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छलकी खुशी:12 युवाओं ने 10 दिन में जुटाए जरूरतमंदों को देने के लिए कपड़े और अन्य सामान, 450 से ज्यादा झोपड़ियों में मुरझाए चेहरे पर दी मुस्कान

शाजापुरएक महीने पहले
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लॉकडाउन के कारण आई आर्थिक तंगी के बीच जरूरतमंदों के चेहरे पर त्याेहार की मुस्कराहट देने के लिए शहर के युवाओं ने नई पहल शुरू की। पहले खुद ने अपने स्तर से जरूरतमंदों के लिए कपड़े से लेकर अन्य सामान जुटाया। बाद में सोशल मीडिया, रिश्तेदार व परिचितों के माध्यम से 100 परिवारों से 400 जोड़ी कपड़े, 50 जोड़ जूते-चप्पलें व अन्य सामान जुटाया। उन्हें ठीक करवाकर त्याेहार के एक दिन पहले रविवार की शाम घर जाकर सामान वितरित कर दिया।

युवाओं की इस पहल ने झोपड़ियों में बूझे मन से त्योहार बनाने वाले 450 से ज्यादा परिवारों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। सही मायने में यही दशहरे की जीत है। कॉलेज में अध्ययनरत 12 किशोर एक ही निजी स्कूल की क्लास में दोस्त थे। जो लॉकडाउन में फिर से मिले। सभी की इच्छा थी कुछ ऐसा करें, जिससे लोग याद करें और हमेशा के लिए यादगार बन जाए। कार्य भी पूरा नि:शुल्क हो।

इसमें देने वाला तथा लेने वाला दोनों ही खुश रहे। आखिरकार 14 अक्टूबर को योजना तैयार की, हम 10 दिनों तक शहर के लोगों से उनके यूज किए हुए सामान लेंगे और ऐसे लोगों तक पहुंचाएंगे, जिन्हें वाकई जरूरत है। बांटने के लिए भी दिन दशहरे के 1 दिन पहले तय हुआ। मतलब रविवार को चुना। इससे उन गरीबों का दशहरा अच्छी तरह से बन जाए। पहले 12 लड़कों ने अपने ही घर से सामान लेने की सोची।

100 लोगों ने की इनकी मदद

ग्रुप में से किसी ने आइडिया दिया कि मैं अपने रिश्तेदारों से भी सामान लेकर आऊंगा। इसके बाद यह युवाओं ने शहर के लोगों से सामान लेने में तब्दील हो गई। इसके लिए 10 दिनों तक सोशल मीडिया का सहारा भी लिया गया।

इसमें फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम के अलावा दूसरे भी सोशल प्लेटफॉर्म पर वेस्ट मटेरियल लेने की योजना भेजी गई। इसमें शहर के लगभग 100 लोगों ने इन 12 लड़कों की मदद की और लगभग 400 कपड़े तथा 50 जूते-चप्पल इनके अलावा अन्य सामान भी इन्हें मिले। जिन्होंने सभी मटेरियल रविवार को शहर की गरीब बस्तियों में बांट दिया। इससे लड़के खुश हैं।

ये हैं 12 दोस्त- अंशु जैन, सजन वाजपेयी, वसीम मंसूरी, कृतार्थ मेहता, केशव त्रिवेदी, कुश सोनी, किशन भावसार, सजल शर्मा, शांतनु सेंगर, अंशुल चौहान, हर्षवर्धन मंडलोई, मनीष पाटीदार जिन्होंने शहर के 100 परिवारों से 400 वेस्ट कपड़े लिए जिसमें साड़ी, सलवार कुर्ती, छोटे बच्चों के कपड़े, पेंट, शर्ट, टी शर्ट और जींस, लोअर शामिल हैं। इनमें कुछ नया सामान भी शामिल था। इसके अलावा चप्पल, जूते तथा अन्य यूजलेस सामान गरीब बस्तियों रेलवे पटरी के पास, बेरछा रोड, दुपाड़ा रोड, महूपुरा और राजनगर में बांटे।

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