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दर्द से तड़पती रहीं गर्भवती महिलाएं:डॉक्टर ने गार्ड से कहलवा दिया- स्टाफ नहीं है, डिलीवरी के लिए कहीं और लेकर जाओ

शाजापुर20 दिन पहले
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हड़ताल के दौरान सद्बुद्धि यज्ञ करती हुई नर्सिंग स्टाफ - Dainik Bhaskar
हड़ताल के दौरान सद्बुद्धि यज्ञ करती हुई नर्सिंग स्टाफ

कोरोना काल में व्यवस्थाएं जुटाने पर अपनी पीठ थपथपाने वाले जिला स्वास्थ्य विभाग के अपने ही ट्रामा सेंटर में मरीजों की फजीहत हो गई। अस्पताल की 60 प्रतिशत से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर जाने के एक दिन पहले व्यवस्थाएं नहीं बिगड़ने देने का अफसरों का दावा पहले ही दिन फेल हो गया। अस्पताल के मैन गेट से लेकर मेटरनिटी वार्ड तक गर्भवती महिलाएं दर्द से तड़पती रही। परिजन इस बात से परेशान हो गए कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने गार्ड से यह कहलवा दिया कि डिलीवरी के लिए कहीं और ले जाओ, यहां स्टाफ नहीं है। नर्सिंग स्टाफ की बुधवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर प्रसूति के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं पर पड़ा है। सुबह 10 बजे से अस्पताल प्रबंधन द्वारा इमरजेंसी इलाज और प्रसूति के लिए आने वाली महिलाओं को डिलीवरी कराने से इनकार कर दिया। डॉक्टर्स ने यह काम खुद नहीं किया, बल्कि गार्ड से कहलवा दिया कि अस्पताल में स्टाफ नहीं है, इसलिए डिलीवरी नहीं करवाई जा सकेगी। जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 15 डिलीवरी होती है, लेकिन बुधवार को शाम 4 बजे तक अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में केवल 4 बच्चों के जन्म हुए।

40 से ज्यादा नर्सें हाथों में स्लोगन लेकर अस्पताल परिसर पहुंची और नारेबाजी की। इसके बाद धरना-प्रदर्शन के साथ शासन से मांग करते हुए जिम्मेदारों को सद्बुद्धि देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए यज्ञ में आहुतियां दी। जिला अध्यक्ष भाग्यश्री चौधरी एवं प्रांतीय सचिव बबीता लियोपेट्रो ने बताया 4 साल पहले सांकेतिक प्रदर्शन किया था। शासन के आश्वासन के साथ ही हड़ताल खत्म कर दी थी, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। इसलिए फिर से अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा। इधर, सीएमएचओ के समक्ष समस्या लेकर पहुंची मेट्रन कृष्णकांता चौहान को सीएमएचओ डॉ. राजू निदारिया ने कहा आप डिलीवरी कराइए, आपने पहले भी ये जिम्मेदारी संभाली ही है।

शाजापुर जिले के विकासखंड मोहन बड़ोदिया से रैफर होकर ग्राम मंडोदा की गर्भवती महिला डिलीवरी के लिए यहां आई थी। तकरीबन 40 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जिला अस्पताल से भी उसे निराशा मिली और अस्पताल द्वारा उसे इंदौर ले जाने का सुझाव दिया गया। अलका प्रसूति के दर्द से तड़पती हुई जिला अस्पताल के मैन गेट पर 1 घंटे तक रही। अलका के साथ परिजनों के रूप में केवल महिलाएं आई थीं। महिलाओं ने बताया ब्लॉक के अस्पताल में तो चेक भी कर लिया था, यहां तो डॉक्टरों ने अंदर भी नहीं बुलाया। बाहर से ही कह दिया गया कि इंदौर ले जाओ यहां स्टाफ नहीं है।

सुनेरा गांव की रहने वाली डॉली पति लाखन को रात को प्रसूति का दर्द शुरू हुआ था। परिजन सुबह उसे लेकर पचोर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां डिलीवरी में कठिनाई बताकर रैफर कर दिया गया। परिजन उसे लेकर सुबह 10 बजे शाजापुर जिला अस्पताल आए। यहां मेटरनिटी वार्ड के बाहर पहुंचे तो उन्हें लेबर रूम तक भी नहीं जाने दिया। विनती करने के बाद महिला गार्ड लेबर रूम में डॉली के बारे में बताने गई। महिला गार्ड ने वापस आकर डॉली के पति को कहा कि यहां स्टाफ नहीं है, आप कहीं और लेकर चले जाइए।

बेरछा की रहने वाली गर्भवती कविता को परिजन सुबह 10 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। दोपहर 2 बजे तक अस्पताल में डॉक्टरों के सामने विनती करने के बाद अंतत: परिजनों को निजी अस्पताल का रूख करना पड़ा। पति जितेंद्र ने बताया कविता को बेरछा के अस्पताल से रैफर किया था, लेकिन यहां भी बताया जा रहा है कि स्टाफ नहीं है डिलीवरी नहीं हो पाएगी। जितेंद्र ने बताया कि वह पत्नी को निजी अस्पताल लेकर गए हैं।

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