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उज्जैन में विश्व की पहली ऐसी घड़ी:चैत्र प्रतिपदा पर उज्जैन के टावर पर लगेगी वैदिक घड़ी, सूर्योदय से होगी समय की गणना

उज्जैन6 महीने पहलेलेखक: ओमप्रकाश सोणोवणे
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विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी जारी होगा। - Dainik Bhaskar
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी जारी होगा।

विश्व की पहली वैदिक घड़ी चैत्र प्रतिपदा 2 अप्रैल को उज्जैन में टावर चौक पर स्थापित होगी। इसमें ग्रीन विच टाइम जोन के 24 घंटों को 30 मुहूर्त में विभाजित किया गया है। इस घड़ी को मोबाइल और टीवी पर भी सेट किया जा सकेगा। इसके लिए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी मोबाइल ऐप भी जारी किया जाएगा।

उज्जैन को प्राचीन काल में काल गणना का केंद्र माना जाता रहा है। इसका कारण उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है। कभी यह रेखा शहर के बीच रही, इस कारण प्राचीन कर्कराज मंदिर स्थापित किया गया। कालांतर में यहां राजा जयसिंह ने देश की चार वेधशालाओं में से एक वेधशाला स्थापित की। सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक खगोलविद् वराह मिहिर और अन्य विद्वानों के प्राचीन ग्रंथों में उज्जैन से कालगणना का उल्लेख मिलता है।

स्वर्गीय पुराविद् पद्मश्री डॉ. विश्री वाकणकर ने उज्जैन के समीप ग्राम डोंगला में कर्क रेखा को तलाशा। यहां नई अत्याधुनिक वेधशाला बनाई गई है। जहां शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध है। डोंगला वेधशाला अब आईआईटी के साथ मिल कर खगोल विज्ञान पर काम कर रही है।

सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी के अनुसार उज्जैन के इस प्राचीन गौरव को फिर से स्थापित करने के लिए विश्व की पहली वैदिक घड़ी चैत्र प्रतिपदा 2 अप्रैल को टावर पर स्थापित की जाएगी। इसकी तैयारी हो चुकी है। इसके लिए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी निधि से राशि दी है। टावर के साथ इंदौर रोड पर नानाखेड़ा चौराहे पर भी समय स्तंभ बनाया जाएगा। इसके अलावा विक्रम पंचांग का प्रकाशन भी किया जाएगा।

हर मुहूर्त का धर्म से संबंधित खास नाम रखा गया

डॉ. तिवारी के अनुसार वैदिक घड़ी में मौजूदा ग्रीन विच पद्धति के 24 घंटों को 30 मुहूर्त (घटी) में विभाजित किया गया है। समय को पल, घटी में विभाजित किया गया है। हर घटी के नाम दिए गए हैं। यह धार्मिक नाम हैं, जिनका एक खास अर्थ है। इस घड़ी को लगाने का उद्देश्य भारतीय समय गणना से आम लोगों को परिचित कराना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उज्जैन की कालगणना को फिर से स्थापित करना है। उज्जैन में वैदिक घड़ी स्थापित करने के बाद देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी इसे लगाने की योजना बनाई जाएगी। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने संवत् की शुरुआत की थी। पंचांगों में इसी संवत् को मान्यता दी गई है।

ग्रीनविच पद्धति की समय गणना भी रहेगी

वैदिक घड़ी में मौजूदा ग्रीनविच पद्धति की समय गणना यानी घंटे, मिनट, सेकंड वाली घड़ी भी रहेगी। इसी के साथ वैदिक घड़ी की गणना 30 घटी वाले मुहूर्त वाली भी रहेगी। वैदिक घड़ी का उपयोग मुहूर्त और समय से संबंधित अन्य कामों में भी किया जा सकेगा, जैसे ब्रह्म मुहूर्त, राहु काल आदि पता करना। वैदिक घड़ी इंटरनेट, जीपीएस से जुड़ी होने से हर जगह के लोग इसका उपयोग कर सकते हैं। यह घड़ी मौजूद स्थान के सूर्योदय के आधार पर समय की गणना करेगी।

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