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जल संकट:बांध से लगे 14 गांव में पानी की चोरी, पेयजल के लिए 7 फीट पानी नहीं बचा पाए अफसर; अब लिफ्टिंग शुरू

शाजापुर6 महीने पहले
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डेम किनारे के गांव वाले मोटर लगाकर खींच रहे पानी - Dainik Bhaskar
डेम किनारे के गांव वाले मोटर लगाकर खींच रहे पानी
  • 80 हजार आबादी को एक दिन छोड़कर हो रहा जलप्रदाय, समय पर बारिश नहीं हुई तो होंगे गंभीर हालात

संक्रमण काल के बीच अफसरों की लापरवाही से जलसंकट की स्थिति निर्मित होती जा रही है, क्योंकि शहर के एकमात्र पेयजल स्राेत चीलर बांध का पानी किसानों को सिंचाई के लिए देने के बाद बचे 7 फीट पानी को जिम्मेदार बचा नहीं पाए।

हालात यह हो गए कि अब पानी को बांध के गड्ढों से लिफ्ट करना पड़ रहा है। इसके बाद भी जल संसाधन विभाग और नगर पालिका ने अब तक शेष पानी की चोरी रोकने के लिए निगरानी दल तक नहीं बनाया। ज्ञात रहे मानसून आने में अभी करीब 45-50 दिन शेष है। ऐसे में शहर की 80 हजार की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराना हर दिन चुनौती बनता जाएगा, क्योंकि डेड स्टोरेज पानी को भी बांध के कैचमेंट एरिए से लगे करीब 14 गांव के किसानों द्वारा दोहन किया जा रहा है।

समय रहते पानी की इस चोरी को रोका नहीं गया तो नपा को बांध के अंदरूनी हिस्सों से पानी लिफ्ट करना होगा। इस पर अतिरिक्त खर्च के साथ पानी का फिल्टर होने में भी ज्यादा समय लगेगा, क्योंकि अब जो पानी बांध की तलहटी से निकाला जा रहा है, उसमें गाद मिली हुई आएगी।

बांध के कैचमेंट एरिए से लगे करीब 14 गांव के किसान अभी भी पानी का दोहन कर रहे हैं। वहीं वाटर वर्क्स तक पानी लाने के लिए पाइप लाइन शुरू नहीं होने से नहर और नदी का उपयोग किया जा रहा है। निगरानी नहीं होने से इन दोनों स्तरों पर पानी का दाेहन होने को लेकर अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

बांध लबालब पर मानसून के पहले दो साल से बिगड़ रही स्थिति

ज्ञात रहे बीते दो सालों से शहर का चीलर बांध अपने पूर्ण स्तर तक लबालब हो रहा है। बावजूद इसके गर्मी का सीजन शुरू होने के बाद से लेकर मानसून आने तक जलसंकट की स्थिति निर्मित हो जाती है।

इसे लेकर कलेक्टर हर बार जल अभाव ग्रस्त जिला घोषित तो कर देते हैं पर जिम्मेदार दोनों विभाग जल संसाधन और नपा पानी के अवैध दोहन को लेकर ज्यादा कार्रवाई के मूड में नहीं रहते। इसके चलते सिंचाई के बाद पेयजल के लिए छोड़ा गया कुल 23 फीट में से 7 फीट पानी महज 3 माह में ही खत्म हो गया।

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