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ऑलआउट होती सुविधाएं:14 दिन में 4500 मरीज पहुंचे, 1429 भर्ती, अब कुर्सी पर बैठे और चलते हुए इलाज... द्वार पर इंतजार

शाजापुर13 दिन पहले
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ये कैसी बेबसी... जिला अस्पताल में मरीजों की कतार लगी है। अस्पताल में पलंग तक नहीं मिल रहे। पलंग की जगह स्टूल पर बैठकर मां को बच्चे काे गोदी में लेकर इलाज करवाना पड़ रहा है। - Dainik Bhaskar
ये कैसी बेबसी... जिला अस्पताल में मरीजों की कतार लगी है। अस्पताल में पलंग तक नहीं मिल रहे। पलंग की जगह स्टूल पर बैठकर मां को बच्चे काे गोदी में लेकर इलाज करवाना पड़ रहा है।
  • बेड न्यूज... क्योंकि बेड नहीं है; तीसरी लहर की तैयारी की पोल खोल रहा वायरल अटैक

कोविड-19 की तीसरी लहर की तैयारियों के बीच जिले के सरकारी अस्पताल वायरल फीवर के आगे ही ऑलआउट होते दिखाई दे रहा है। दरअसल सर्व सुविधायुक्त भवन होने के बाद भी जिम्मेदार अफसर व्यवस्थाओं का मैनेजमेंट नहीं कर पा रहे हैं। बीते दिनों से बड़ी मरीजों की संख्या को देखने के बाद भी बंद पड़े वार्ड शुरू नहीं किए तो पुराने भवन के वार्ड में लगे पलंग धूल खा रहे हैं। सिविल सर्जन को यह तक नहीं पता कि अस्पताल में कितने बेड हैं। भास्कर के सवाल पर सिविल सर्जन बीएस मैना ने बताया कि कुछ बंद पड़े वार्डों को खाेला जाएगा।

बंद पड़े वार्ड खुलवाए गए, अतिरिक्त पलंग की व्यवस्था की
सिविल सर्जन डॉ. बीएस मैना ने भास्कर के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि पिछले दिनों अस्पताल की क्षमता से अधिक मरीज आए थे। उन्हें भगा तो सकते नहीं। पलंगों की कमी के चलते कुछ मरीजों को परेशान होना पड़ा था। इसे देखते बंद पड़े वार्ड खुलवा दिए और अतिरिक्त पलंग की व्यवस्था कर रहे हैं।

संभावित तीसरी लहर के चक्कर में वार्डों का उपयोग नहीं कर रहा प्रबंधन
ऑलआउट होती सुविधाओं का सबसे बड़ा उदाहरण भी सरकारी अस्पताल में देखने को मिला। ट्रामा सेंटर के नए भवन के ए और बी ब्लाॅक के वार्डों में रखे बिस्तर फुल हो गए। सी ब्लाॅक का आधा हिस्सा अभी भी उपयोग में नहीं आ रहा। वहीं पुराने भवन के वार्ड संभावित तीसरी लहर के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। लेकिन यहां कुछ वार्ड ऐसे हैं, जिनका उपयोग वायरल फीवर के मरीजों के लिए उपयोग किया जा सकता था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया।

मरीजों को मिस मैनेजमेंट से जूझना पड़ रहा, फिलहाल 444 बच्चे भर्ती
पुराने भवन के जर्जर होने का रोना रोने वाले सरकारी अस्पताल प्रबंधन के लिए तात्कालीन कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों ने करोड़ाें रुपए की लागत का ट्रामा सेंटर बनवा दिया। लेकिन इसके बाद भी यहां भर्ती मरीजों को प्रबंधन के मिस मैनेजमेंट से जूझना पड़ रहा है। इधर, वायरल फीवर के चलते मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। पिछले 14 दिनों में अस्पताल की ओपीडी का आंकड़ा 4500 मरीजों तक पहुंच गया। इसमें से 1429 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। इसमें 326 पुरुष तो 659 महिलाएं थी। वहीं 444 मरीज बच्चों के रूप में भर्ती हुए।

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