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पर्यूषण पर्व:कोराेना गाइड लाइन का पालन करते हुए पर्व के बचे हुए कार्यक्रम होंगे, प्रभु श्री का होगा अभिषेक

शाजापुर18 दिन पहले
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  • चल समारोह निरस्त कर केवल तीर्थंकर प्रतिमा और पवित्र जैन ग्रंथ कल्पसूत्र को पालकी में विराजित कर जैन उपाश्रय लाएंगे

कल्पसूत्र आगमग्रंथों में सर्वाधिक उपकारी ग्रंथ है। इसका श्रवण करके श्रावक भवसागर से पार हो जाते हैं। पूर्व में कल्पसूत्र का वाचन व श्रवण केवल साधु-साध्वी मंडल द्वारा ही किया जाता था लेकिन वर्तमान में कल्पसूत्र का वाचन गृहस्थ श्रावकों के मध्य किया जाता है क्योंकि इसके श्रवण मात्र से ही प्राणियों के दु:ख, पाप और संताप क्षय हो जाया करते हैं और उसे मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है।

उक्त बातें सोमवार को स्थानीय ओसवालसेरी स्थित जैन उपाश्रय में आयोजित पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के चतुर्थ दिवस प्रवचनकर्ता सौरभ नारेलिया ने धर्मसभा में उपस्थित जैन समाजजनों को जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ कल्पसूत्र के महत्व का वर्णन करते हुए बताई।

इस दौरान कल्पसूत्र बेहराने की बोली लाभार्थी जितेंद्र नारेलिया परिवार ने ली। इसके उपरांत दोपहर करीब 1:30 बजे कोरोना गाइड लाइन और धारा 144 का पालन करते हुए चलसमारोह निरस्त कर केवल तीर्थंकर प्रतिमा तथा पवित्र जैन ग्रंथ कल्पसूत्र को पालकी में विराजित कर भ्रमण करवाते हुए ओसवाल सेरी स्थित जैन उपाश्रय लाया गया। समाज के युवाओं द्वारा प्रतिमा विराजित पालकी को कंधों पर उठाकर भ्रमण करवाया।

आज मनेगा महावीर जन्म महोत्सव, अभिषेक भी होगा
प्रवचनकर्ता नारेलिया ने बताया पर्यूषण पर्व के चतुर्थ दिवस प्रारंभ हुए कल्पसूत्र वाचन के दौरान आज पांचवें दिन मंगलवार दोपहर 2 बजे स्थानीय जैन उपाश्रय में कल्पसूत्र वाचनकर्ता द्वारा भगवान महावीर का जन्म वाचन धूमधाम से किया जाएगा।

इस दौरान जब प्रभु महावीर का जन्म वाचन होगा, तब सौधर्मेंद्र इंद्र महाराज द्वारा पांच रूप धारण करके विशाल रूप में दादावाड़ी में विशेष निर्मित मेरु पर्वत पर प्रभु श्री का नयनाभिराम अभिषेक होगा। यह आयोजन नगर में पहली बार होगा।

आज नहीं निकलेगा चलसमारोह : समाज के मीडिया प्रभारी मंगल नाहर ने बताया प्रशासन द्वारा जिले में लागू धारा 144 का पालन करते हुए प्रतिवर्ष निकाला जाने वाला महावीर जन्म वाचन का विशाल चलसमारोह अध्यक्ष लोकेंद्र नारेलिया द्वारा निरस्त कर दिया है।

इस दौरान कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए सिर्फ चौबीस जिनालय धाम में विराजित तीर्थंकर प्रतिमाओं की नयनाभिराम अंगरचना के साथ रात्रि के समय रंगारंग भजन संध्या का आयोजन कर प्रभु का जन्म मनाया जाएगा।

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