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स्मार्ट सिटी ने महाकाल मंदिर क्षेत्र से जुड़ी जानकारी दी:पुजारी बोले- मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं व अनुष्ठान स्थल भी बनाया जाए

उज्जैन2 महीने पहले
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स्मार्ट सिटी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कार्य व योजनाओं की जानकारी दी। - Dainik Bhaskar
स्मार्ट सिटी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कार्य व योजनाओं की जानकारी दी।

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों, पुरोहितों ने कहा है मंदिर के भीतर श्रद्धालुओं को सुविधा और परंपराओं के निर्वाह के लिए भी विकास कार्य होना चाहिए। मंदिर परिसर में अनुष्ठान के लिए कोई स्थान नहीं है। श्रद्धालुओं को धूप, बारिश से बचाने के लिए भी इंतजाम नहीं है।

स्मार्ट सिटी द्वारा मंदिर के आसपास किए जा रहे विकास कार्यों और नई योजनाओं की जानकारी बुधवार को मंदिर के पुजारियों, पुरोहितों को दी गई। उनसे सुझाव भी लिए गए। अब इन सुझावों को प्रस्तावित योजनाओं में शामिल किया जाएगा। मंदिर के आसपास अब सिटी चैलेंज मिशन के काम शुरू होंगे। इनमें महाराजवाड़ा हेरिटेज धर्मशाला, रुद्रसागर विकास, रामघाट सौंदर्यीकरण शामिल हैं। मंदिर समिति सदस्य पं. आशीष पुजारी के अनुसार स्मार्ट सिटी ने जो प्रजेंटेशन दिया वह केवल बाहरी कामों का है। जबकि जरूरत भीतर भी सुविधाएं विकसित करने की है। मंदिर धार्मिक स्थल है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की जरूरत आसान दर्शन और सुविधापूर्वक अनुष्ठान आदि कराने की है। इस दिशा में भी काम होना चाहिए।

मंदिर परिसर 8 गुना बड़ा होगा, पर्यटन को प्रोत्साहन

  • स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने मंदिर के आसपास चल रहे विकास कार्यों और प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी वीडियो प्रजेंटेशन के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि पूरा क्षेत्र पर्यटन को प्रोत्साहित करेगा। इससे उज्जैन आने वाले यात्रियों, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। अत्याधुनिक सुविधाएं, रमणीय स्थल बनने से लोगों का आवागमन बढ़ेगा। स्मार्ट सिटी के एडी अंशुल गुप्ता, मंदिर समिति प्रशासक गणेश धाकड़, एडीएम संतोष टैगोर, एएसपी अमरेंद्रसिंह, तहसीलदार पूर्णिमा सिंघी, सहायक प्रशासक आरके तिवारी व अन्य मौजूद थे।
  • पुजारियों व पुरोहितों ने बैठक में यह सुझाव दिए
  • पुजारियों, पुरोहितों व मंदिर के कर्मचारियों के लिए वाहन स्टैंड मंदिर के समीप हो।
  • अन्नक्षेत्र का विस्तार करें तथा भोजन शाला के साथ वेटिंग रूम भी बनाया जाए।
  • यज्ञ-अनुष्ठान के लिए 200 से ज्यादा लोगों के बैठने का स्थान बनाया जाए।
  • पुजारियों, पुरोहितों, मीडिया और वीआईपी के आवागमन के लिए पृथक द्वार हों।
  • भगवान के स्वरूपों, पालकी, रथ आदि को दर्शन मार्ग पर प्रदर्शित कर सकते हैं। मंदिर परिसर से मिली पुरातत्व सामग्री का संग्रहालय होना चाहिए।
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