शाजापुर के प्याज की डिमांड विदेशों में:प्रोसेसिंग यूनिट डलने के बाद अब जिले में बन सकेगा पेस्ट और पाउडर

शाजापुर23 दिन पहलेलेखक: नितिन राजावत
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युवा किसान पाटीदार द्वारा इस तरह प्याज को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए स्टोरेज। - Dainik Bhaskar
युवा किसान पाटीदार द्वारा इस तरह प्याज को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए स्टोरेज।

हर साल 10 से 12 हजार हेक्टेयर खेतों में प्याज का उत्पादन करने वाले किसान क्षेत्र को समृद्ध बना रहे हैं। अब यही प्याज युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी खोल रहा है। महाराष्ट्र के बाद देशभर में मशहूर शाजापुर जिले का प्याज विदेशी मार्केट तक पहुंचने के बाद अब जिले में ही पेस्ट और पाउडर का रूप ले सकेगा।

इसके लिए जरूरत है तो सिर्फ को-ऑपरेटिव सोसायटियों के माध्यम से बनी प्रोसेसिंग यूनिटों की। इसकी संभावना इसलिए बढ़ गई हैं, क्योंकि सरकारी मंशानुसार प्याज फसल को जिले में एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया है।

जिले के युवा किसान जितेंद्र पाटीदार के अनुसार स्थानीय किसानों और व्यापारियों द्वारा अपने स्तर भी प्याज की फसल के लिए आधार तैयार कर अब तक नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि देशों की बार्डर तक बेचा जा रहा था, पर अब योजना में शाजापुर का प्याज शामिल होने से इस फसल को उद्योग का रूप दिया जा सकता है।

लेकिन अभी जिले में प्याज को लेकर कोई प्लेटफार्म तैयार नहीं किया गया। इसके चलते कई बार किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि किसानों के खेतों से ही प्याज के एक्सपोर्ट की योजना बनाई जाए तो निश्चित रूप से किसानों को दोहरा मुनाफा होगा।

एक हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार भी मिलेगा
योजना में प्याज के शामिल होने से इस फसल का अब औद्योगिक रूप भी दिखाई देने लगा है। शाजापुर के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और कास्तकार शिवनारायण पाटीदार बताते हैं कि सरकार को ही प्याज के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। ताकि इसका फायदा छोटे से छोटे किसान को भी मिल सके। शाजापुर जिले में प्याज के उत्पादन की बड़ी संभावनाएं बनी हुई है। इसे यूनिट के रूप में भी खड़ा किया जा सकता है।

इससे छोटी छोटी यूनिटों के जरिए ही एक हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। सेना के जवानों के लिए खास- कृषि वैज्ञानिक एसएस धाकड़ के अनुसार प्याज को प्रोसेसिंग कर अलग रूप में भी बदला जा सकता है।

इसमें मुख्य रूप से प्याज का पाउडर और पेस्ट तैयार करने की यूनिट जिले में स्थापित की जा सकती है। इस तरह के उत्पाद खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात फौजियों के लिए खास होता है। क्योंकि वे महज 100 ग्राम के पेस्ट या पाउडर के रूप में कई किलो प्याज अपने साथ रख सकते हैं।

12 हजार हेक्टेयर में 3 लाख एमटी पैदावार
मालवा के क्लाइमेट प्याज की फसल के लिए बेहतर होने के कारण शाजापुर के प्याज ने महाराष्ट्र के नासिक प्याज को पीछे छोड़ दिया। बीते 25-30 साल पहले तक जहां ढाई से तीन हजार हेक्टेयर में ही प्याज की फसल बोई जाती थी। अब उत्पादन 12 हजार हेक्टेयर में किया जा रहा है। इसके चलते 3 लाख एमटी प्याज की पैदावार हो रही है।

यह करने से बढ़ेगी समृद्धि- युवा कास्तकार जितेंद्र पाटीदार ने प्याज की उत्पादन को बढ़ाने के साथ क्षेत्र को समृद्ध करने के लिए बताया कि प्याज के लिए छोटे छोटे किसानों की को-ऑपरेटिव सोसायटियां बनानी चाहिए, ताकि छोटे छोटे हिस्सों में किसानों का समूह अपना खुद का उत्पाद तैयार कर सके। जैसा दिल्ली में मदर डेरी सोसायटी द्वारा किया जाता है। यह सोसायटी हमारे ही क्षेत्र से प्याज खरीदकर अपने ब्रांड के उत्पाद तैयार कर विदेशों में सप्लाय करते हैं।

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