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फर्जीवाड़ा:लाॅ कॉलेज में फर्जीवाड़ा : 8 अक्टूबर की रात 7.19 बजे से 8.50 बजे तक कियोस्क से हुए थे पांचों फर्जी एडमिशन

शाजापुरएक महीने पहले
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  • जांच टीम से पहले भास्कर की पड़ताल में सामने आया सच, काॅलेज स्टाफ पर भी पासवर्ड लीक करने अंदेशा

लॉ कॉलेज की वेबसाइट व पासवर्ड चोरी कर फर्जी तरीके से हुए 5 एडमिशन के मामले में जांच टीम से पहले दैनिक भास्कर टीम ने पड़ताल की। भास्कर जांच में यह बात सामने आई कि जो फर्जी एडमिशन हुए वे 8 अक्टूबर की रात 7.19 से 8.50 बजे के बीच एक कियोस्क सेंटर से हुए थे। अब कियोस्क सेंटर की पहचान होते ही फर्जी एडमिशन का पूरा भंडाफोड़ हो जाएगा।

इधर, मामला सामने आने के बाद बीकेएसएन कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. बी.के. शर्मा द्वारा बनाई गई टीम सोमवार शाम तक इसका पता नहीं कर सकी। टीम में शामिल सदस्य यह तक पता नहीं लगा सके कि लिंक व पासवर्ड बाहर तक कैसे पहुंचा। एडमिशन कराने में कॉलेज स्टाफ में से किसने सहयोग किया। भास्कर ने जो पड़ताल की उसमें पहला फर्जी एडमिशन 7.19 बजे होना सामने आया है।

वहीं दूसरा 8.28 बजे, तीसरा 8.36, चौथा 8.42 और पांचवां एडमिशन रात 8.50 बजे हुआ। इधर, कॉलेज की जांच टीम में कोई जानकारी सामने नहीं आने पर मामले अतिरिक्त उच्च शिक्षा संचालक डॉ. आर.सी. जाटव उज्जैन तक पहुंच गया। डॉ. जाटव अब अपने स्तर से इस फर्जीवाड़े की जांच कराएंगे।

एनएसयूआई ने लॉ कॉलेज बंद कराया, विरोध में धरना दिया

दो दिन पहले 17 अक्टूबर की 5 बजे गठित जांच समिति को प्रभारी प्राचार्य डॉ. शर्मा को रिपोर्ट सौंपी जाना थी, लेकिन रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आ पाने पर सोमवार दोपहर 1 बजे एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अंकित अंबावतिया व अन्य कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने हंगामा करते हुए लॉ कॉलेज में ताला लगाने लगे। इस पर मौजूद पुलिस जवानों ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को रोक लिया।

हालांकि हंगामा बढ़ता देख कॉलेज प्रबंधन ने खुद लॉ कॉलेज में ताला लगा दिया। एनएसयूआई के पदाधिकारी सुरेंद्र गुर्जर और प्रखर दवे ने लाॅ कॉलेज के स्थायी प्राचार्य डॉ. एम.के. कनेरिया को अवकाश बढ़ाने पर हैरानी जताते हुए कहा कि जांच समिति को अपना बयान क्यों नहीं देते। ताकि जांच पूरी हो और दोषी पर कार्रवाई की जाए।

अब दो स्तर से होगी फर्जी एडमिशन मामले की जांच

1. फर्जीवाड़े के मामले को लेकर दो प्रकार से जांच होगी। इसमें पहले जांच उच्च शिक्षा विभाग के अनुरूप अतिरिक्त उच्च शिक्षा संचालक डॉ. आर.सी. जाटव करेंगे, जो यह देखेंगे कि एडमिशन कैसे हुए। लिंक चोरी कैसे हुई और जिन छात्रों को एडमिशन हुए हैं। उसकी निरस्तीकरण की प्रक्रिया का काम उनके पास रहेगा।

2. पुलिस महानिदेशक साइबर सेल के माध्यम से होगी। इसमें मुख्य आरोपी कियोस्क सेंटर का संचालक को बनाया जा सकता है। जिसने लाॅ कॉलेज के अधिकार को प्राप्त करते हुए छात्रों के एडमिशन कर दिए। संचालक पर 420 के साथ उसके सेंटर की मान्यता रद्द करने सहित अपराध पंजीबद्ध होने की कार्रवाई भी हो सकती है।

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