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होली पर्व:घर पर बने कलर से महिलाएं आज खेलेंगी होली, 30 से ज्यादा ने लिया प्रशिक्षण

शाजापुरएक महीने पहले
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  • फूलों का महत्व बताकर बनाए आठ तरह के हर्बल रंग

इस बार शहर की महिलाएं घर पर ही होली मनाने के साथ अपने हाथों से बनाए हुए रंगों से ही पर्व को मनाएंगी। कई महिलाओं ने फूलों के महत्व को समझकर इससे हर्बल कलर बनाए और दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर प्रेरित किया।

शहर के गैस गोडाउन रोड निवासी अलका भावसार और उनकी बेटी शिल्पा भावसार ने फूल और फल दोनों से ही मोहल्ले की सभी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रंग-गुलाल बनाना सिखाया और हर्बल होली खेलने के लिए प्रेरणा दी।

केशुड़ी के फूलों का सबसे ज्यादा होली में उपयोग
जिस भारतीय परंपरा को हम भूल गए थे, उसी को महिलाओं ने फूलों से रंग बनाकर फिर से जीवित कर दिया। केसुड़ी (पलाश) के फूलों से प्राचीन समय में रंग बनाकर होली में उसका उपयोग किया जाता था। केमिकल रंग आने के साथ पिछले 25 साल से लगभग इसका उपयोग ही बंद हो गया था। अलका भावसार द्वारा केसुड़ी के फूलों काे पानी में उबालकर सुखाकर उसमें आराराेट मिलाकर लिक्विड कलर और सूखा गुलाल बनाया गया। उबले पानी को भी फेंका नहीं, वह बच्चों को दे दिया गया, उससे भी होली खेल सकेंगे।

8 कलर प्राकृतिक रूप से सुगंधित
शिल्पा भावसार ने बताया कि उनके द्वारा गुलाब, सेवंती, गेंदा, सिंदूर, चुकंदर, पालक से 8 कलर और गुलाल भी बनाए। इसमें फूलों की नेचुरल खुशबू है। यह पवित्र गुलाल मंदिरों पर पहुंचाया है। इससे भगवान का फाग उत्सव में होली का शृंगार हो सके। गुलाल बनने के बाद बहुत ही सिल्क है, जो त्वचा सुरक्षित रखता है तथा इसे लगाने से नुकसान की बजाय फायदा होता है।

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