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  • The Report Of All The People Who Came In Contact With The Covid Victim Couple Was Negative, The Elderly Couple Breathed A Sigh Of Relief, No FIR In The Epidemic Act

कोरोना अपडेट @ उज्जैन:कोविड पीड़ित दंपती के संपर्क में आए सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव, बुजुर्ग दंपती ने ली राहत की सांस, महामारी एक्ट में एफआईआर नहीं

उज्जैन10 महीने पहले
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दो दिन पहले सूरत से उज्जैन लौटे बुजुर्ग दंपती के कोविड पॉजिटिव आने के बाद उनके संपर्क में आए सभी लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है। यानी किसी को कोरोना नहीं निकला। बुजुर्ग दंपती के परिवार में दो बच्चों समेत 5 व 4 बाहरी संपर्क के लोगों की कोविड की जांच कराई गई थी। बुजुर्ग दंपती सहित 9 अन्य लोग पूरी तरह से स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

आरआर टीम के नोडल अधिकारी डॉ. रौनक एलची ने बताया कि बुजुर्ग दंपती विवाह सूरत में विवाह समारोह में शामिल होकर ट्रेन से 29 नवंबर को उज्जैन आए थे। सर्दी-खांसी व बुखार के चलते वे अपना इलाज करवाते रहे। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उन्होंने प्राइवेट लैब में अपना कोविड टेस्ट करवाया था। इसमें वे पॉजिटिव पाए गए।

डॉ. एलची ने बताया कि इनके सामने आने के बाद संपर्क में आए करीब 9 लोगों के भी सेंपल लेकर जांच कराई थी। इसमें परिवार के साथ दुकान व घर के बाहर के कुछ लोग शामिल हैं। सभी को एहतियात रखने व स्वास्थ्य पर नजर रखने का कहा गया है।

महामारी एक्ट में केस दर्ज नहीं -
कोविड-19 को लेकर सरकार ने महामारी एक्ट लागू किया हुआ है। बीमारी छुपाने पर इस धारा 269 व 270 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए। डॉ. एलची ने बताया कि दोनों बुजुर्ग को अपनी बीमारी छुपाने का पछतावा है। हालांकि परिवार के साथ सभी 9 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आने पर दोनों बुजुर्ग दंपती ने राहत की सांस ली है। उनके गलती स्वीकारने के बाद प्रशासन ने केस दर्ज नहीं कराया है।

क्या है आईपीसी की धारा 269 और 270 -

ये दोनों धाराएं भारतीय दंड सहिता के अध्याय 14 के तहत आती हैं, जिसमें जनता के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुख, शिष्टाचार और नैतिकता पर असर डालने वाले अपराध शामिल है।
धारा 269 - किसी बीमारी को फैलाने के लिए किया गया लापरवाही भरा काम जिससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है।

धारा 270 - किसी बीमारी को फैलाने के लिए किया गया घातक या नुकसानदेह काम जिससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है।

ये है सजा का प्रावधान -
आईपीसी की धारा 269 के तहत अपराधी को छह महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों मिलता है और धारा 270 के तहत दो साल की सजा या जुर्माना या फिर दोनों मिलता है। धारा 270 में इस्तेमाल किया घातक या नुकसानदेह शब्द ये दर्शाता है कि आरोपी ने जानबूझकर कदम उठाया है।