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सखी वन स्टॉप सेंटर:41% अंबरसरी कुड़ियां दा घर पट्‌ट रेहा नशा, 36% दा ‘बाहरवाली’,पौने 2 साल में पहुंची 244 महिलाएं, 101 को पति नशा करके पीटता था, 89 एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर से तंग

अमृतसरएक महीने पहले
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पंजाब की राजनीति में नशा अहम मुख्य मुद्दा रहा है, मगर अब यह रिश्तों में भी दरार डालने में आगे हो गया है। जिले में 41 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जो पति की नशे की लत से तंग आकर सखी वन स्टॉप सेंटर में पहुंच रही हैं। महिलाओं को इंसाफ दिलाने के इरादे से सरकार की ओर से चलाए जा रहे इस सेंटर में पिछले पौने दो साल में 36 प्रतिशत महिलाएं ऐसी पहुंची, जो पति के एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर से परेशान होकर मदद मांगने आईं। सखी वन स्टॉप सेंटर की इंचार्ज प्रीति शर्मा के अनुसार सेंटर में मार्च 2019 में खुला था। इसमें अब तक 244 केस आए हैं। इनमें 101 केस शराब और नशे में पति की ओर से डोमेस्टिक वायलेंस करने के

रहे। 89 महिलाएं अपने पति के दूसरी महिला से रिश्तों से तंग आकर सेंटर में इंसाफ मांगनी पहुंची। तीन मामले एनआरआई लड़के से शादी के बाद प्रताड़ना की शिकायत के रहे। वहीं 52 केस अलग-अलग समस्याओं से जुड़े थे। इनमें प्राॅपर्टी डिस्प्यूट, पड़ोसियों से झगड़ा, किडनैपिंग आदि के थे। सेंटर स्टाफ ने कुल 244 केसों में 208 केस साॅल्व कर दिए गए हैं, जबकि 36 में दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

पत्नियों की शिकायत-पति शराब पीकर मारता है

सेंटर पहुंची 101 महिलाओं की शिकायत रही कि उनके इलाके-गांव में शराब और नशा आसानी से उपलब्ध है। पति शराब या कोई और नशा करता है। नशा करने के बाद उसे और बच्चों को मारकर बाहर निकाल देता है। सेंटर इंचार्ज के अनुसार ऐसे ज्यादातर केस गांवों से आए। लॉकडाउन में इन केसों की संख्या बढ़ गई थी, क्योंकि शराब मिलने में मुश्किल थी और काम भी नहीं था।

एक केस यह भी... पति-पत्नी दोनों का एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर

प्रीति ने बताया कि एक केस में पति और पत्नी दोनों काउंसलर के सामने झगड़े लगे। इस दौरान दोनों ने माना कि दोनों का ही एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर है। ऐसे केस में वह कुछ नहीं कर सकते थे। इसलिए उन्हें कोर्ट में जाने दिया गया। सखी सेंटर की इंचार्ज प्रीति शर्मा, वकील काउंसिल अलका साहनी, काउंसलर रजनीत और मल्टीपर्पज स्टाफ गुरमीत कौर के अनुसार ज्यादातर केसों में लड़कियां भी एडजस्ट नहीं करना चाहतीं और वहीं बहुत से केसों में सास-बहू की लड़ाई घर नहीं बसने देतीं। ऐसे में दोनों पक्षों को ही एडजस्टमेंट करनी पड़ती है ताकि शांति बरकरार रहे।

एनआरआई केसों में लोग इन्क्वायरी नहीं करते
प्रीति के मुताबिक उनके पास अब तक ऐसे 3 केस आए हैं, जिनमें पेरेंट्स ने सिर्फ लड़के के बारे में इतना ही जाना कि वह विदेश में है। एक केस में लड़का दुबई का था। उसका वहां पर अफेयर था। फिर ससुरालवालों ने लड़की का साथ दिया और लड़के को झूठ कहकर वापस बुलाया, जब फिर भी वह वापस जाने लगा तो सखी सेंटर की मदद से उसका वीजा कैंसिल करवाया गया और उसे रोका गया। दूसरे केस में लड़के और उसके माता-पिता ने शादी करवाकर पूरा दहेज ले लिया और एक हफ्ते में ही लड़का मलेशिया चला गया और फिर वापस नहीं आया।

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