परेशानी / लॉकडाउन में फंसा 25 हजार टन फ्रोजन मटर, रखरखाव में मालिकों के छूटे पसीने

25 thousand tons of frozen peas trapped in lockdown, owners sweat left in maintenance
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25 thousand tons of frozen peas trapped in lockdown, owners sweat left in maintenance

  • आउट सीजन के लिए सूबे में हर साल 22 से 25 फीसदी मटर फ्रीज किया जाता है

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:40 AM IST

अमृतसर. कोरोना महामारी के चलते सूबे में 25 हजार टन मटर फ्रोजन में फंस कर रह गया है। इसके रखरखाव को लेकर स्टोर मालिकों के पसीने छूट रहे हैं। हालात यह हैं कि आगे सप्लाई नहीं है और उसे रखना मजबूरी है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि स्टोर किया हुआ यह मटर अगली सीजन में मटर के किसानों को नोटबंदी वाले दौर की तरह से मारेगा। 

आमतौर पर सीजन में तैयार होने वाली मटर 80 फीसदी तक का हिस्सा दूसरे सूबों में सप्लाई होता है तो कुछ हिस्सा घरों व शादी-विवाह और होटल आदि में खर्च होता है। सूबे में औसतन हर साल 22 से 25 फीसदी मटर फ्रीज किया जाता है, जिसे फ्रोजन के नाम से जाना जाता है और आउट सीजन में इसे इस्तेमाल किया जाता है।

इस साल लॉक डाउन के कारण मटर फ्रीज तो हुई लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, और शादी-विवाह बंद होने के कारण फ्रीजर प्लांटों में ही फंसे हुए हैं। कुछ छोटे कारोबारियों ने उसे मंगवा तो लिया लेकिन आगे सप्लाई न होने के कारण उनको अपने गोदामों में संभालना पड़ रहा है।

फ्रोजन मटर के कारोबारियों की मानें तो इस वक्त सूबे के चारों फ्रोजन प्लांटों तथा छोटे स्टोरों को मिला कर 25 हजार टन मटर फंसा हुआ है। वल्ला सब्जी मंडी के कारोबारी प्रभजोत सिंह का कहना है कि यहां पर 50 टन फ्रोजन मटर जमा है।

उनके अकेले के स्टोर में इसे संभालने के लिए हर महीने बिजली का भारी-भरकम खर्च आता है। इसी तरह से फ्रोजन एक्सपर्ट बिंदु गुप्ता कहती हैं कि उत्तर भारत जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश में 50 फरोजन यूनिट हैं। पंजाब में सिर्फ पांच हैं, लेकिन उनकी भी स्थिति लॉक डाउन के चलते पतली हो रही है।

पंजाब में मटर का उत्पादन

पीएयू के खेती माहिर डॉ. नरिंदरपाल सिंह का कहना है कि सूबे में मटर का रकबा 35 हजार हेक्टेयर है और इसमें औसतन तीन लाख 62 हजार टन की पैदावार होती है। उनका कहना है कि चूंकि लॉक डाउन आगे भी चलेगा एेसे में होटल-रेस्टोरेंट इंडस्ट्री चलने की उम्मीद नहीं है। रहा शादी-विवाह का मामला तो यहां भी अब खपत कम होनी है। उनका कहना है कि आने वाली सीजन मटर उत्पादक किसानों के लिए मारक साबित होनी है। क्योंकि उस वक्त फ्रोजन मटर मार्केट में आएगा और किसान की ताजी मटर की मांग कम हो जाएगी।

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