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बंद करेंगे कुप्रथा:15 से ज्यादा समाज जुड़े, मृत्युभोज बंद कराने के लिए अभियान चलाएंगे

शाजापुर10 महीने पहले
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  • भास्कर अभियान से प्रेरित होकर 50 लोगों ने मैसेज भेजकर मृत्युभोज बंद कराने के लिए दी सहमति

समाज में फैली मृत्युभोज जैसी कुप्रथा को बंद करने के लिए हर समाज तैयार है। अब तक दबी जुबान में इसका विरोध करने वाले समाजजन खुलकर दैनिक भास्कर की मुहिम से शामिल हो गए हैं। सामाजिक संगठनों ने अपने अपने स्तर से इस कुप्रथा को बंद करने के लिए अभियान भी छेड़ दिया। जिन समाजों में बड़े स्तर पर होने वाले इस तरह के आयोजन को पहले चरण में समाजजनों छोटे रूप में करने की बात कही है। लॉकडाउन के इस अनुभव को आधार मानते हुए दैनिक भास्कर ने समाज में फैली इस कुप्रथा को बंद करने के लिए अभियान शुरू कर दिया। पहले ही दिन से भास्कर के इस अभियान का सभी समाजजनों ने स्वागत किया।

इन्होंने कुप्रथा बंद करने की बात कही
ब्राह्मण समाज, भावसार समाज, राजपूत समाज, जैन समाज, गुर्जर समाज, मेवाड़ा समाज, वैश्य समाज, कुशवाह समाज, सोनी समाज, टेलर समाज, बैरागी समाज, नाई समाज, बलाई समाज, चर्मकार समाज, कुंभकार समाज, मोढ़ वणिक समाज आदि ने इस कुप्रथा को समाज से पूरी तरह बंद करने का भरोसा दिलाया है। इसके लिए कुछ समाज के पदाधिकारियों ने अभियान भी शुरू कर दिया है। 

जैन समाज में अभी कुप्रथा का चलन है
जैन समाज में फिलहाल मृत्युभोज वाली कुप्रथा चल रही है। हालांकि 13 दिन के बजाए तीसरे ही दिन सारे काम निपट जाते हैं। तीसरे दिन उठावना के दौरान होने वाले इस मृत्युभोज को अब रोकेंगे। समाज अध्यक्ष लोकेंद्र नारेलिया ने बताया कि मंदिर में समाजजन की मौजूदगी में सभी को यह मैसेज भेज दिया जाएगा। जब भी ऐसी स्थिति बनेगी तब गमी वाले घर जाकर परिजनों से आग्रह कर इस कुप्रथा को बंद कराएंगे। पूजन आदि कर ही दिवंगत आत्मा की शांति मिल जाती है तो फिर मृत्युभोज क्यों हो। इस दौरान समाज के वरिष्ठ मनोज गेलोछा, अनिल गेलोछा, पुखराज जैन ने भी संकल्प लेकर समाज में इसकी पहल शुरू करने का भरोसा दिलाया।

संकल्प लेकर कहा - इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करेंगे 
मोढ़ वणिक समाज के पदाधिकारियों ने समाज में फैली इस कुप्रथा को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया है। समाज के अध्यक्ष कमलकिशोर गुप्ता ने बताया कि वैसे तो हमारी समाज में इसे पहले से छोटे स्वरूप में किया जाता है। लेकिन अब इस कुप्रथा को पूरी तरह से बंद करंेगे। पगड़ी रस्म के लिए भी कपड़ा प्रथा बंद करते हुए सिर्फ मामा की तरफ से पगड़ी रस्म करा दी जाएगी। इसके लिए पहल शुरू हो चुकी है। समाज अध्यक्ष कमलकिशोर गुप्ता के साथ सचिव आलोक गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, रितेश गुप्ता, मीतेश गुप्ता ने मंदिर पुजारी शिव नारायण चतुर्वेदी की मौजूदगी में भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा के सामने इस कुप्रथा को समाज से खत्म करने का संकल्प लिया।  
गमी होते ही पहुंचकर मृत्युभोज नहीं करने की सलाह देंगे 
औदिच्य ब्राह्मण समाज ने भी इस कुप्रथा को समाज में पूरी तरह से बंद करने के लिए पहल शुरू कर दी है। समाज के अध्यक्ष महेश त्रिवेदी ने बताया कि अब समाज में ऐसी घटना होते ही। समाज के सभी वरिष्ठजन वहां पहुंचेंगे और मृत्युभोज नहीं कराने की समझाइश दंेगे। समाज से अब इस कुप्रथा को पूरी तरह से बंद कराएंगे। ताकि गमी वाले परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। संकल्प के दौरान मौजूद समाज के अध्यक्ष महेश त्रिवेदी, पूर्व अध्यक्ष चांदनारायण त्रिवेदी, नितिन आचार्य, मुकुल जोशी ने कहा कि उज्जैन में होने वाली पूजा भी स्थानीय स्तर पर कराना शुरू करेंगे। 

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