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मोदी के लिए महामृत्युंजय मंत्र ही क्यों:PM के लिए CM शिवराज ने किया जाप; जानिए उस मंत्र के अर्थ, महत्व से जुड़ी हर बात...

उज्जैन6 महीने पहले

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक के बाद मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई भाजपा नेताओं ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। इस मंत्र का उल्लेख शिवपुराण, ऋग्वेद से यजुर्वेद में मिलता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भगवान शिव की स्तुति के लिए किया जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को अति प्रिय है। बताते हैं कि रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करने पर शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। विद्वान पंडितों के जरिए जानते हैं इसका अर्थ और फायदों के बारे में...

महाकाल मंदिर के पुजारी पं. आशीष शर्मा बताते हैं महाकाल मंदिर में इस मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग अकेला दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग है, इसलिए यहां महामृत्युंजय मंत्र की सिद्धि जल्द प्राप्त होती है।

ये मंत्र जीवन देने वाला है। इससे जीवन शक्ति बढ़ती है। इस मंत्र का जाप करने वालों को संसार के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती हैं। जीवन में सकारात्मकता भी बढ़ती है। रोज रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करने से अकाल मृत्यु (असमय मौत) का भय दूर होता है। साथ ही, कुंडली के दूसरे बुरे रोग भी शांत होते हैं। इसके अलावा, पांच तरह के सुख भी इस मंत्र के जाप से मिलते हैं।

मंत्र -

  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।

इस मंत्र को आगे और पीछे संपुट के साथ ऐसे भी जाप करते हैं

  • ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !!

महामृत्युंजय मंत्रोच्चार से शक्ति संचार

हम भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो हर श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं। पूरे जगत का पालन-पोषण करते हैं।

मंत्र का शब्दश: अर्थ

त्रयंबकम- तीन नेत्रों वाला; कर्मकारक। यजामहे- हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं।

सुगंधिम्- मीठी महक वाला, सुगंधित। पुष्टि- एक सुपोषित स्थिति, फलने वाला व्यक्ति। वर्धनम- वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है। उर्वारुकमिव - जैसे, इस तरह। बंधनात- वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है। मृत्यु- मृत्यु से मुक्षिय - हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें। मामृतात - अमरता, मोक्ष।

जाप के समय ये ध्यान रखें

  • उच्चारण में शुद्धता रखें।
  • रुद्राक्ष की माला से ही जाप करें क्योंकि संख्याहीन जाप का फल प्राप्त नहीं होता है।
  • अधिक से अधिक कितना भी जाप किया जा सकता है।
  • मंत्र का उच्चारण करते समय स्वर होठों से बाहर नहीं आना चाहिए।
  • जाप करते समय माला को गौमुखी में ढंककर रखें।
  • जाप से पहले भगवान के समक्ष धूप दीप जलाएं। जाप के दौरान दीपक जलता रहे।
  • इस मंत्र का जाप करते समय शिवजी की प्रतिमा, तस्वीर, शिवलिंग या महामृत्युंजय यंत्र में से कोई एक को अपने पास अवश्य रखें।
  • मंत्र जाप हमेशा कुशा के आसन पर किया जाता है।
  • जाप के लिए शांत जगह चुनें, जिससे जाप के समय मन इधर-उधर न भटके।

महामृत्युंजय मंत्र का जप ऐसे किया जाता है

रोज रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करने से अकाल मृत्यु (असमय मौत) का डर दूर होता है। साथ ही, कुंडली के दूसरे बुरे रोग भी शांत होते हैं। इसके अलावा पांच तरह के सुख भी इस मंत्र के जाप से मिलते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र जप के फायदे

  • भय से छुटकारा पाने के लिए 1100 मंत्र का जप किया जाता है।
  • रोगों से मुक्ति के लिए 11000 मंत्रों का जप किया जाता है।
  • पुत्र की प्राप्ति के लिए, उन्नति के लिए, अकाल मृत्यु से बचने के लिए सवा लाख की संख्या में मंत्र जप करना अनिवार्य है।
  • यदि साधक पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह साधना करें, तो वांछित फल की प्राप्ति की प्रबल संभावना रहती है।

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