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  • CM And Collector Are Shutting Down The Electric Buttons In Their Office Themselves, But The Employees Are Careless, The Lights Kept Burning In The Offices Throughout The Day.

जागरूकता की कमी:सीएम और कलेक्टर अपने कार्यालय में बिजली के बटन खुद कर रहे बंद, पर कर्मचारीबेपरवाह, पूरे दिन दफ्तरों में जलती रहीं लाइटें

शाजापुरएक महीने पहले
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  • शाजापुर आए मुख्यमंत्री ने बिजली बचत के लिए सरकारी कर्मचारियों से की थी अपील, पर आदत सुधारने के लिए कोई तैयार नहीं

प्रदेश के सीएम शिवराजसिंह चौहान और शाजापुर कलेक्टर अपने दफ्तरों में बिजली की फिजूलखर्ची को लेकर जितने गंभीर हैं, उनके कर्मचारी उतने ही लापरवाह दिखाई दे रहे हैं। गत दिनों शाजापुर आए सीएम चाैहान ने कहा था कि वे खुद अपने कार्यालय के इलेक्ट्राॅनिक स्विच बंद कर देते हैं। यहां के सरकारी दफ्तरों में ऐसा नहीं होता। यहां के कर्मचारी अपने कमरों से बाहर निकले के बाद लाइट और पंखे बंद तक नहीं करते। भास्कर ने सरकारी कार्यालयों का स्कैन किया तो दिखाई दी इन अफसरों की लापरवाही।

कलेक्टर कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर

यहां बने प्रतीक्षा हॉल में पूरा दिन इस तरह ट्यूब लाइट जलती रही। जबकि इस हाल में प्रकृतिक रूप से आने वाली रोशनी को पर्दे लगाकर अवरुद्ध कर दिया। भास्कर इस क्षेत्र में करीब 30 मिनट तक इंतजार करता रहा कि कोई कर्मचारी आकर इस ओर ध्यान देगा। पर किसी ने भी बिजली की फिजूलखर्ची को रोकने की जहमत नहीं उठाई।

लंच में भी बंद नहीं होती लाइटें

शहर के लोगों को समय पर बिजली बिल भरने के लिए प्रेरित करने वाली नगर पालिका के कर्मचारी भी बिजली बचाने को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। यहां लंच करने जाने के दौरान भी कर्मचारी अपने कमरों की बिजली बंद करने का नाम नहीं लेते। ऐसा ही नजारा मंगल वार को दिखाई दिया। यहां के सभी कक्षों में दोपहर के समय भी बल्ब और ट्यूब लाइट बंद नहीं करते।

वसूल बाकी कक्ष में दिखाई दी लापरवाही

विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को वरिष्ठ अफसरों के बुलावे पर आना-जाना करना पड़ता है। लेकिन वसूली बाकी कक्ष में लापरवाही का आलम यह कि यहां खिड़कियां खुली होने के बाद भी बिजली की फिजूलखर्ची दिखाई दी। पूरा कक्ष खाली पड़ा था। भास्कर यहां भी जिम्मेदारों के आने का इंतजार करता रहा, पर 15-20 मिनट तक ऐसा कोई कर्मचारी नहीं आया जो लाइट बंद कर सकें।

खाली पड़े तहसील कार्यालय भी रोशनी

बिजली के अपव्यय को लेकर छोटे कर्मचारी ही नहीं बड़े अफसर भी लापरवाह दिखाई दिए। कलेक्टर कार्यालय के पास स्थित तहसील कार्यालय में तहसीलदार के कक्ष में भी बिना काम के बल्ब चालू ही छोड़ दिए गए। यहां भृत्य सहित पटवारी रैंक के कर्मचारी कई बार अंदर बाहर हुए। पर किसी ने भी इस बल्ब को बंद करने के बारे में नहीं सोचा। बिजली बिल के मामले में बिजली वितरण कंपनी आम जनता पर लगातार वसूली का दबाव बना रही है। एक दो माह का बिल नहीं भरने पर पेनल्टी के साथ जब्ती की कार्रवाई भी करती है।

वहीं दूसरी ओर सरकारी दफ्तरों पर भी कंपनी को 10-15 लाख रुपए का बकाया होने के बाद भी इनके लिए कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। दूसरी ओर अफसर अपने कार्यालय और घरों में बिजली की अपव्यय करते दिखाई देते हैं। सीएम की अपील का असर कर्मचारियों पर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा।

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