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कोरोना टेस्ट:क्या कहती है 379 दिन की कोरोना यात्रा, आबादी के हिसाब से हर 10वें व्यक्ति का टेस्ट

उज्जैन4 दिन पहले
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25 मार्च 2020 को कोरोना का पहला रोगी जांसापुरा की वृद्धा के रूप में सामने आया था। इस वृद्धा की मौत प्रदेश में कोरोना से होने वाली पहली मौत थी। तभी से जिले में शुरू हुई कोरोना की यात्रा को गुरुवार तक 379 दिन पूरे हुए। कोरोना की यह यात्रा हमें दुख: और मुश्किलों के साथ-साथ धैर्य व साहस से लड़ने की ताकत के अलावा कई तौर-तरीके भी सीखा गई। इधर कोरोना काल की शुरुआत से अब तक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी सामने आ रहा है कि जिले की आबादी (करीब 20 से 21 लाख) के हिसाब से अब तक औसतन प्रत्येक 10वें व्यक्ति का कोरोना टेस्ट हो चुका है। यही नहीं, जितने लोगों का टेस्ट हुआ है उनमें से भी औसतन प्रत्येक 29वां व्यक्ति पॉजिटिव आया है। इन्हीं में से 115 लोगों की मौत भी हुई है।

वहीं अब जिले में कोरोना की दूसरी लहर जोर पकड़ रही है। ऐसे में हमें धैर्य रखते हुए साहस के साथ आगे बढ़ते हुए सही तौर-तरीकों को अपनाकर गाइड लाइन का पालन करते हुए कोरोना को मात देना है। ताकि पहले की तरह अब दुख: व मुश्किलें ज्यादा ना बढ़े। हम शपथ लें कि मास्क जरूर पहनेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

प्रशासन द्वारा भी लगातार विभिन्न माध्यमों से अभियान चलाकर नागरिकों को गाइड लाइन का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लापरवाह लोगों को सबक सिखाने के लिए चालान और खुली जेल भेजने की कार्रवाई भी हो रही है।

जिनका टेस्ट हुआ उनमें औसतन 29वां पॉजिटिव आया, इनमें से 115 की मौत हुई, शपथ लें यह आंकड़े और नहीं बढ़े... हर गाइड लाइन का हम पालन करेंगे और दूसरों से भी करवाएंगे

25 मार्च 20 को जांसापुरा की वृद्धा के रूप में जिले में पहला कोरोना रोगी मिला। इसकी मौत प्रदेश में कोरोना संक्रमित की पहली मौत के रूप में दर्ज हुई।
ताजा स्थिति: अब तक 2 लाख 2 हजार 153 सैंपलों की जांच में से 6801 पॉजिटिव आए। यानी टेस्ट करवाने वालों में से प्रत्येक 29वां व्यक्ति पॉजिटिव आया। पॉजिटिव में से अब तक 115 की मौत हुई।

स्थानीय इलाज से खतरा: तब सर्दी-खांसी व बुखार वाले रोगियों को निजी स्तर पर इलाज करवाने पर प्रतिबंध लगा। इनका इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही किया जाने लगा। ऐसे रोगियों को चिह्नित करने सर्वे करवाए गए।
ताजा स्थिति: पहले दौर में स्थिति नियंत्रण में आते देख नियम शिथिल किया। लोग निजी स्तर पर सर्दी-खांसी व बुखार का इलाज करवा रहे हैं।

इलाज कैसे : होम क्वारेंटाइन वालों को लिए चार से पांच तरह की मेडिसिन, ऑक्सीमीटर तय किए गए। कंट्रोल रूम से इनकी सेहत के बारे में अपडेट लिया जाने लगा। डॉक्टरों की टीम समय-समय पर चैकअप करने भी पहुंचती रही।
ताजा स्थिति: अभी यही स्थिति है। 450 लोग होम आइसोलेशन में हैं। होम आइसोलेशन व हॉस्पिटल में रहकर 5762 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए।

इधर जिनकी मौत हुई वहां : अब तक जिले में कुल 115 कोरोना पॉजिटिव की मौत हुई। इनके परिवार को बड़ी क्षति झेलना पड़ी। यहां तक कि वे अंतिम बार परिजन का चेहरा तक नहीं देख पाए। अधिकतर लोग अंतिम संस्कार कर पाए।
ताजा स्थिति: दूसरी लहर में एहतियातन संदिग्ध रोगियों का भी अंतिम संस्कार प्रशासनिक देखरेख में होने लगा है।

गाइड लाइनें जारी की गई: मास्क और डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य किया गया।
ताजा स्थिति: गाइड लाइन अभी भी है। पालन नहीं करने वालों पर 15 मार्च से जुर्माने व जेल में बंद करने के साथ ही एफआईआर तक दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

दो तरह के टेस्ट: संदिग्धों के सैंपल दो तरह से लिए जाने लगे। मुंह यानी स्वाब के और नाक के। इनकी जांच रिपोर्ट से संक्रमण होने या नहीं होने का पता चलता।
ताजा स्थिति: 2.02 लाख लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे। इनमें से 6801 पॉजिटिव पाए।

यहां से दो रास्ते : हॉस्पिटल में भर्ती रोगी के सामने दो ही विकल्प रहते हैं। स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होना या फिर मौत।
ताजा स्थिति: अभी भी ये ही स्थिति है। कई मरीज घर पर या अस्पताल में इलाज ले रहे हैं, जबकि अब तक 115 की मौत हो चुकी है।

संक्रमण रोकने पाबंदियां लगाई: पहले रविवार का जनता कर्फ्यू बाद में लॉकडाउन भी। इस बीच दाएं-बाएं की तर्ज पर एक दिन छोड़कर दुकानें खोलने पर जोर रहा पर लापरवाही से संक्रमण बढ़ता रहा।
ताजा स्थिति: पाबंदियां अब भी हैं। प्रत्येक रविवार को शहर में टोटल लॉकडाउन रहता है। इसके अलावा रोज रात दस बजे बाद बाजार बंद करना जरूरी है।

पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद: जिनमें कम या लक्षण नहीं होते उन्हें होम क्वारेंटाइन में इलाज दिया जाने लगा और जिनमें ज्यादा लक्षण रहते हैं उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया।
ताजा स्थिति: अभी भी यही व्यवस्था है। कुल 1142 रोगी एक्टिव हैं। इनमें लक्षण वाले 589 और शेष बिना लक्षण वाले रोगी हैं।

दोनों में क्या स्थिति: डिस्चार्ज होकर घर पहुंचने वाले कई लोग स्वस्थ होने के बावजूद हमेशा के लिए कमजोरी का शिकार हो गए। कोरोना ने इनके शरीर का स्टेमिना कम कर दिया। ऐसे में इनमें थकान-सांस फूलने आदि की समस्याएं घर कर गई। ऐसे अधिकतर वे रोगी हैं जो समय रहते हॉस्पिटल नहीं पहुंचे या बीमारी छिपाते रहे।

यही विकल्प : एक वर्ष से अधिक की कोरोना संक्रमण काल की इस यात्रा का निचोड़ यही है कि संक्रमण से बचने का एकमात्र विकल्प मास्क पहनना और दो गज की दूरी का पालन करना है। इसके अलावा समय रहते अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवाना भी बचाव का एक ठोस उपाय है। वैक्सीन लगवाने से डरें नहीं।

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