एक दिन में मरीजों के मरने का नया रिकॉर्ड:24 घंटे में 18 और कोरोना मरीजों ने तोड़ा दम पिछले 2 दिनों से हर सवा घंटे में हो रही 1 मौत

अमृतसर6 महीने पहले
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श्मशानघाट में जहां खाली जगह, वहीं संस्कार, चितास्थल पड़ गए कम। - Dainik Bhaskar
श्मशानघाट में जहां खाली जगह, वहीं संस्कार, चितास्थल पड़ गए कम।
  • 48 घंटे में 35 लोगों की जान गई

अमृतसर जिले में कोरोना से दम तोड़ने वाले लोगों के आंकड़े रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। बुधवार को ही जिले में 18 मरीजों की मौत हो गई। यानी हर सवा घंटे में एक शख्स महामारी से जिंदगी की जंग हार गया। कोरोनाकाल के 14 महीनों में एक दिन में इतने मरीजों की मौत पहली बार हुई है। इससे पहले मंगलवार को 17 लोगों की मौत हुई थी मगर मात्र 24 घंटे के अंदर ही वह रिकॉर्ड टूट गया। अमृतसर जिले में बीते दो दिनाें के अंदर कोरोना से 35 लोगों की जान जा चुकी है।

बुधवार और मंगलवार से पहले कोरोना से एक दिन में सबसे अधिक 16 मौतें पिछले साल 10 सितंबर को हुई थी। बुधवार को अमृतसर में कोरोना महामारी से दम तोड़ने वालों में केवल सिंह (51), हीरा सिंह (40), गुरबचन कौर (58), अंगूरी (70), किरपाल सिंह (84), जसबीर सिंह (60), चत्तर सिंह (85), कवलजीत सिंह (53), सुरिंदर मेहता (62), रंजन रवाला (44), सुशीला जैन (74), रछपाल सिंह (48), वीना (58), कुलविंदर कौर (70), शामलाल खुराना (72), निशान सिंह (55), सतबीर सिंह (63) और हरदीप सिंह (74) शामिल रहे।

अमृतसर में बुधवार को कोरोना के 501 नए केस रिपोर्ट हुए। चिंताजनक बात यह है कि इनमें 373 केस कम्युनिटी स्प्रैड के हैं। यानी इन्हें घर से बाहर मास्क या सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी करने पर कोरोना ने जकड़ लिया। नए मरीजों में 128 लोग ऐसे हैं जो अपने ही किसी परिचित से संक्रमित हुए। अमृतसर जिले में अब तक कोरोना के कुल 31512 मरीज आ चुके हैं और इनमें से 25676 लोग स्वस्थ भी हो चुके हैं। 4905 मरीजों का इलाज चल रहा है।

अप्रैल के 28 दिनों में जिले में कोरोना के 10502 नए केस रिपोर्ट हुए हैं। यानि रोजाना औसतन 375 नए मरीज। अप्रैल में अभी तक कुल मिलाकर कोरोना से 255 लोग जान गंवा चुके हैं। यानि रोजाना औसत 9 लोगों की जान गई। इन 28 दिनों में से 13 दिन ऐसे रहे, जब कोरोना ने 10 या उससे ज्यादा मरीजों की जान ली। इस साल 19 अप्रैल को 12 और एक अप्रैल को 11 लोगों की जान गई। पिछले साल 16 सितंबर को 12 और 24 सितंबर को 13 लोगों ने दम तोड़ा था।

खतरे के बीच सुखद संकेत- 14 माह में पहली बार 24 घंटे में 730 मरीज ठीक

बुधवार को 24 घंटे में 730 कोरोना मरीज ठीक हुए। कोरोनाकाल के 14 महीने में एक दिन के अंदर इतने मरीज पहली बार रिकवरी हुए हैं। इससे पहले मंगलवार को सबसे ज्यादा 400 मरीज ठीक हुए थे। अप्रैल की बात करें तो 28 दिनों में 8361 लोग ठीक हो चुके हैं। पूरे कोरोनाकाल में इससे पहले कभी एक महीने में इतने मरीज रिकवर नहीं हुए। इस महीने हर रोज औसतन 298 लोग स्वस्थ हो रहे हैं। 28 दिनों में से 13 दिन ऐसे रहे जब 300 से ज्यादा मरीजाें ने अपने हौसले से कोरोना पर जीत हासिल की।

लाेग चौथे दिन अस्थियां इकट्‌ठी करने आ रहे, इससे बढ़ी दिक्कत

कोरोना के कारण हो रही रिकॉर्ड मौतों से हाथीगेट स्थित दुर्ग्याणा शिवपुरी में दाह-संस्कार के लिए चितास्थल कम पड़ने लगे हैं। यहां रोजाना 30 से अधिक दाह संस्कार किए जा रहे हैं। इतनी अधिक संख्या में संस्कार होने से इस श्मशानघाट में चिता स्थल (थड़े) कम पड़ने लगे हैं। इसी वजह से बीते दो दिनों में 6 लोगों का संस्कार चितास्थलों के आसपास पड़ी खाली जगह पर करना पड़ा। शिवपुरी का प्रबंधन करने वाली दुर्ग्याणा मंदिर कमेटी के प्रधान रमेश शर्मा के अनुसार, मौत का आंकड़ा बढ़ने के साथ-साथ 4 दिन बाद अस्थियां (फूल चुगने) संभालने की प्रथा के कारण भी चितास्थलों की कमी महसूस हो रही है।

10 नए चितास्थल बनाए जा रहे

शिवपुरी में चितास्थलों की कमी दूर करने के लिए दुर्ग्याणा कमेटी यहां 10 नए चितास्थल बना रही है। इनमें से 5 बन चुके हैं जबकि शेष 5 अगले दो दिनों में बन जाएंगे। दुर्ग्याणा मंदिर कमेटी के प्रधान रमेश शर्मा ने कहा कि अगर जरूरत महसूस हुई तो 30 साल से बंद पड़े इलेक्ट्रिकल दाह संस्कार प्लांट की जगह पर भी चितास्थल बनाए जाएंगे।

शास्त्रों में 3 दिन में अस्थियां ले जाने का भी प्रावधान: आचार्य

दुर्ग्याणा शिवपुरी के आचार्य बताते हैं कि शास्त्रों में दाह संस्कार के तीसरे दिन भी अस्थियां चुनने का प्रावधान है। अगर लोग ऐसा करते हैं तो चितास्थल जल्दी खाली होंगे और इनकी कमी नहीं होगी।

प्रति क्विंटल 60 रुपए महंगी हुई लकड़ी

दुर्ग्याणा कमेटी के अनुसार, एक बॉडी के संस्कार में 30 क्विंटल लकड़ी लगती है। पहले 290 रुपए में एक क्विंटल लकड़ी मिलती थी जो अब 350 रुपए में मिल रही है।

एलपीजी क्रीमेशन प्लांट में लोग नहीं कर रहे संस्कारएक साल में शिवपुरी के एलपीजी क्रीमेशन प्लांट में किसी कोरोना मरीज का संस्कार नहीं किया गया जबकि वहां से 3 घंटे बाद ही लोग अस्थियां ले जा सकते हैं। इससे पॉल्यूशन भी कम होता है।

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