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पर्यूषण पर्व:जैन मंदिरों में हो रहे आयोजन, तीसरे दिन भगवान को समर्पित किए 32 अर्घ्य

सुसनेर12 दिन पहले
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पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन चंदा प्रभु मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए समाजजन। - Dainik Bhaskar
पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन चंदा प्रभु मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए समाजजन।
  • फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने धरे विभिन्न स्वरूप

जैन मंदिरों में तीसरे दिन भगवान को 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। संसार में जीव को चारों गतियों में सम्यकत्व की प्राप्ति हो सकती है, लेकिन तीर्थंकर प्रकृति का बंध करने के लिए दर्शन विशुद्धि भावना का होना जरूरी हैं। यह दर्शन-विशुद्धि भावना लाखों करोड़ों मनुष्यों में से किसी एक को होती है और अत्यंत मंद कषाय की अवस्था में होती है। शास्त्रीय भाषा में दर्शन-विशुद्धि चौथे गुणस्थान से आठवें गुणस्थान के प्रथम भाग तक हो सकती है अर्थात सम्यग्दृष्टि सद्गृहस्थ की अवस्था से लेकर उत्कृष्ट मुनि की अवस्था तक यह विशुद्धि होती है।

एक बार प्रारंभ हो जाने पर फिर श्रेणी में भी तीर्थंकर प्रकृति का बंध हो सकता है। दूसरे के कल्याण की भावना का विकल्प जब होगा, तभी तीर्थंकर प्रकृति का बंध होगा। तीर्थंकर प्रकृति एक ऐसा निकाचित बंध है जो नियम से मोक्ष ले जाएगा। उक्त बातें रविवार को नगर के श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन छोटा मंदिर में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन समाजजनों को संबोधित करते हुए पंडित कल्याण मल जैन झालावाड़ वाले ने कही। आयोजन के दौरान सुबह भगवान का अभिषेक शांतिधारा नित्यनियम पूजन के साथ दसलक्षण पर्व एवं सिद्धचक्र मंडल विधान का पूजन किया गया। पर्व के तीसरे दिन आर्जव धर्म का विशेष पूजन हुआ।

पंडित मुकेश जैन व अशोक जैन मामा ने विधिविधान के साथ पूजन क्रिया कराई। इसमें भगवान को 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रात में संगीतमय भक्ति के साथ भगवान की आरती की गई। रात में पार्श्वमति महिला मंडल द्वारा बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मंडल की सदस्य अंकिता जैन ने बताया आयोजन में सम्यक ज्ञान पाठशाला के करीब 25 बच्चों द्वारा सहभागिता करते हुए पद्मावती, नेमिकुमार, तपस्या करते हुए भगवान पार्श्वनाथ, जिनवाणी संग्रह, मैना सुंदरी, चंदन बाला, पानी की बूंद सहित विभिन्न आकर्षक स्वरूप धारण कर धर्म से जुड़ने का संदेश दिया गया।

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