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यूरिया:700 मीट्रिक टन यूरिया आई, अब तक 11600 पहुंची फिर भी किल्लत खत्म नहीं, क्योंकि अब तक लक्ष्य से आधी भी नहीं मिली लोगों को

शाजापुरएक महीने पहले
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बड़ागांव में खाद खत्म होने के बाद निराश किसान लौटते हुए। - Dainik Bhaskar
बड़ागांव में खाद खत्म होने के बाद निराश किसान लौटते हुए।

जिले के किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयोगी यूरिया खाद की 700 मीट्रिक टन की एक और रैक सोमवार शाम शाजापुर आई। सोसायटी और इफको के वितरण केंद्र के माध्यम से जिले के किसानों में मंगलवार को इसका वितरण किया गया। रबी फसल के इस सीजन में अब तक 11 हजार 600 मीट्रिक टन यूरिया आ चुकी है, लेकिन फिर भी किल्लत बरकरार है, क्योंकि जिले में खाद वितरण के टारगेट के अनुसार अब तक आधी खाद भी नहीं आई है।

जिले में रबी का रकबा 2 लाख 55 हजार हेक्टेयटर क्षेत्र है। इसमें से 1 लाख 85 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल बोई गई है। किसानों को गेहूं की फसल में सबसे ज्यादा यूरिया की आवश्यकता है और प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में 2 से 3 क्विंटल यूरिया की लगना है। रबी के एक सीजन में खेतों में 2 से 3 बार खाद देने की जरूरत है। इसीलिए रबी सीजन शुरू होने पर बुवाई से लेकर अंतिम सप्ताह तक खाद की जरूरत होगी। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधक के.के. रैकवार के मुताबिक रबी सीजन में अब तक कुल 11 हजार 600 मीट्रिक टन यूरिया आई है और अब 11 हजार 400 मीट्रिक टन यूरिया मार्च तक समय समय पर प्राप्त होगी।

सहकारी समितियों के अलावा 30 प्रतिशत खाद निजी वितरण केंद्रों को प्रदाय की गई है। सोमवार को आई 700 मीट्रिक टन यूरिया से लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को खाद दी जा सकती है। भारतीय किसान संघ के मुकेश पाटीदार का कहना है कि दिसंबर के बाद यूरिया की जरूरत नहीं पड़ेगी तो टारगेट के मुताबिक दिसंबर तक यूरिया पहुंच जाना चाहिए, लेकिन अब तक किसानों के सामने खाद की किल्लत बनी हुई है।

पिछले साल 19 हजार आई थी, इस बार 2300 मीट्रिक टन का है लक्ष्य

किल्लत के ये दो कारण

जिले के किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से प्रति बीघा की दर पर 2 क्विंटल तक खाद वितरण किया जा रहा है। जबकि किसानों को गेहूं के अलावा अन्य फसलों के लिए भी खाद की जरूरत है। जिले में आलू का रकबा भी बढ़ा है और आलू की फसलों में ज्यादा खाद की आवश्यकता है। सहकारी समिति से सीमित मात्रा में खाद मिलती

ज्यादा भाव में खाद दे ताे शिकायत करें सोमवार को 700 मीट्रिक टन यूरिया प्राप्त हुई है। इसमें 30 प्रतिशत निजी वितरकों को दिया है।किसानों में इसका वितरण नियमानुसार किया जा रहा है। यदि किसानों को निजी केंद्रों पर ज्यादा भाव में खाद विक्रय की जाए तो कृषि विभाग में शिकायत करें। एस. रघुवंशी, डीएमओ

क्रेडिट स्कोर बिगड़ने पर नहीं मिलती खाद

सहकारी समितियों द्वारा किसानों को क्रेडिट पर यूरिया उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन पुरानी उधारी नहीं चुका ने पर क्रेडिट स्कोर खराब होने से बड़ी संख्या में किसानों को सहकारी समितियों से खाद नहीं मिलती। खाद की कमी के चलते प्रबंधन द्वारा क्रेडिट स्कोर खराब करने वालों को नकद भुगतान करने पर भी खाद नहीं दी जा रही है। ये ही किसान निजी वितरण केंद्रों पर जाते हैं और दोगुना भाव पर खाद प्राप्त करते हैं। प्रबंधन का कहना है कि सीमित मात्रा में खाद उपलब्ध हो रही है, इसलिए क्रेडिट स्कोर खराब करने वालों को खाद नहीं दी जा सकती है।

500 बोरी यूरिया खाद की किसानों को कम पड़ी

बड़ागांव । प्राथमिक कृषि साख संस्था में सोमवार को 500 बोरी खाद की खेप आई थी, जो मंगलवार को संस्था द्वारा किसानों को वितरित कर दी गई, लेकिन कई किसान खाली हाथ लौट गए। संस्था द्वारा मंगलवार को किसानों को यूरिया खाद का वितरण किया गया, लेकिन 2 घंटे में ही 500 बोरी का स्टॉक खत्म हो गया। इससे कई किसानों को निराशा हाथ लगी। सरकार की घोषणा के अनुसार कई किसान नकद रुपए देकर खाद लेने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी खाद नहीं मिली। मामले में पर्यवेक्षक धर्मचंद जैन का कहना है कि हमारे पास अभी नकद रुपए से किसानों काे खाद देने के आदेश नहीं है।

संस्था के प्रबंधक कमलकिशोर शर्मा ने बताया कि किसानों को यूरिया खाद की पूर्ति हो गई है, लेकिन हमने और भी 1000 यूरिया खाद की बोरी मंगवाने के लिए पत्र लिखा है। जैसे ही वह आ जाएगा किसानों को वितरण कर दिया जाएगा।

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