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मंडे पॉजिटिव:शहर के शिक्षक तोमर ने 21 साल में 500 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी तैयार किए

शाजापुर7 दिन पहले
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तीरंदाजी का प्रशिक्षण देते हुए खेल शिक्षक लोेकेंद्रसिंह तोमर। - Dainik Bhaskar
तीरंदाजी का प्रशिक्षण देते हुए खेल शिक्षक लोेकेंद्रसिंह तोमर।
  • रामायण देख तीर-कमान चलाना चाहते थे, स्पोर्ट्स टीचर बने तो तय किया तीरंदाजी खेल के लिए सुविधाएं देंगे

80 के दशक में दूरदर्शन पर रामायण सीरियल देखकर तीरंदाजी कोच लाेकेंद्रसिंह तोमर को तीर-कमान चलाने का शौक जागा था। सीरियल देखने के बाद बच्चों के साथ पतंग की लकड़ी पर तार बांधकर दूसरी लकड़ी को तीर बना लेते और राम-लक्ष्मण बन तीर-कमान चलाया करते थे। जब वेेे बड़े हुए तो यह खेल छोड़ना पड़ा, क्योंकि संसाधन नहीं थे और स्कूलों में भी तीरंदाजी नहीं सिखाई जाती।

स्कूल पहुंचे तो तीर-कमान का खेल छूट गया और वे वॉलीबॉल के नेशनल खिलाड़ी बन गए। 1995 में सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी की शुरुआत हुई और डीपीएड कर राजगढ़ के स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर की नौकरी मिली। बच्चों को एथलेटिक्स का प्रशिक्षण देते वक्त खिलाड़ियों से चर्चा की, बच्चे तीरंदाजी खेल के बारे में जानना चाहते थे। छात्र राहुल ने पूछा कि तीरंदाजी देश का प्राचीन खेल है तो फिर यहां क्यों नहीं सिखाया जाता।

तीरंदाजी ओलिंपिक का खेल है। मतलब विश्वस्तर पर खेल के रूप में मान्य है। फिर स्कूल में इसका प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया जाता है। इस सवाल का जवाब उस वक्त खेल शिक्षक लोकेंद्रसिंह भी नहीं दे पाए, लेकिन बच्चों से वादा किया कि इस प्राचीन भारतीय खेल को हम अपने स्कूल में शुरू करेंगे। यह बात है साल 2000 की, तब से लेकर अब तक कालापीपल के खेल शिक्षक तोमर 500 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी जिले और प्रदेश को दे चुके हैं। इनमेें से 50 से ज्यादा नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ी हैं।

अमरावती में लिया प्रशिक्षण
तोमर ने बताया साल 2000 तक कालापीपल में तीरंदाजी का खेल नहीं था। इसी सीखने के लिए तोमर ने प्रमोद चांदोरकर (अभा तीरंदाजी संघ के वर्तमान सेक्रेटरी) से संपर्क किया। अमरावती में 8 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर खुद ने तीरंदाजी खेल की बारीकियां सीखी। फिर राजगढ़ के नृसिंहगढ़ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तीरंदाजी का प्रशिक्षण शुरू किया।

झाबुआ के सामने नहीं टिक पाए थे, अब देते हैं टक्कर- तीरंदाजी में झाबुआ, अलीराजपुर के सामने यहां के खिलाड़ी टिक नहीं पाते थे। अब 21 साल की लंबी तपस्या के बाद नेशनल चैंपियनशिप में अब कालापीपल के तीरंदाजी खिलाड़ी टक्कर देते हैं।

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