अमृतसर के कॉलेजों में इस साल एडमिशन आसान नहीं:148 महाविद्यालयों में 25 हजार सीटें और GNDU में 4500, करीब 6 हजार विद्यार्थियों के लिए होगी मुसीबत

अमृतसर4 महीने पहले
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कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो ऑनलाइन होंगे। - प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो ऑनलाइन होंगे। - प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई ने इस साल बिना परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। जिसके चलते फेल स्टूडेंट्स की गिनती काफी कम है। जिले के 95 प्रतिशत बच्चे इस साल पास हुए हैं। ऐसे में अब कॉलेजों और स्टूडेंट्स दोनों के लिए समस्या खड़ी हो गई है। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर स्टूडेंट्स और कॉलेज दोनों इस समस्या को ठीक कर सकते हैं।

गौरतलब है कि जीएनडीयू के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में इतनी सीटें ही नहीं है कि इस साल सभी पास स्टूडेंट्स एडमिशन ले सकें। वे कंपीटिशन अधिक होने के कारण अपने पसंदीदा विषय और कॉलेज दोनों को आसानी से नहीं चुन सकेंगे। 12वीं की परीक्षाओं के परिणाम आ चुके हैं।

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से 26,229 स्टूडेंट्स पास हुए हैं। सीबीएसई के 6600 स्टूडेंट्स और आईसीएसई के 2000 के करीब स्टूडेंट्स पास हुए हैं। कुल मिलाकर इस साल लगभग 34,829 स्टूडेंट्स पास हुए हैं। जबकि सीटें मात्र 29 हजार के करीब ही हैं। जिनमें से 25 हजार के करीब सीटें जीएनडीयू के अंतर्गत आते 148 कॉलेजों में हैं और 4500 के करीब जीएनडीयू में सीटें हैं। ऐसे में 6 हजार के करीब स्टूडेंट्स को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।

स्टूडेंट्स के लिए बड़ी दिक्कत

कॉलेजों में सीटों की संख्या निर्धारित होती है। ऐसे में स्टूडेंट्स के लिए सबसे बड़ी समस्या एडमिशन की होगी। बीए में सीटें व विकल्प काफी अधिक होते हैं। लेकिन अन्य विषयों में स्टूडेंट्स के पास विकल्प बहुत कम हैं। उन्हें अपने पसंदीदा विषयों को चुनने के साथ-साथ अन्य पर भी ध्यान देना हाेगा।

डॉ. मेहल सिंह, प्रिंसिपल खालसा कॉलेज
डॉ. मेहल सिंह, प्रिंसिपल खालसा कॉलेज

पसंदीदा कॉलेज आसानी से नहीं मिलेगा

खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मेहल सिंह ने बताया कि जीएनडीयू के अंतर्गत कई कॉलेज हैं, जहां पिछले दो सालों से सीटें फुल नहीं हुई। ऐसे में स्टूडेंट्स के लिए समस्या सीटें नहीं होने वाली। समस्या उनके लिए पसंदीदा कॉलेज को चुनना होगा। ऐसे में स्टूडेंट्स पहले से ही अपने पसंदीदा कॉलेज की लिस्ट तैयार रखें। दूसरी समस्या पसंदीदा विषय हो सकता है।

विषय चुनने में होगी दिक्कत
डॉ. मेहल सिंह ने कहा कि कॉलेज के बाद बड़ी समस्या विषय चुनने की आ सकती है। हर कोई प्रोफेशनल कोर्से करना चाहता है। कई विषय हैं, जिनकी सीटें सबसे पहले भर जाती हैं। ऐसे में स्टूडेंट को हाे सकता है कि अपना पसंदीदा विषय न मिले। ऐसे में उन्हें काउंसिलिंग की जरूरत है। कई विषय ऐसे होते हैं, जिनके विकल्प मौजूद हैं। जैसे बीकॉम में अगर सीट नहीं मिलती तो वह बीकॉम प्रोफेशनल को चुन सकता है। लेकिन विषय चुनने से पहले काउंसिलिंग जरूर लें।

कॉलेजों के लिए भी दिक्कत

डॉ. मेहल सिंह ने बताया कि कॉलेजों के लिए समस्या क्वालिटी की आने वाली है। स्टूडेंट्स ने दो साल ऑनलाइन पढ़ाई की है। कई स्टूडेंट्स को अभी तक अपने विषयों का पूरा ज्ञान नहीं है। अब जब ऐसे स्टूडेंट्स कॉलेज पहुंचेंगे और ऑफलाइन स्टडी करेंगे तो उन्हें अधिकतर विषयों की पूरी जानकारी ही नहीं होगी। क्वालिटी एजुकेशन देने और स्टूडेंट्स को पढ़ाने में कॉलेजों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

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