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गैंगस्टर शहर में फिरता रहा, पुलिस बेफिक्र थी?:विकास दुबे ऑटो से रामघाट और महाकाल क्षेत्र में घूमता रहा, उज्जैन के एएसपी बोले थे- आई होप..विकास कानपुर न पहुंचे

उज्जैन2 वर्ष पहले
उत्तर प्रदेश के कानपुर का गैंगस्टर विकास दुबे 9 जुलाई को उज्जैन में पकड़ा गया था। उस पर 5 लाख का इनाम था। विकास और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी।- (फाइल फोटो)
  • यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे को 9 जुलाई को उज्जैन में पकड़ा गया था, 2 जुलाई को कानपुर में 8 पुलिसवालों की हत्या के बाद फरार था
  • विकास को लेकर यूपी एसटीएफ कानपुर जा रही थी, 10 जुलाई को रास्ते में एक एक्सीडेंट के बाद मुठभेड़ में मारा गया
  • गैंगस्टर को उज्जैन में पनाह देने वालों से पूछताछ करने के लिए यूपी एसटीएफ मध्य प्रदेश आई

उत्तर प्रदेश का 5 लाख का इनामी गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार को कानपुर में एनकाउंटर में मारा गया। उसे गुरुवार सुबह उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल, विकास के मूवमेंट को लेकर उज्जैन पुलिस अब पूरे शहर में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। मंदिर क्षेत्र से मिले फुटेज में यह सामने आया कि विकास ऑटो में बैठकर दर्शन करने के लिए पहुंचा था। पुलिस ने ऑटोवाले को हिरासत में ले लिया है। 

इधर, उज्जैन के एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी का सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो काफी चर्चा में है। यह वीडियो विकास को यूपी पुलिस को सौंपने के लिए गुना बॉर्डर तक भिजवाने के दौरान का है। इसमें वे अपने दफ्तर के अंदर कुछ लोगों से बात करते हुए यह कह रहे हैं- ‘आई होप..शायद विकास यूपी जिंदा न पहुंचे।’ शुक्रवार को इसे लेकर एएसपी द्विवेदी ने सफाई दी कि वीडियो के बारे में मुझे कुछ नहीं मालूम, वह फर्जी है। 

विकास 3 घंटे ऑटो में घूमा, सुबह 7.30 बजे महाकाल मंदिर पहुंच गया था
कंठाल क्षेत्र निवासी ऑटो ड्राइवर से उज्जैन पुलिस और उत्तर प्रदेश की एसटीएफ टीम ने पूछताछ की। ड्राइवर ने बताया कि सुबह करीब 4.30 बजे नानाखेड़ा बस स्टैंड के पास विकास को ऑटो में बैठाया और रामघाट क्षेत्र में गया था। करीब 3 घंटे तक उसने ऑटो में घुमाया और सुबह 7.30 बजे महाकाल मंदिर के बाहर उतार दिया। ऑटो ड्राइवर ने कहा कि विकास अकेला था, लेकिन उसके ऑटो में बैठने के बाद एक लाल रंग की कार लगातार उन्हें फॉलो कर रही थी। रामघाट क्षेत्र में भी वही कार घूमती रही।

मंदिर में फोटो खींचने वाले के फुटेज गायब, कार वाला भी पकड़ से दूर
विकास जब मंदिर में घूम रहा था, तब कोई उसके फोटो खींच रहा था। साथ ही वीडियो भी बनाए जा रहे थे। महाकाल मंदिर के जो सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं, उसमें खास समय के फुटेज गायब हैं। पुलिस को विकास को फॉलो करने वाली कार और उसमें बैठे लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। उत्तरप्रदेश की एसटीएफ की टीम उज्जैन में विकास को पनाह देने वालों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पहुंची है।

विकास को शराब कंपनी के मैनेजर के घर तस्दीक के लिए ले गई थी पुलिस
एसटीएफ टीम में अधिकारी समेत 6 सदस्य शामिल हैं, जिन्हें हरि फाटक स्थित निजी होटल के दो कमरों में ठहराया गया है। एसटीएफ टीम ने ऑटो ड्राइवर और शराब कंपनी के मैनेजर समेत अन्य संदिग्धों से उज्जैन पुलिस के साथ मिलकर पूछताछ की। यह बात भी सामने आई कि गुरुवार को विकास को पुलिस शराब कंपनी के मैनेजर के घर भी तस्दीक के लिए लेकर गई थी। इधर, आईजी राकेश गुप्ता ने कहा कि विकास के उज्जैन में आने को लेकर की स्थिति का पता किया जा रहा है।

विकास का मोबाइल गायब, हर सवाल पर पुलिस का एक ही जवाब- जांच कर रहे 
विकास को लेकर पुलिस सबकुछ छुपा रही है। एसपी मनोज सिंह से किसी भी मामले को लेकर सवाल पूछा जा रहा तो जवाब एक ही मिल रहा है- हम जांच कर रहे हैं। फिर वो विकास के साथ आए लोगों को लेकर हो या खुद विकास के उज्जैन आने को लेकर। यही नहीं, विकास का मोबाइल भी गायब है। सामान के नाम पर भी कुछ नहीं बताया जा रहा है।

गार्ड, फूलवाले सब चुप, मोबाइल भी बंद
गुरुवार को विकास के पकड़ाने के दौरान जो गार्ड और फूलवाला के नाम सामने आए, उन्हें एसपी ने बुलवाया था। इसके बाद से वे चुप हैं और मोबाइल भी बंद हैं। विकास को पकड़कर लेडी सिंघम बनने वाली महाकाल मंदिर की सुरक्षा प्रभारी होमगार्ड प्लाटून कमांडर रूबी यादव को भी समझाइश के साथ चुप करवा दिया गया है। दिनभर उन्हें हटाए जाने की भी चर्चा थी, लेकिन कलेक्टर आशीष सिंह ने इससे इनकार कर दिया।

उज्जैन पुलिस पर विकास को कोर्ट में पेश नहीं करने पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि उज्जैन पुलिस ने विकास को पकड़ा तो गिरफ्तार क्यों नहीं किया? उसे कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया? यूपी पुलिस को सौंपने के पहले ट्रांजिट रिमांड क्यों नहीं लिया?  बिना गिरफ्तारी के किसी भी व्यक्ति को पुलिस 7 घंटे तक अपने पास कैसे रख सकती है? एसपी मनोज सिंह का कहना था कि हमने विकास को अभिरक्षा में यूपी पुलिस को सौंपा था। उन्हें 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना था, लेकिन उसके पहले ही विकास मारा गया। हालांकि, इतना सब हो जाने के बाद भी पुलिस कुछ भी खुलकर कहने से बचती रही।

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