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ऑक्सीजन लाइन केस दर्ज होने के पहले नई लगना शुरू:इंजेक्शन लूट के मामले में कमिश्नर ने सीएस गुप्ता को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

शाजापुरएक महीने पहले
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जिला अस्पताल के मिस मैनेजमेंट की गड़बड़ी एक बार फिर सामने आई। करीब 6 माह पूर्व चोरी हुई आॅक्सीजन की सेंट्रल लाइन के मामले में एफआईआर तो दर्ज नहीं हुई, लेकिन अस्पताल में नई लाइन डलना शुरू हो गई। वहीं रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर कमिशनर उज्जैन संभाग ने सिविल सर्जन को सात दिनों में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

ज्ञात रहे दोनों ही गंभीर मामलों में अस्पताल प्रबंधन का उदासीन रवैया मामलों पर पर्दा डालने जैसा सामने आ रहा है। अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के चलते कलेक्टर दिनेश जैन ने एक के बाद एक अस्पताल के कई डाॅक्टरों ने सिविल सर्जन पद की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन इसके बाद भी व्यवस्थाएं सुधरने के बजाए बिगड़ती रही। पहले ऑक्सीजन सिलेंडरों की मारामारी, उसके बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन की लूट और बाद में ऑक्सीजन सेंट्रल लाइन के गायब होने का मामला सामने आया। इन सब में सबसे बड़ी चिंता का विषय यह था कि मरीजों के लिए सबसे जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शनों को कलेक्टर द्वारा बनाई समिति के बगैर वितरण कराना और इस दौरान सिविल सर्जन का अस्पताल में नहीं होने को लेकर कलेक्टर दिनेश जैन ने गंभीर मानते हुए एक प्रतिवेदन कमिश्नर उज्जैन संभाग को भेजा था।

गैरमौजूदगी में इंजेक्शन बंटवाना पड़ा भारी
कमिश्नर संदीप यादव द्वारा जारी किए नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि तात्कालीन सिविल सर्जन डॉ. शुभम गुप्ता ने अपनी गैर मौजूदगी में डाॅ. संजय चांदना और सद्दाम अली से वितरित कराए। वह भी शासन की समिति सदस्यों के नहीं रहते हुए। यह घोर लापरवाही है। कमिश्नर यादव ने गुप्ता से इस कृत्य का सात दिनों में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं होने पर दो वेतन वृद्धि रोकने पर भी विचार किया जा सकता है।

अनियमितता पर प्रतिवेदन भेजा -कलेक्टर
इंजेक्शन चोरी होना गंभीर मामला है। संक्रमण काल में इस तरह की अनियमितता पाई जाने पर कमिश्नर उज्जैन संभाग को प्रतिवेदन भेजा था, नोटिस मिलने के सात दिनों के अंदर जवाब देना होगा।
-दिनेश जैन, कलेक्टर

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