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आपदा तैयारी की सिर्फ बातें:पेड़ों की छंटाई का वन विभाग में अमला नहीं, न निगम के पास संसाधन

उज्जैन20 दिन पहले
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  • होमगार्ड ने तैयारी की लेकिन आपदा प्रबंधन की बैठक ही नहीं हुई

तेज आंधी-तूफान और बारिश में शहर राम भरोसे ही था। आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी होमगार्ड के पास है लेकिन जिला आपदा प्रबंधन की बैठक ही नहीं हुई इसलिए जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी। शहर में सूखे और खतरनाक स्थिति में आ चुके पेड़ों की छंटाई-कटाई की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है लेकिन वहां इसके संसाधन नहीं है। वन विभाग भी यह काम करता है

लेकिन उज्जैन वन विहीन होने से यहां अमला ही नहीं है। मौसम अलर्ट मैसेज सिस्टम से कलेक्टर से लेकर सभी विभागों के अधिकारी जुड़े हैं। दोपहर 3 बजे मैसेज में हवा और बूंदाबांदी का अलर्ट था। रात 9.45 बजे मैसेज आया तेज हवा और बारिश, लेकिन तब तक सब कुछ तबाह हो चुका था। आपदा प्रबंधन की यह हालत इसलिए है कि इसे लेकर कोई सतर्कता नहीं रखी जाती। नतीजा ऐनवक्त पर पूरा अमला हाथ पर हाथ रखकर बैठने के अलावा कुछ नहीं कर पाता, जैसे हालात शुक्रवार को बने। पूरा शहर अंधेरे में, सड़कों पर पेड़ गिरे, टीन, बोर्ड बिखर गए। बचाव कार्य के लिए वक्त पर अमले को मुश्किल का सामना करना पड़ा।

अंधेरे को दूर करने की जिम्मेदारी बिजली कंपनी की है लेकिन उसकी स्थिति यह है कि दूसरे दिन भी आधा शहर बिजली के बिना गुजर कर रहा है। शुक्रवार की तबाही के बाद सबसे बड़ी समस्या पेड़ों के गिरने की सामने आई। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने निगम के पास औजारों की कमी देखी तो वन अधिकारी किरण बिसेन को मोबाइल लगाया।

बिसेन ने बताया चूंकि उज्जैन वन विहीन जिला है, इसलिए उज्जैन में इस तरह के संसाधन और अमला नहीं है। देवास में है। इससे समझ लेना चाहिए पेड़ों की नियमित छंटाई और गिराऊ खतरनाक पेड़ों की निगरानी का काम क्यों नहीं हो पाता।

पूरे शहर में 300 से ज्यादा पेड़ और शाखाएं आंधी में टूट कर गिर गईं। शनिवार को सड़कें साफ हो गई लेकिन अभी भी कई शाखाएं टूट कर पेड़ों में ही अटकी हुई हैं। बिसेन का कहना है कि ऐसा अमला वहीं होता है जहां वन हो।

निगम के पास अमला लेकिन संसाधन नहीं
सिंघल की मजबूरी यह है कि उनके पास आपदा प्रबंधन के नाम पर केवल फायर ब्रिगेड है। उनका उद्यान विभाग केवल उद्यानों की देखभाल के लिए है। इसलिए बड़े पेड़ों की छंटाई या खतरनाक पेड़ों को हटाने का काम नहीं हो पाता।

इधर बारिश को देखते अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती सालाना आर्डर के रूप में कर दी गई है लेकिन यह अमला सक्रिय नहीं हो पाया है। इस आपदा प्रबंधन अमले को ट्रेनिंग और जिम्मेदारी देने का काम अभी नहीं हो पाया है। इसलिए शुक्रवार रात अमला जुट नहीं सका।
सिंहस्थ में जुटाए हर तरह के संसाधन, उपयोग नहीं
होमगार्ड को आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी है। सिंहस्थ 2016 में तत्कालीन संभागायुक्त रवींद्र पस्तौर ने सरकार से आपदा प्रबंधन के संसाधन उपलब्ध कराए। यह संसाधन स्टोर में सुशोभित हैं। हाल ही में इनका रखरखाव भी भोपाल की टीम ने आकर किया था। होमगार्ड के 15 जवानों को पुणे में ट्रेनिंग भी कराई गई।

कमांडेंट संतोष जाट ने जवानों को तैराकी, गोताखोरी, नाव चलाने जैसी ट्रेनिंग दिलाई। 490 जवानों में से 27 ऐसे जवान तैयार हो गए हैं जो हर तरह की आपदा में बचाव कार्य कर सकें। लेकिन शुक्रवार के हालातों में सारी तैयारी का उपयोग नजर नहीं आया।

जबकि अंधेरे में बचाव कार्य के लिए टॉर्च, स्टैंड लाइट और अन्य संसाधन हैं। जाट का कहना है कि होमगार्ड की पूरी तैयारी है। यदि मौसम का अलर्ट पहले मिल जाता तो संभव था अमले को तैयार रखा जा सकता था।

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