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सफाई शुरू:10 सालों में 30 लाख रुपए में भी जलकुंभी खत्म नहीं कर पाई नपा

शाजापुर10 दिन पहले
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  • चीलर नदी के सौंदर्यीकरण के नाम पर दो स्थानों पर पार्क और घाट बनाने में खर्च कर दिए 7 करोड़

करीब 9 साल पहले शहर के भ्रमण पर आए सीएम शिवराजसिंह चौहान ने चीलर नदी को देख तात्कालीन अफसरों पर नाराजगी व्यक्त कर गंदे नाले जैसी दिखाई देने वाली इस नदी की सूरत बदलने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सौंदर्यीकरण के नाम पर 7 करोड़ रुपए की लागत से सिर्फ पार्क और घाटों के निर्माण पर ही खर्च कर दिए, जलकुंभी अब भी बरकरार है, जबकि इस काम के लिए नपा ने 10 सालों में 30 लाख रुपए पानी में बहा दिए।

मानसून पूर्व अब एक बार फिर नपा को जलकुंभी हटाने की याद आई है। इसकी शुरुआत रविवार से कर दी गई है। नपा सीएमओ भूपेंद्रकुमार दीक्षित के अनुसार रविवार को नदी में जेसीबी से प्रयास किया कि मशीनों के माध्यम से जलकुंभी को निकाला जा सकता है या नहीं।

आज से मशीनों की संख्या बढ़ाकर जलकुंभी हटाने का प्रयास किया जाएगा। सीएमओ ने बताया जलकुंभी हटाने का काम करने वाली संस्थाओं से बात की जा रही है। इस बार इसका बजट ज्यादा बताया जा रहा है। इस पर योजना बनाकर शहरी क्षेत्र से होकर गुजरी नदी के पूरे तीन किमी के हिस्से को साफ किया जाएगा।

30 साल पहले सूखने के बाद साफ रहती थी
महूपुरा क्षेत्र निवासी प्रभुलाल राठौर और अशाेक कुमार ने बताया कि करीब 25-30 साल पहले तक नदी सूखने के बाद भी साफ रहती थी। राठौर बताते हैं कि जब उनकी उम्र 12 वर्ष के लगभग थी, तब गर्मी के दिनों में नदी सूखने के बाद तल में झिरी खोदकर पानी भर कर लाते थे।

ओंकारेश्वर मंदिर और गरासिया घाट क्षेत्र में नदी की गहराई भी अधिक थी, यहां और रपेटे के तीनों चीरों से छलांग लगाकर तैराकी का आनंद भी लेते थे। पर शहर के गंदे नालों से आई गंदगी ने पूरी नदी को दलदल बना दिया।
हर बार ढाई से तीन लाख रुपए खर्च, नतीजा गंदगी-गाद
नदी की सूरत संवारने के लिए बीते कई सालों से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बीते 10 सालों में इसे व्यापक रूप से किया गया। नपा सूत्रों के अनुसार कभी मशीनों से तो कभी लकड़ी की डोंगियां और वाहनों ट्यूब से मजदूर लगाकर जलकुंभी हटाने के लिए हर बार ढाई से तीन लाख रुपए खर्च किए गए।

खासताैर पर 2015 के बाद तो सौंदर्यीकरण के नाम पर 7 करोड़ रुपए पार्क और घाट बनाने में ही खर्च कर दिए गए। जबकि जलकुंभी की समस्या जस की तस बनी हुई है।

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