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बड़ा सवाल:तीसरा मौका जब निगम का भ्रष्टाचार फूटा, फिर भी निगम को छूट क्यों?, बड़ी सर्जरी होनी चाहिए

उज्जैन8 दिन पहले
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ठेकेदार की आत्महत्या के बाद निगम के उपयंत्रियों पर एफआईआर, इनाम घोषित। सफाईकर्मी की आत्महत्या और प्रताड़ना का आरोप निगमकर्मियों पर। और अब झिंझर शराब से मौतों में निगमकर्मी गिरफ्तार, सहायक आयुक्त पर भी कुछ आरोप। इतने मामले उजागर होने के बाद अब मौका है नगर निगम में भी बड़ी सर्जरी होना चाहिए।

वसूली से लेकर प्रताड़ना और भ्रष्टाचार तक के मामलों में निगम का नाम लगातार उछला है। रविवार की कार्रवाई को देखें तो पुलिस की भूमिका मिलने के बाद एसपी, एएसपी और सीएसपी पर कार्रवाई हो गई, तो निगम के मामले में ऐसी सख्ती क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि निगम के उपयंत्रियों पर इमाम घोषित होने के बाद सिर्फ निलंबन हुआ। वह भी कई दिनों बाद। निगमायुक्त ने कहा जहरीली शराब मामले में दोनों अस्थाई कर्मचारी थे उन्हें किसी प्रकार के नोटिस देने की जरूरत नहीं थी। उन पर सीधी कार्रवाई करने का प्रावधान है, जबकि दोनों उपयंत्री निगम में स्थाई कर्मचारी हैं। उन पर सीधी कार्रवाई न करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की है। अगर ऐसा है तो एसपी मनोज सिंह ने कैसे आरक्षकों की बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी। या फिर उपयंत्रियों को बचाया जा रहा है?

निगम ने 450 अस्थाई कर्मचारियों की सूची पुलिस वेरिफिकेशन के लिए एसपी को भेजी

जहरीली शराब बिक्री में नगर निगम के 2 अस्थाई कर्मचारियों के नाम आने के बाद नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने एसपी कार्यालय को निगम के विभिन्न विभागों में काम कर रहे 450 अस्थाई कर्मचारियों की लिस्ट भेजी है। उनका कहना है कि सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी कर्मचारी शहरी ना होकर आसपास के अंचल से भी आते हैं। ऐसे में पुलिस वेरिफिकेशन लंबा खींच सकता है।

जहरीली शराब मामले में निगम ने शनिवार को अपने ही दो बर्खास्त कर्मचारियों सिकंदर और गब्बर के मकान तोड़े हैं । इसके बाद निगमायुक्त ने एसपी से चर्चा की। ऐसा पहली बार हो रहा है जब नगर निगम अपने यहां के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन करवाने जा रहा है। निगमायुक्त के अनुसार सभी अस्थाई कर्मचारियों की लिस्ट तैयार कर भेजी है। उसके आधार पर यह तय होगा कि निगम में काम कर रहे कर्मचारियों का किस थाने में आपराधिक रिकॉर्ड है। आपराधिक रिकॉर्ड मिलने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पहली बार हो रहा इतने ज्यादा कर्मचारियों का वेरिफिकेशन

नगर निगम में सभी विभागों में करीब 5000 कर्मचारी पदस्थ हैं। इनमें करीब 450 कर्मचारी अस्थाई पद पर कार्यरत हैं। निगम अफसरों का कहना है कि इसके पहले कभी भी इतने ज्यादा लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है। वेरिफिकेशन होने के बाद स्वच्छ छवि के कर्मचारी और आपराधिक छवि के कर्मचारी अलग अलग हो जाएंगे।

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