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गोगा नवमी:इस बार छड़ी जुलूस का भ्रमण चार की बजाए एक घंटे में पूरा, गोगामेड़ी पर किया विसर्जन

शाजापुरएक महीने पहले
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गोगा नवमी पर वाल्मीकि समाज ने पवित्र छड़ी का चल समारोह निकाला। सोशल डिस्टेंस के साथ 4 बजे से शुरू हुआ चल समारोह 5 बजे समाप्त कर दिया गया। 40 दिन से ब्रह्मचर्य व्रत के साथ जिस छड़ी की पूजा की जा रही थी, उसे एक घंटे के अंदर ही शहर की समस्त गोगादेव की छड़ियां एक के बाद एक सादगी से नदी पर बने अपने स्थान पर पूजन कर विसर्जित कर दी गई।
जुलूस में प्रमुख रूप से दायरा, धानमंडी, मगरिया, महूपुरा, लाल खिड़की, सपरीपुरा की पवित्र छड़ियां शमिल थी। गोगा उत्सव मंडल समिति द्वारा छड़ियाें का आकर्षक शृंगार किया गया था। भगवान शिव पार्वती, गणेश तथा अलग-अलग फूलो और मोर पंख से डेकोरेशन किया गया था। हालांकि महामारी के कारण इस बार प्रशासन ने चल समारोह का समय बदल कर जल्दी कर दिया था और समाजजन छड़ियाें का शाम 4 से 5 बजे के बीच कर दिया। हर झांकी के साथ पांच पांच सदस्यों को नदी पर जाने की अनुमति थी। चल समारोह में भक्त और मंडल समिति के लोग नंगे पैर छड़ियों को कमर से बने पट्टे और हाथों से उठाकर अपने स्थान पर विसर्जित करने के लिए ले जा रहे थे। प्रतिवर्ष गोगा नवमी पर चल समारोह 6 बजे के बाद रात्रि 10 बजे तक निकाला जाता था। इसमें बैंड के साथ ताशे और ढोल भी रहते हैं। इसे देखने के लिए आसपास के जिलों से भी लोग आते हैं।
नदी को प्रदूषित होने से बचाया
दायरा स्थित गोगादेव मंदिर के पुजारी और भक्त संजय गिरजे ने बताया कि गोगादेव की छड़ियों को नदी पर बने गोगा मेड़ी पर पूजन कर विसर्जित किया गया। इस बार नदी को स्वच्छ रखने और प्रदूषण से बचाने के लिए छड़ियों का सांकेतिक विसर्जन कर वापस मंदिर लेकर आए।

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