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आज बौद्ध महासम्मेलन:स्तूप पर गड्ढा किया तो गर्म भाप निकली खुदाई करने वाला बेहोश हो गया था

उज्जैनएक महीने पहले
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  • वैश्य टेकरी का उत्खनन 1938-39 में हुआ था, पुराविद् गर्दे की रिपोर्ट भास्कर ने खोजी

उज्जैन-तराना रोड पर कानीपुरा में स्थित वैश्य टेकरी बौद्ध महास्तूप का उत्खनन 1938-39 में तत्कालीन ग्वालियर स्टेट के पुरातत्व विभाग के अधीक्षक मो.ब. गर्दे ने किया था। उनकी रिपोर्ट का प्रकाशन ऑर्कोलॉजिकल डिपार्टमेंट ग्वालियर स्टेट की एन्युअल एडमिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट- 1938-39 में किया गया था।

इस उत्खनन में भाग लेने वाले इंदौर के स.का. दीक्षित ने 1968 में प्रकाशित अपनी पुस्तक उज्जयिनी : इतिहास तथा पुरातत्व, में इस उत्खनन का आंखों देखा हाल लिखा है। रविवार को होने वाले बौद्ध महासम्मेलन के मौके पर भास्कर ने उत्खनन की आधिकारिक रिपोर्ट खोज निकाली और साथ ही वह आलेख भी जिसमें उत्खनन का आंखों देखा हाल लिखा गया है।

वैश्य टेकरी संरक्षित क्षेत्र है। इसे वैश्य टेकरी नाम दिए जाने को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं, किंतु विद्वान मानते हैं कि सम्राट अशोक की रानी वैश्य पुत्री ने संभवत: इसका विस्तार कराया, इसलिए इसे यह नाम मिल गया। बौद्ध स्तूप होने का सबसे पहले प्रमाण ग्वालियर स्टेट के पुरातत्व विभाग के अधीक्षण मो.ब. गर्दे के उत्खनन में मिले। जिसमें यह भी कहा गया था कि यह स्तूप अन्य स्तूपों से अलग और संभवत: सबसे बड़ा है।

इस तरह के दो अन्य स्तूप भी खोजे गए। इसके बाद बौद्ध अनुयायियों के लिए यह टीले आस्था का केंद्र बनने लगे। बौद्ध महासभा ने हर साल फरवरी के पहले रविवार को यहां बौद्ध महोत्सव शुरू किया। इसके साथ ही स्तूप को प्रकट करने की मांग भी उठने लगी। बौद्ध स्तूप के उत्खनन की रिपोर्ट सिंधिया ओरिएंटल इंस्टीट्यूट में संग्रहित है।

उत्खनन में पता चला बड़ी ईंटों से बना स्तूप

  • अब तक मिले स्तूपों में सबसे बड़ा है।
  • भीतरी भाग में ठोस मुरम भरी गई है, बाहर मिट्टी से ईंटों की जुड़ाई है।
  • ईंटों से अनुमान है कि यह ईसा से 300 साल पहले मौर्यकालीन है।
  • भीतरी भाग में मुरम के आसपास खाई है, पूजा के लिए एक मार्ग भी है।
  • यह विचित्र प्रकार की निर्माण कला (कटोरे जैसा) से बना है।
  • यहां से चीनी मिट्टी के बर्तन, हरे रंगे शंख मिले।
  • चांदी का सिक्का भी मिला जिस पर हाथी और बोधिवृक्ष बने हैं।

अंदर दूर तक खोखली गहराई
स्तूप का व्यास 110 मीटर से अधिक तथा ऊंचाई 32 मीटर से ज्यादा है। उत्खनन के लिए चोटी पर खुदाई की गई। 4 मीटर गहराई तक खुदाई के बाद अचानक डेढ़-दो फीट व्यास का गड्ढा बन गया। इससे स्तूप के अंदर से गर्म भाप निकलने लगी। इससे खुदाई करने वाला बेहोश हो गया। 10-15 मिनट तक भाप निकलती रही। इसके बाद लेखक ने उसके अंदर देखा वह केवल बहुत दूर तक खाली, खोखली अंधेरी गहराई थी। दीवार के बारे में एक सुराख से पता चला वह अंदर से गुंबद जैसी गोलाकार ही थी। वहां अधिक खुदाई चलाने से कर्मचारियों की जान खतरे से बाहर नहीं थी। इसलिए लेखक ने स्थानीय मुख्याधिकृत के नाते खुदाई बंद करा दी। (- जैसा स.का. दीक्षित ने अपनी पुस्तक में लिखा।)

आज कार्यक्रम
कानीपुरा स्थित वैश्य टेकरी पर भारतीय बौद्ध महासभा एवं अजाक्स द्वारा महास्तूप महोत्सव होगा। सुबह 9.30 से महोत्सव होगा। अतिथि मंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, आईएएस जेएन कंसोटिया होंगे। भदंत शाक्य पुत्र, भदंत संघप्रिय राहुल, संत उमेशनाथ मौजूद रहेंगे। मुख्य वक्ता डॉ. आरके अहिरवार होंगे।

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