उसे कितना भुगतान करना है।

पारदर्शिता आए, इसलिए ऑफलाइन से ऑनलाइन हुए पर बदला कुछ नहीं, जब तक पीसी नहीं, तब तक काम नहीं

नगर का निगम : अनुमति, भुगतान में देरी का सबसे बड़ा कारण यही
काम में पारदर्शिता आए, इसलिए नगरीय निकाय ने निर्माण का पूरा सिस्टम ऑनलाइन कर दिया। इसके बावजूद निर्माण से जुड़े लोगों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उन्हें चक्कर कटवाए जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण जो सामने आ रहा है, वह है पीसी यानी पर्सनल कमीशन। निगम से जुड़े ठेकेदारों का कहना है निगम में छोटे-बड़े सभी कामों के लिए पीसी तय है।

यह निगम का अलिखित नियम है। कोई काम इसके बगैर नहीं होता। फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल तक पहुंचने के लिए उस पर वजन रखना पड़ता है। इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला जाता लेकिन इसके बिना काम को गति भी नहीं मिलती। शुरुआत से लेकर पूर्णता तक हर जगह बैरिकेड्स लगे हैं। उन्हें हटाने के लिए पीसी देना ही पड़ता है। निर्माण की अनुमति में हो रही देरी और अनियमितताओं की शिकायतों के समाधान के लिए सरकार ने नया साॅफ्टवेयर भी बनाया। इसका उद्देश्य था- किसी भी अनुमति, भुगतान को पारदर्शी बनाना। इसके बाद भी पीसी का खेल खत्म नहीं हुआ है। सड़क, नाला, पुल, गार्डन, रोटरी विकास के काम के लिए ठेकेदारों को पीसी देना पड़ती है।

ऐसा है निगम में पीसी का खेल
नगर निगम में यदि कोई काम करवाना होता है तो बिना पीसी के नहीं हो पाता। लेन-देने के इस काम में अधिकारी से लेकर निचले स्तर के कर्मचारी तक शामिल हैं, जिनमें 10 से 17 प्रतिशत तक का कमीशन तय होता है। 17 फीसदी पीसी यानी पर्सनल कमीशन। इसे आम बोल-चाल की भाषा में मान सम्मान भी कहा जाता है। चाहे कोई भी हो, काम करवाने के लिए पीसी देना ही पड़ता है। जब तक पीसी नहीं मिलता, फाइल आगे नहीं बढ़ती।

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