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वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट की खुली पोल:टीके के दोनों डोज लगवाए बेटे ने, सर्टिफिकेट मृत पिता का मिला, अब बेटे को दुकान बंद होने की चिंता

उज्जैन9 महीने पहले
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वैक्सीनेशन का टारगेट पूरा करने के बीच उज्जैन में प्रशासनिक अमले की बड़ी चूक सामने आई है। बेटे के वैक्सीन लगवाने के बाद मृत पिता के नाम से कोविड वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।

दरअसल किराना व्यवसायी अशोक कुमार पोरवाल (60 वर्ष) ने कोविड वैक्सीनेशन के दोनों डोज लगवा लिए। लेकिन उनके नाम का एक भी सर्टिफिकेट नहीं मिला। जो सर्टिफिकेट मिला वह पिता स्व. शांतिलाल पोरवाल के नाम से जारी हो गया। अशोक पोरवाल ने कहा कि मेरे पिताजी की 93 साल की उम्र में 2018 में ही मौत हो गई थी। जब कोरोना का नाम भी नहीं सुना था।

पोरवाल ने बताया कि जो सर्टिफिकेट मुझे मिला है उसमें मेरे पिता जी का नाम लिखा है, इतना ही नहीं उनकी उम्र भी 26 साल ही लिखी गई है। यह सर्टिफिकेट मेरे किसी भी काम का नहीं है। इसे लेकर उन्होंने खाचरौद तहसील कार्यालय में शिकायत की, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी उनके नाम का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया।

मिस्टेक पर मिस्टेक -

अशोक ने बताया कि मेरा पहला डोज 10 अप्रैल को मांगलिक भवन खाचरौद में लगाया। पहले डोज का ऑनलाइन सर्टिफिकेट नहीं मिला। सर्टिफिकेट नहीं मिलने की बात जब अधिकारियाें को बताई तो मुझे दूसरा डोज 5 जून को लगा दिया गया। इसके बाद मुझे जो सर्टिफिकेट दिया वो मेरे पिता के नाम का था। उन्हें उज्जैन के नरिसंह मंदिर धर्मशाला में वैक्सीन लगाने की बात लिखी गई है। यह वैक्सीन उन्हें 7 जुलाई को लगाया गया। पिता के सर्टिफिकेट में मेरा वोटर आइडी नंबर डला है। 6 माह बाद भी मेरी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

अब दुकान बंद होने की चिंता -
अशोक ने बताया कि मेरे नाम से कोविड वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट नहीं है। प्रशासन ने सर्टिफिकेट नहीं होने पर दुकान सील करने के निर्देश दे दिए हैं। यदि मेरी दुकान पर प्रशासन की टीम आ गई तो मैं उन्हें क्या दिखाउंगा। वे मेरी दुकान सील कर देंगे तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

सॉफ्टवेयर में एंट्री से मिस्टेक -
सॉफ्टवेयर में एंट्री की वजह से यह परेशानी हुई है। तकनीकी अमले से बात करके सॉफ्टवेयर में मोबाइल नंबर अपडेट कर देंगे। इसके बाद उनके नाम का सर्टिफिकेट जारी कर देंगे।
डॉ. संजय शर्मा, सीएमएचओ, उज्जैन।