नहीं चल रहा सफाई अभियान:6 बड़े और छोटे नालों में 60 फीसदी कचरे से भरे, बारिश में जलमग्न होंगे कई वार्ड

गंजबासौदा10 दिन पहले
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वार्ड क्रमांक 24 मैं नाले की यह हालत बारिश में क्या होगा इसी से अंदाज लगाया जा सकता है। - Dainik Bhaskar
वार्ड क्रमांक 24 मैं नाले की यह हालत बारिश में क्या होगा इसी से अंदाज लगाया जा सकता है।

तेज बारिश में शहर का 30 फीसदी हिस्सा जलमग्न हो जाएगा। शहर में बस्ती के बीच बहने वाले आधा दर्जन बड़े और आधा दर्जन छोटे नालों का 60 फीसदी हिस्सा कचरे से भरा हुआ है। यहां के कई इलाकों में नगर पालिका जेसीबी मशीन नहीं पहुंच पाती जबकि मानसून सक्रिय हो गया है। इसके केरल तक 25 से 3 जून तक पहुंचने का अनुमान है। हर साल नगर पालिका मई के मध्य तक शहर के आधे से ज्यादा नालों की सफाई पूरी कर लेती थी।

जहां इन नालों का भाग खुला हुआ है लेकिन इस बार यह सफाई अभियान अब तक गति नहीं पकड़ पाया। इसके चलते नालों की सफाई का काम समय रहते पूरा नहीं हो पाएगा। दरअसल शहर के बीच बहने वाले एक दर्जन नालों का 40 फीसदी हिस्सा खुला हुआ है। जबकि आबादी के बीच 60 प्रतिशत हिस्से पर अतिक्रमण है। इसके परिणाम जरूर नाले का यह भाग कचरे से ठसाठस भरा हुआ है। इसके चलते बारिश का बहाव प्रभावित होगा और कई बस्तियां जलमग्न होंगी।

बारिश से पहले गर्मी में हर साल सफाई अभियान चलाया जाता है। यह अभियान लगातार तीन महीने चलता है। इससे बस्ती के नाले नालियों सहित बड़े नालों की सफाई की जाती है लेकिन स्वास्थ्य विभाग पिछले 12 सालों से अभियान के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी को नालों से अतिक्रमण हटाने पत्र लिख रहा है लेकिन इन पत्रों को हर साल रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है।

वर्तमान में नालों की यह है हालत
वर्तमान में कई नालों के खुले भागों में सफाई नहीं की हुई। इनमें भी ठसाठस कचरा भरा हुआ है। वार्ड क्रमांक 24 में उमंग होटल के पीछे गली में नाले की लंबे समय से सफाई नहीं हुई। इसी प्रकार त्योंदा रोड पर सड़क के दोनों ओर नाले बने हुए हैं। इनकी सफाई कई वर्षों से नहीं हुई।

साथ ही रेलवे स्टेशन से अंबेडकर चौक और जय स्तंभ चौक तक बनाए गए नाले भी 4 साल से साफ नहीं हुए। इनके पीछे स्वास्थ्य विभाग का तर्क दिया जाता है। यह गलत तरीके से बनाए गए हैं। सड़क का पानी इनमें नहीं जाता जबकि इनके निर्माण पर नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग में लाखों रुपए खर्च किया है। इसके बाद भी इन की दुर्दशा नगर में किसी से छिपी नहीं है।

जल निकासी हो रही प्रभावित
नालों का आधा हिस्सा अतिक्रमण के कारण साफ नहीं हो पाता। इस कारण उसमें गंदगी और कचरा जमा हुआ है। बारिश के दौरान जल निकासी प्रभावित होती है। इस कारण नालों का पानी बस्ती में भर जाता है। इससे आधे शहर में बारिश के दौरान बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।

नगर पालिका द्वारा गर्मी के महीनों में नाला सफाई अभियान इसलिए चलाया जाता है इससे नालों की सफाई हो सके लेकिन अभियान के दौरान भी बस्ती के बीच 40 फीसदी हिस्सा साफ हो पाता है लेकिन इस साल नाला सफाई अभियान चल रहा है या नहीं इसका पता नहीं चल पाया क्योंकि मानसून के लिए 1 महीने का समय शेष बचा है। इतना समय शहर के नालों की सफाई के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। अभी मुख्य मार्ग कीनालियों की सफाई का काम तक शुरू नहीं हो पाया।

सफाई अभियान किया गया है शुरू
नाला सफाई अभियान इसी सप्ताह से प्रारंभ किया गया है। नालों का जितना भाग खुला है उसकी ही सफाई हो पाती है। अतिक्रमण वाले हिस्से की सफाई नहीं हो पाती। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र के माध्यम से स्थिति बता चुके हैं। -आरके नेमा, स्वच्छता विभाग प्रभारी नगर पालिका गंजबासौदा।

वार्ड 1 से 24 तक 12 से अधिक नाले
वार्ड क्रमांक 1 से 24 तक आबादी के बीच छोटे बड़े एक दर्जन नाले निकले हुए हैं। अतिक्रमण के कारण इन नालों का 60 प्रतिशत हिस्सा आबादी के बीच गायब हो चुका है। राजस्व कागजों में जितनी चौड़ाई दर्ज है उसका आधा हिस्सा भी मौके पर दिखाई नहीं देता।

बरेठ रोड का मोतिया नाला राजस्व रिकॉर्ड में 60 से 70 फीट चौड़ा है लेकिन वर्तमान में बस्ती के बीच उसकी चौड़ाई 10 से 15 फीट के बीच रह गई है। हालात यह हैं कि बस्ती के बीच नाले का आधे से ज्यादा भाग आलीशान भवनों के नीचे से निकला हुआ है। इसी प्रकार पुराने विजय टॉकीज क्षेत्र और बुढ़ापुरा का नाला गुम हो चुका है।

सिरोंज चौराहे पर नाले के आसपास भगवान और शॉपिंग मॉल बने हुए हैं। ईदगाह मार्ग का नाला गायब हो चुका है। पंच पीर से पचमा रोड पेट्रोल पंप तक पाराशरी नदी का आधा भाग अतिक्रमण की चपेट में आ गया है। त्योंदा रोड मंडी के सामने स्थित नाला अब दिखाई नहीं देता। शिव नगर और पंच पीर के बीच मुख्य मार्ग पर नाले की पुलिया भी दिखाई नहीं देती। पचमा गली व मार्ग के नालों पर भी पक्के भवन बने हुए हैं।

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