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लॉकडाउन रिटर्न:जिला अस्पताल के सारे बेड फुल, इंदौर, देवास और उज्जैन रैफर हो रहे मरीज

शाजापुर13 दिन पहले
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  • सन्नाटे में शहर, इलाज के लिए अस्पतालों में शोर

संक्रमण की मार के बाद स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था अब शहर के लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनती जा रही है। जिला अस्पताल के सारे बेड फुल हो जाने के बाद लोगों को सरकारी इलाज भी नहीं मिल रहा है। वहीं शाजापुर जिला प्रशासन संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद भी रैफर सेंटर तय नहीं कर पाया। ऐसे में संक्रमितों के परिवार अपने परिजनों की जान बचाने के लिए निजी अस्पतालों सहित इंदौर, देवास और उज्जैन में इलाज कराने जा रहे हैं।

इधर गुरुवार देर रात सीएम ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों की वीसी के माध्यम से बैठक ली, जिसके चलते बुधवार रात 8 बजे से शुरू हुआ लॉकडाउन अब सोमवार सुबह 6 बजे तक लागू रहेगा। बुधवार रात 8 बजे से शुरू हुए लॉकडाउन में जितनी सख्ती रात को दिखाई दी, उतनी ही लापरवाही अगले दिन सुबह लोगों में दिखाई दी। शहर की सभी दुकानों पर तो ताले लटके दिखाई दिए लेकिन घरों में नहीं रहने की आदत लोगों को एक बार फिर से सड़क पर ले आई।

नतीजतन 38 डिग्री की गर्मी में तैनात पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में नियमों का पाठ पढ़ाना पड़ा। दरअसल शाम होने तक लॉकडाउन का नजारा ही बदल गया, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर आने वालों के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं थे। ऐसे में शहर में दूध लेकर आने वाले ग्रामीण शहर की सड़कों पर घूमते रहे तो कुछ डेयरी दुकानें भी खुल गई। ऐसे में एसडीओपी दीपा डोडवे ने दुकानें बंद कराने के निर्देश के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को लौटा दिया।

अस्पताल के एक पलंग के लिए मशक्कत

शहर के सरकारी अस्पताल के कोरोना वार्ड के लगभग सारे पलंग फुल होने के बाद अब सामान्य मरीजों को आईसीयू में भर्ती नहीं किया जा रहा है। इसके चलते गुरुवार को शहर के व्यापारी आशीष राठौर को अपने दादाजी की तबीयत खराब होने पर सरकारी अस्पताल के एक पलंग के लिए कई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर उन्हें एक पलंग मिल पाया। बताया कोरोना वार्ड के बेड फुल हो गए हैं, इस कारण सामान्य मरीजों के परिजन को पलंग के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

घर लौट रहे लोगों में दिखाई दिया पलायन का दर्द

गुरुवार को जहां शहर में सन्नाटा था, वहीं दूसरी ओर हाईवे बायपास पर स्थित होटलों में मजमा दिखाई दिया। यहां गुजरात और महाराष्ट्र से अपने घर लौट रहे लोगों में पलायन का दर्द साफ दिखाई

दे रहा था। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रामवीर सिंह ने बताया वो और उनके साथी अनलॉक होने के बाद महाराष्ट्र में काम करने चले गए थे लेकिन चंद महीनों मंे एक बार फिर से कामकाज बंद हो गया। लॉकडाउन होने के डर से समय से पहले अपने घर पहुंचने के लिए पलायन कर रहे हैं।

पुलिसकर्मियों की मानवता, लोगों की सहायता की

बाहर से आने वाले यात्री जिला मुख्यालय तक तो पहुंच गए, बेरछा, दुपाडा सहित ग्रामीण क्षेत्रों के लोग परेशान हुए। बस स्टैंड पर पहुंची बसों से उतरे यात्रियों की मदद यातायात पुलिस के प्रधान आरक्षक सुभाष पटेल ने कर उन्हें रास्ते की जानकारी दी। वहीं दुपाडा क्षेत्र के रहने वाले हरिओम और उनके परिवार के 6 सदस्य ग्रामीण रूट पर यात्री वाहनों का इंतजार करते रहे। काॅलेज के सामने पुराने एबी रोड पर तैनात पुलिसकर्मी चंद्रपाल जाट, महिला आरक्षक ने 10 से ज्यादा परिवारों को छोटे वाहनों से रवाना किया।

शहर में शराब दुकान बंद हाईवे पर मिलती रही

लॉकडाउन के दौरान जहां शहर में दोनों शराब की दुकानें बंद थी, वहीं हाईवे की कई होटलों की आड़ में शराब जमकर बेची गई। यह खबर लगते ही शहर के लोग इन होटलों पर पहुंचे गए। यहां महाराष्ट्र और गुजरात से आए लोगों की पहले से भीड़ लगी थी। ऐसे में शहर के लॉकडाउन के बाद भी संक्रमण का अंदेशा बना रहा। बड़ी बात तो यह रही कि इसकी सूचना पुलिस को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां भी कोरोना नियमों व सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती रही।

रोको टोको अभियान के तहत नगरवासियों को रोककर मास्क लगाने की हिदायत दी

नगर में दूसरी लहर के संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन में घर से निकलने वाले नगर वासियों को एबी रोड स्थित बस स्टैंड के मुख्य चौराहे पर पुलिस जवानों ने रोककर मास्क लगाने की हिदायत दी, साथ ही कुछ लोगों को फटकार भी लगाई । लॉकडाउन के कारण वैसे तो नगर में कहीं ना कहीं कोई शहरवासी अपनी समस्या बताकर घूमने की कोशिश करता हुआ दिखाई दिया। इसमें इक्का-दुक्का वाहन वाले भी हर 10 मिनट में निकल रहे थे, जिसमें एक गाड़ी पर 3 लोग दिखाई दिए। जवानों ने पूछताछ करने के बाद कार्रवाई तो नहीं की परंतु हिदायत जरूर दी।

दुकानदारों ने स्वेच्छा से बंद की दुकानें केवल आवश्यक दुकानें ही रहेगी खुली

शाजापुर | दुपाड़ा नगर के समस्त दुकानदारों ने बैठक कर निर्णय लिया कि संक्रमण के कारण गुरुवार और शुक्रवार के दिन दुकानें नहीं खोली जाएगी। सभी स्वेच्छा से बंद रखेंगे। इसमें केवल मेडिकल स्टोर ही खुले रहेंगे, जो आवश्यक है। दैनिक जरूरत से जुड़ी दूध, सब्जी की दुकानें भी सुबह और शाम 2 घंटे के लिए खुलेगी। गुरुवार को सुबह से ही पूरा नगर बंद रहा। जो स्वैच्छिक लॉकडाउन था और महामारी से लड़ने का एक अच्छा उदाहरण भी था। शुक्रवार के दिन भी इसी प्रकार नगर की दुकान नहीं खुलेंगी।

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