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परमहंस अवधेश पुरी का षड्दर्शन साधु समाज ने किया बहिष्कार:मठ-मंदिरों के सरकारीकरण के विरोध का भी प्रस्ताव, शिप्रा को लेकर सीएम से मिलेंगे

उज्जैन11 दिन पहले
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षड़्दर्शन संत समाज ने मक्सीरोड स्थित अवधेश धाम के संत परमहंस अवधेश पुरी का बहिष्कार किया है। यह भी तय किया है कि जिस मंच पर अवधेश पुरी रहेंगे, वहां अन्य संत नहीं जाएंगे। षड्‌दर्शन साधु समाज व भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक शुक्रवार को महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित श्री महानिर्वाणी अखाड़े में महंत विनीत गिरि की अध्यक्षता में हुई। बैठक में 13 अखाड़ों के स्थानीय प्रतिनिधियों के अलावा षड्दर्शन साधु समाज व अभा पुजारी महासंघ, अवंतिका तीर्थ पुरोहित संघ के सदस्य मौजूद थे।

13 अखाड़ों के स्थानीय प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट किया साधु अवधेश पुरी स्वयं को महानिर्वाणी अखाड़े से संबद्ध बताते हैं, जबकि उनके गुरु ब्रह्मलीन महंत प्रकाश पुरी ने उन्हें शिष्य पद और अखाड़े से बहिष्कृत किया था। इसके अलावा 13 नवंबर 2017 को षड्दर्शन साधु समाज संभागीय परिषद उज्जैन और भारतीय अखाड़ा परिषद उज्जैन भी उन्हें बहिष्कृत कर चुकी है। बैठक में प्रस्ताव पारित किया कि अवधेश पुरी से संबंध रखने वाले साधु समाज के प्रतिनिधियों का भी बहिष्कार किया जाएगा। शासन प्रशासन को यह अवगत कराने का निर्णय भी लिया गया कि अवधेश पुरी के बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाए।

गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करे जिला प्रशासन
बैठक में मठ-मंदिरों के सरकारीकरण के विरोध का भी प्रस्ताव पारित किया गया। अभा पुजारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी व नगर अध्यक्ष रूपेश मेहता की उपस्थिति में बैठक में फैसला हुआ कि कलेक्टर के माध्यम से साधु-संत व अभा पुजारी संघ के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से शासन को अवगत कराएंगे कि मठ व मंदिरों में अखाड़ा परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा व वंश परंपरा का ही पालन हो। बैठक में महाकालेश्वर मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। साधु-संतों की ओर से मंदिर प्रबंध समिति को यह सुझाव दिया जाएगा सशुल्क दर्शन व्यवस्था में एकरुपता लाई जाए।

शिप्रा की स्वच्छता के लिए अभियान जारी रहेगा
बैठक में शिप्रा शुद्धिकरण के लिए चलाए गए अभियान के बाद शासन-प्रशासन द्वारा अब तक किए गए प्रयास पर संतोष व्यक्त किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ मोहन यादव ने संतजनों को अवगत कराया 10 जनवरी के बाद संतों के प्रतिनिधि मंडल से मुख्यमंत्री की इस मुद्दे पर बात कराई जाएगी।

इसके लिए सतत संघर्ष जारी रखने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक में महंत विनीत गिरि, महंत डाॅ रामेश्वरदास, महंत गुप्त गिरि, महंत भगवानदास, महंत प्रेम गिरि, महंत काशीदास, महंत रामचंद्र दास, महंत दिग्विजय दास, महंत विद्या भारती, अवंतिका तीर्थ पुरोहित संघ से रमाकांत जोशी मौजूद थे।

अवधेश पुरी ने कहा- रोज मेरा बहिष्कार करें
इधर परमहंस अवधेश पुरी ने कहा है कि मेरा किसी से विरोध नहीं है और न विरोध करने वालों को जवाब देने का समय है। मैं हमेशा धर्म और राष्ट्र रक्षा की बात करता रहा हूं। मुझे परमहंस और क्रांतिकारी संत की उपाधियां सार्वजनिक तौर पर दी गई है। मेरे मुद्दा उठाने पर विक्रम विवि में दीक्षांत गाउन बदला गया। रेलवे ने वेटर की ड्रेस बदली। मैं दीक्षित संन्यासी हूं। जो मेरा विरोध कर रहे हैं, वे रोज विरोध करें। यदि मेरी बातें गलत हैं तो बैठक में मेरे ही मुद्दों पर प्रस्ताव क्यों पारित किए गए?

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