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ऊर्जावान शाजापुर में एक गांव ऐसा भी:ग्राम टोलखेड़ी में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा नहीं, सालों से अंधेरे में रह रहे हैं ग्रामीण

शाजापुर6 दिन पहले
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इस तरह कच्ची सड़कों से गुजरते हैं लोग। - Dainik Bhaskar
इस तरह कच्ची सड़कों से गुजरते हैं लोग।
  • एक साल पहले बिजली के पोल पहुंचाए लेकिन अब तक नहीं लगाए
  • 70 लोग वोटिंग करते हैं लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं

शहर से 22 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत दुपाड़ा के आगे एक छोटा सा गांव बसा है। इसका नाम है टोलखेड़ी तालाब, टोलखेड़ी तालाब इसलिए नाम रखा क्योंकि दशकों पहले ये एक तालाब ही था। वर्तमान पीढ़ी को खुद नहीं पता कि इतने सुदूर क्षेत्र और तालाब में इनके पूर्वजों को गांव बसाने की जरूरत क्यों पड़ी। गांव के इन परिवारों की समस्या यह है कि इस आधुनिक युग में भी ये लोग बिजली और सड़क की सुविधा से महरूम हैं।

हालांकि गांव के लोगों को भारत की नागरिकता है। यहां के 70 से ज्यादा वयस्क सदस्य मताधिकार का प्रयोग करते हैं। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव में जाकर आशीर्वाद के रूप में वोट भी मांगते हैं लेकिन मूलभूत सुविधाएं देने के लिए कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचता। जिम्मेदारों को इनकी सुध लेनी चाहिए।

बच्चों की शिक्षा की भरपाई नहीं हो पाएगी

इन्हीं कच्चे रास्तों को पार कर बच्चे तीन किलोमीटर दुपाड़ा के शासकीय स्कूल में शिक्षा के लिए आते हैं लेकिन दो साल से कोविड संक्रमण के चलते स्कूल बंद है। ऐसे में इन बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई। इस गेप की वजह से कईं बच्चों के स्कूल छूटने के आसार हैं। दो साल जो पढ़ाई का नुकसान हुआ, उसकी भरपाई भी नहीं हो पाएगी। गांव के लोगों की रातें अंधेरे में गुजरती हैं और दिनभर गर्मी से परेशानी में रहते हैं क्योंकि बिजली नहीं होने से पंखे या कूलर जैसी सुविधा से गांव वंचित है।

इस तरह गांव में बने हुए हैं कच्चे मकान व झोपड़ियां।
इस तरह गांव में बने हुए हैं कच्चे मकान व झोपड़ियां।

हर काम के लिए 3 किमी आना पड़ता है

गांव में अधिकांश गरीब परिवार निवासरत हैं, जो महीनेभर का राशन भी घरों में भरकर नहीं रख पाते हैं। ऐसे में हर छोटी-मोटी जरूरतों के लिए इन लोगों को तीन किलोमीटर दूर ग्राम दुपाड़ा आना पड़ता है। आवागमन के लिए जो रास्ता है, वो कच्चा है। पहचान के लिए ट्रैक्टर के पहिए हैं। पहिए के रास्ते होते हुए ही ग्रामीण दुपाड़ा तक आते हैं। बारिश के मौसम में ये रास्ता भी बंद हो जाता है। एेसे आपातकाल में लोगों के पास कोई सुविधा नहीं होती।

ग्रामीणों ने सीईओ से लगाई गुहार

गांव के महेश पिता कालूराम गुर्जर, उदयसिंह पिता शिवलाल, बालाराम पिता नारायण सिंह गुर्जर, बाबूलाल पिता नाथूसिंह गुर्जर, देवीसिंह पिता नाथूसिंह गुर्जर, दिलीप पिता हाकमसिंह गुर्जर आदि ग्रामीणों ने सीईओ जिला पंचायत से गांव में मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए गुहार लगाई है।

गांव में एक साल पहले हुआ था सर्वे

एक साल पहले गांव का सर्वे हुआ था, जिसमें बिजली के पोल लगाकर गांव को रोशन करने के लिए योजना क्रियान्वित हुई। श्रमिकों ने यहां बिजली के पोल लाकर रखे भी लेकिन बिजली के खंभों को स्थापित कर विद्युत सप्लाई का काम आगे नहीं बढ़ा।

हम इस मामले की जांच कराएंगे

​​​​​​​हमारे पास टोलखेड़ी तालाब के लोग नहीं आए। मूूलभूत सुविधाओंं से विहीन गांव की जानकारी नहींं है। मामले में हम जांच कराएंगेे।

- मिशा सिंह, सीईओ जिला पंचायत

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