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55 साल बाद सुधार की ओर सेहत:72 आईसीयू बेड, खुद के ऑक्सीजन प्लांट होंगे, सीटी स्कैन भी यहीं कराएं

शाजापुर22 दिन पहले
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन के चैंबर में हो रहा निर्माण। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन के चैंबर में हो रहा निर्माण।
  • अब जागे सरकार : पुराने अस्पताल से शिफ्ट हुई स्वास्थ्य सुविधाओं के 55 साल बाद बदली जिला अस्पताल की तस्वीर

आपदा में अवसर, यह वाक्य शाजापुर की स्वास्थ्य सेवाओं को चरितार्थ करता दिखाई दे रहा है। क्योंकि 55 सालों में जो सुविधाएं शहर के सरकारी अस्पताल को नहीं मिली, वह बीते पांच सालों में मिली। खासकर कोविड-19 संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के दौरान।

जहां पहले कवेलू खप्पर वाला सरकारी अस्पताल सोमवारिया बाजार में हुआ करता था, उसके वर्तमान बस स्टैंड क्षेत्र में स्थानांतरित होने के बाद अब जाकर सुविधाएं बढ़ी है। यहां अब बड़े अस्पतालों की तरह ही खुद के ऑक्सीजन प्लांट होंगे तो यहां आने वाले मरीजों का सीटी स्कैन भी हाेगा।

बड़ी सुविधाएं तो आईसीयू वार्डों के रूप में मिली है। तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों सहित गर्भवती महिलाओं और कोविड मरीजाें के लिए अलग अलग आईसीयू वार्ड होंगे। ज्ञात रहे जिला मुख्यालय होने के बाद भी जिले के सरकारी अस्पताल का दर्जा 2011 तक रैफर सेंटर का बना हुआ था।

डाॅक्टरों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे प्रबंधन के सामने हर दिन कोई न कोई बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती। जबकि जिला बनने के बाद सोमवारिया बाजार क्षेत्र के वजीरपुरा मोहल्ले में सरकारी अस्पताल संचालित हो रहा था। उस समय यहां चंद डाॅक्टर और नर्सिंग स्टाफ ही था। इसके बाद लगभग वर्तमान बस स्टैंड क्षेत्र में अस्पताल का नया भवन बनने के बाद 1965 के साल में
स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा हुआ तो घरों में होने वाले प्रसव अस्पताल में होने लगे थे।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निदारिया ने बताया कि पुराना अस्पताल में 200 बेड स्वीकृत थे। लेकिन यहां लंबे समय से 100 बेड ही सक्रिय रहते थे। कोविड के आने के पहले बनकर तैयार हुआ ट्रामा सेंटर भी शुरू नहीं हो पाया था।

इसके बाद 2019 के अंत में संसाधन जुटाने शुरू किए गए। 2020 में संक्रमण आने के बाद भी जिला अस्पताल में महज 18 बेड का आईसीयू वार्ड था। जो दूसरी लहर के नियंत्रित होते होते 72 बेड की सुविधाएं मिल गई। अधिकारियों के अनुसार आगामी दो माह के अंदर ही 150 बेड पर ऑक्सीजन सुविधा जोड़ दी जाएगी।
कायाकल्प अभियान में भी रहे दूसरे व तीसरे नंबर पर

जिला अस्पतालों के जीर्णोद्धार और सुविधाओं को जुटाने के लिए कायाकल्प अभियान की शुरुआत की थी। 2015-16 से प्रबंधन लगातार प्रयास करते रहा। पर स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव में हर बार दूसरे-तीसरे नंबर से ऊपर के अंक मिले नहीं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के तात्कालीन अधिकारियों ने कभी संसाधन जुटाने पर ध्यान नहीं दिया।

इसे लेकर भास्कर ने लगातार मुद्दा बनाया। जर्जर भवन के स्थान पर ट्रामा सेंटर बनवाने से लेकर उसके शुरू करने तक लगातार खबरें प्रकाशित की। स्टाफ की कमी और संसाधनों के लिए जिला प्रशासन की भूमिका भी उजागर की। संक्रमण काल शुरू होने से पहले भी भास्कर ने पहली लहर में जूझ रहे अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए।

दूसरी लहर में स्वास्थ्य अधिकारी से लेकर प्रदेश के मंत्रियों तक सवाल खड़े किए, अब कहीं जाकर तीसरी लहर के लिए जिला अस्पताल सहित ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने के लिए योजना बनाई गई और अब उन पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।

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