पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

फसल:मौसम बदला तो प्याज में 40 फीसदी थ्रिप्स का प्रकोप, कीटनाशक से बढ़ रही अतिरिक्त लागत

शाजापुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • तापमान बढ़ने से दिसंबर के बाद लगाई फसलों में बनी स्थिति, जिले में प्याज का रकबा 12 हजार तो लहुसन की बोवनी 4 हजार 480 हेक्टेयर में हुई

प्याज और लहुसन के लिए देश में अलग पहचान बनाने वाले जिले के किसान लहसुन और प्याज की फसलों में थ्रिप्स बीमारी के प्रकोप से जूझ रहे हैं। ठंड के बाद अचानक तापमान में बढ़त के कारण यह समस्या 40 फीसदी तक बढ़ गई है।

फसलों को बीमारी के प्रकोप से बचाने के लिए कीटनाशक का अधिकतम मात्रा में करना पड़ रहा है, जिससे फसल की लागत बढ़ रही है। अप्रैल और मई में आने वाली जो प्याज पूरे देश में भंडारण के लिए जानी जाती है, वह थ्रिप्स के कारण खराब हो रही है। इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। जिले में खरीफ और रबी में प्याज करीब 12 हजार और लहुसन की 4 हजार 480 हेक्टेयर में बोवनी हुई है। इनमें से 75 फीसदी बोवनी रबी सीजन में हुई है।

स्थिति यह है कि आलू की खुदाई के बाद अब भी कई किसान प्याज लगा रहे हैं, लेकिन दिसंबर के आखिरी हफ्ते से लेकर जनवरी तक जहां बोवनी हुई है, वहां किसानों को फसल में थ्रिप्स बीमारी का सामना करना पड़ रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण लहसुन-प्याज में थ्रिप्स के कारण फसल के पत्ते व पौधे सूखना शुरू हो गए हैं। इसके अलावा फसलों की जड़ों में भी कीट की शिकायत होने लगी। लगातार कीटनाशक का छिड़काव करने के बाद भी समस्या कम नहीं हो रही है। किसानों ने बताया कि बोवनी व कीटनाशक में खर्च के बाद अब आर्थिक नुकसान हो रहा है।

थ्रिप्स से ये हो रहा फसलों पर असर

  • फसल के पत्ते पीले पड़कर सूख रहे हैं।
  • थ्रिप्स के कारण बढ़वार प्रभावित हो रही है।
  • पत्ते और जड़ नष्ट हो रही है।
  • कीटनाशक तथा दवाइयों में अधिक खर्च हो रहा है।

इन कारणों से भी प्रकोप

  • बोवनी के समय खेत में नमी रहने से थ्रिप्स का खतरा बढ़ता है।
  • खेत में कच्चा गोबर का खाद डालने से भी थ्रिप्स का मच्छर पनपता है। बचाव के लिए बताए उपाय
  • थ्रिप्स के प्रकोप में हिप्रोनिल 1 मिली प्रतिलीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव कर सकते हैं।
  • इमिडाक्लोप्रिड 17.8 सोल्यूवेल 70 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव कर सकते हैं।
  • थायोमिथाक्जम 25 डब्ल्यूपी 50 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव कर प्रकोप से फसलों को बचा सकते हैं।
  • इनमें से कोई भी एक दवा का उपयोग किया जा सकता है। प्रकोप खत्म न होने पर 8 से 10 दिन बाद फिर दवा डाल सकते हैं। (डाॅ. कयाम सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक)

फसलों को नुकसान

  • {प्रकोप तो हर साल रहता है, लेकिन इस बार बहुत अधिक है। दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं तो लागत बढ़ रही है। फसल बचाने के लिए अब लगातार दवाएं डाल रहे हैं।

सुरेंद्रसिंह राजपूत, किसान छापीहेड़ा

  • खरीफ सीजन में दो बीघा में लगा लहुसन पूरा खराब हो गया था। अब प्याज में समस्या आ रही है। दवाइयां का छिड़काव करने में अर्थ के साथ श्रम भी लग रहा है। दोहरी मार का डर सता रहा है। धर्मेंद्र सिंह, किसान पतोली

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज आर्थिक योजनाओं को फलीभूत करने का उचित समय है। पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमता अनुसार काम करें। भूमि संबंधी खरीद-फरोख्त का काम संपन्न हो सकता है। विद्यार्थियों की करियर संबंधी किसी समस्...

    और पढ़ें