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माधवनगर में मौतें संदिग्ध हैं:ऑक्सीजन की व्यवस्था तो पूरी थी, फिर मरीजों की जान कैसे गई

उज्जैन12 दिन पहले
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  • कलेक्टर बोले-4 मौतें, ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं, सभी निगेटिव
  • रावत ने कहा-5 मौतें हुईं, 1 रात में, 4 सुबह, सभी संदिग्ध
  • और शाम तक स्थिति फिर सामान्य, इलाज शुरू

माधवनगर अस्पताल में गुरुवार दोपहर अचानक हड़कंप मच गया। यहां भर्ती 42 साल के भाजपा कार्यकर्ता जितेंद्र शेरे ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी कि माधवनगर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म, मरीजों की जान खतरे में। अगले ही दिन उनकी मौत हो गई।

पत्नी का आरोप है कि ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण उनकी जान गई है। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों और परिसर में मौजूद लोगों का कहना था कि मौतें 5 से ज्यादा हुई हैं। हालांकि अस्पताल पहुंचे अपर कलेक्टर सोजान सिंह रावत ने स्वीकारा कि पांच मरीजों की मौत हुई है।

एक की रात में और 4 की दिन में। सभी कोविड निगेटिव थे लेकिन इन्हें गंभीर होने पर आईसीयू में रखा गया था। ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई। कलेक्टर ने कहा कि 4 मौतें हुईं। बाकी अफवाह है और ऐसा करने वालों पर केस दर्ज करेंगे। इधर, मौतों की खबर लगते ही हड़कंप मच गया। अस्पताल में भीड़ लग गई। शेरे समर्थकों और परिजन ने अस्पताल में हंगामा-पथराव शुरू कर दिया। मौतों की संख्या पर अभी भी प्रश्न चिह्न लगा हुआ है।

सोमवार को भर्ती हुए थे शेरे, 80% संक्रमण लेकिन रिपोर्ट निगेटिव

भाजपा अजा मोर्चा के नगर मंत्री जितेंद्र शेरे निवासी मक्सी रोड गोपालपुरा ने हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म होने को लेकर गुरुवार रात तीन-चार ग्रुप में पोस्ट डालते हुए संगठन, अपने दोस्तों तथा रिश्तेदारों को अवगत कराया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि माधवनगर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म... मरीजों की जान खतरे में।

हॉस्पिटल के आंतरिक हालातों को देखते हुए ही उन्होंने इस समस्या को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया था। उसके बाद उनकी गुरुवार सुबह मौत हो गई। उन्हें सोमवार को माधवनगर में भर्ती कराया गया था, उनके फेफड़ों में 80 प्रतिशत तक इंफेक्शन था। भाजपा नेता और प्रदेश मीडिया प्रभारी सत्यनारायण खोईवाल ने आरोप लगाया ऑक्सीजन की कमी से ही अजा मोर्चा के नगर मंत्री की मौत हुई है।

बाहर मौतों का शोर था, कोविड वार्ड में भर्ती मरीज खौफ में ले रहे थे सांसें

माधवनगर में मौतों की जानकारी लगते ही हम अस्पताल पहुंचे। बाहर मौतों का शोर था। रुदन था। गुस्सा था और जिम्मेदारों की सफाइयां थीं। इस अस्पताल में 123 मरीज भर्ती थे। इनमें से करीब 60 फीसदी मरीज गंभीर हैं। इस खतरे के बाद भी हम कोविड वार्ड में पहुंचे। डॉक्टरों की भागदौड़ के बीच भर्ती मरीजों में अजीब सन्नाटा था। खौफ से सांसें ले रहे मरीज जिंदगी की आस लगाए डॉक्टरों की ओर देख रहे थे। हमने मौतों पर वहां मौजूद कुछ कर्मचारियों से बात की तो पहले इधर-उधर देखा। फिर बोले- नाम मत लेना, हमारी नौकरी चली जाएगी, लेकिन यहां मौतें तो हुई हैं। 5 से ज्यादा हुई हैं।

हमें कुछ भी बात करने से मना किया है। रात में ऑक्सीजन की कुछ कमी आई थी। कलेक्टर साहब और दूसरे अधिकारी भी आए थे। लेकिन फिर व्यवस्था संभल गई थी। जो मौतें हुई हैं, उनके शव गाड़ी से सीधे श्मशान भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ पूछना है तो साहब लोगों से पूछो। फिर हमने ऑक्सीजन सप्लाई का काम देख रहे मेंटेनेंस प्रभारी आलोक से बात की। वो बोले- 10 सिलेंडरों का बैकअप रखते हैं। एक बड़े सिलेंडर में 54 घरेलू सिलेंडर के बराबर गैस है। फिर भी इतना जरूर है कि गंभीर मरीजों की वजह से ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ी है।

शव कतार में थे, 1 का काम होने पर अस्पताल से दूसरा आ रहा था, शाम तक ऐसे 27 पहुंचे

अस्पताल में मचे हंगामे के बाद पुराने चक्रतीर्थ व विद्युत शवदाह गृह और त्रिवेणी के मोक्षधाम व सीएनजी शवदाह में लगातार शव पहुंचे। इसके लिए कतार लगी थी। 1 का अंतिम संस्कार होने के बाद दूसरे को भेजने की सूचना दे रहे थे। शाम होते-होते आंकड़ा 27 तक जा पहुंचा। इनमें कौन पॉजिटिव, कौन संदिग्ध या सामान्य...कोई बताने को तैयार नहीं था। बस गाड़ी आती, कवर में पैक शव निकालते और सीधे अंतिम संस्कार। त्रिवेणी के सीएनजी में 7, ओटले पर 2 का अंतिम संस्कार हुआ। चक्रतीर्थ के विद्युत गृह में 3 और ओटलों पर 15 अंतिम संस्कार हुए। शेष|पेज 8 पर
शव कतार में थे, 1 का काम होने पर अस्पताल से दूसरा आ रहा था, शाम तक ऐसे 27 पहुंचे
विद्युत शवदाह गृह लाए गए शवों में एक माधवनगर अस्पताल, एक आरडी गार्डी और एक निजी अस्पताल से लाया बताया गया। यह भी पता चला कि आरडी गार्डी से 7 शव लाए गए। एक शव अमलतास अस्पताल से भी लाया गया। अंतिम संस्कार के प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना पॉजिटिव और कोरोना संदिग्ध मरीजों की मृत्यु होने पर उनके शवों का अंतिम संस्कार सीएनजी और विद्युत शवदाह गृह में किया जाता है। विद्युत और सीएनजी शवदाह गृह में 10 शवों का अंतिम संस्कार होने की जानकारी है।
वहां मिले लोग इसकी तस्दीक नहीं कर रहे कि मरीज पॉजिटिव था या संदिग्ध। इसलिए भास्कर भी ऐसा कोई दावा नहीं कर रहा। हम केवल दोनों श्मशान पर हुए अंतिम संस्कार के आंकड़ा बता रहे हैं। कोरोना के कारण मृतकों का अधिकृत आंकड़ा प्रशासन के हेल्थ बुलेटिन से ही प्रामाणिक माना जाता है।

कोरोना का नया रिकॉर्ड 130 पॉजिटिव, फिर 1 मौत
कोरोना का संक्रमण अब तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार को 130 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। साथ ही 1 मरीज की मौत हुई है। गुरुवार को 1247 लोगों की लैब से रिपोर्ट आई है, जिनमें शहरी क्षेत्र के 110, बड़नगर के एक, नागदा के 10, तराना के चार महिदपुर व घटि्टया के 2-2 मरीज तथा खाचरौद के एक मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
डॉ. अहिरवार की इंदौर में मौत
विक्रम विवि में प्राचीन भारतीय इतिहास व पुरातन अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके अहिरवार की गुरुवार को कोरोना से इंदौर में मौत हो गई। 21 मार्च से उनका इलाज इंदौर के मेदांता हॉस्पिटल में चल रहा था। उनकी शुरुआती रिपोर्ट निगेटिव, बाद में पॉजिटिव आई थी।

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