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बाघों के साम्राज्य में हो रहा जंगली हाथियों पर मंथन:उमरिया जिले में वाइल्ड एलीफैंट एक्सपर्ट और वन अधिकारी सुझा रहे हाथी प्रबंधन की तरक़ीब

उमरियाएक महीने पहले
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वन विभाग के अधिकारी। - Dainik Bhaskar
वन विभाग के अधिकारी।

उमरिया जिले में टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में जंगली हाथियों का प्रबंधन वन महकमे के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है। तीन साल पहले छत्तीसगढ़ और झारखंड के रास्ते बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान पंहुचे 40 हाथियों के झुंड ने यहां अपना रहवास बना लिया और देखते ही देखते अनूपपुर शहडोल मंडला और बालाघाट के जंगलों में भी जंगली हाथियों ने अपना रहवास बनाया, लेकिन धरती के सबसे विशाल जानवर जंगली हाथी के प्रबंधन को लेकर वन विभाग पूरी तरह से खाली हाथ है।

जंगलों के आसपास बसे गांवों में जहां बाघ, तेंदुए, नीलगाय और अन्य जंगली जानवर मानव वन्य जीव द्वंद का कारण बन रहे थे। अब जंगली हाथी के भी उसमें शामिल हो जाने से वन विभाग की कठिनाइयां बढ़ गईं। लिहाजा स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देश के नामी हाथी विशेषज्ञों के साथ पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ आलोक कुमार सहित बांधवगढ़ शहडोल उमरिया अनूपपुर एवं संजय टाइगर रिजर्व के अधिकारियों की हाथी प्रबंधन को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें जंगली हाथी प्रबंधन के व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है।

हैबिटेट नष्ट होने के कारण करते हैं दूसरी ओर रुख

बांधवगढ़ में हाथियों को लेकर चल रहे मंथन में वे विशेषज्ञ भी मौजूद हैं, जो लगभग 40 से 50 साल से हाथियों को लेकर कार्य कर रहे हैं। वे सभी रणनीति और सुझाव विकसित कर रहे हैं कि किस तरह से हाथियों को इंसानी द्वंद से दूर किया जा सकता है।

एक्सपर्ट का मानना है कि वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट अब बहुत एडवांस हो चला है, वाइल्ड टूल के हिसाब से अंदेशा लगाया जाएगा कि हाथियों के दिमाग मे क्या चल रहा है और उसके बाद उस पर कार्य होगा। वाइल्ड एलिफैंट एक्सपर्ट अभिलाष खांडेकर का कहना है कि इन जंगली हाथियों का रास आने का सबसे बड़ा कारण हैबिटेट होता है।

उनका हैबिटेट नष्ट होने के कारण वे अलग-अलग जगह जा रहे हैं। इसको लेकर यदि इनका विशेष प्रबंध करना होगा तो सबसे पहले इनके बारे में अध्ययन करना होगा, और नीचे से ऊपर तक सभी वन अमले को इसकी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। ताकि हो रहे नुकसान को रोका जा सके।

समझने का हो रहा प्रयास

जंगली हाथियों का उचित प्रबंधन वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। लिहाजा जंगली हाथी प्रबंधन को लेकर बाँधवगढ़ में शुरू हुई मंथन के दौरान टाइगर रिजर्व में हाथियों के आगमन से लेकर अब तक के हुए घटनाक्रम पर प्रबंधन ने विशेषज्ञों के सामने प्रजेंटेशन के माध्यम से समस्या रखा।

वाइल्ड लाइफ पीसीसीएफ आलोक कुमार ने बताया कि एलीफैंट एक्सपर्ट की टीम ने हाथियों से प्रभावित इलाकों का भ्रमण कर लोगों से भी उनकी राय जानी है। टीम कार्यशाला के बाद सभी पहलुओं पर एक्सपर्ट अपनी एक समग्र रिपोर्ट देंगे, जिसे उनके द्वारा राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

इसके बाद राज्य सरकार मध्यप्रदेश में जंगली हाथियों के प्रबंधन को लेकर किसी नई एवं ठोस रणनीति की शुरुआत करेगी। खास बात यह कि जंगली हाथियों के लिए बनाई जाने वाली रणनीति बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की अगुआई में ही सम्पन्न कराई जाएगी।

एक्सपर्ट और अधिकारियों की संयुक्तता में संघर्ष जारी

गौरतलब है कि टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में जंगली हाथियों द्वारा रहवास बनाये जाने से वन प्रबंधन सहित वन्य जीव प्रेमी बायोडायवर्सिटी में एक बड़े जीव के शामिल हो जाने से खुश हैं, लेकिन इसे लेकर जब तक कोई ठोस तरक़ीब नहीं सूझा लेते की जंगली हाथियों को नुकसान से कैसे रोका जाए ये सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी। हालांकि बाघों के गढ़ में दो दिनों से देश के बड़े एलीफैंट एक्सपर्ट और वन अधिकारियों की मौजूदगी में जंगली हाथियों के प्रबन्धन को लेकर मंथन जारी है।

स्थानीय लोगों से हर तरह की चर्चाओं के बाद जंगली हाथियों के अचार विचार रहन सहन का व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक अध्ययन कर हाथियों के प्रबंधन पर समिति रिपोर्ट तैयार कर रही है। बांधवगढ़ सहित राज्य वनों में बिना किसी नुकसान के स्थापित बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग ने ठोस रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है, जिसका परिणाम आगामी समय मे जंगलों में हाथियों और बाघों के एक साथ विचरण के रूप में दिखाई देगा।