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  • After Three And A Half Years, Once Again The Hope Of Treatment In The Cath Lab, Cardiologist Dr. Parminder Joined GNDH

GNDH की कैथ लैब में इलाज की फिर जगी आस:डॉक्टर अरोड़ा के रिजाइन के बाद लटक रहा था ताला, साढ़े 3 साल बाद कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. परमिंदर ने किया जॉइन

अमृतसर9 दिन पहले
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गुरु नानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) में 5 साल पहले बनकर तैयार हुई कैथ लैब में दोबारा इलाज शुरू होने की आस जगी है। जीएनडीएच के एक मात्र कार्डियोलाजिस्ट डॉ. राजीव अरोड़ा के रिजाइन के बाद यह पद लंबे समय से खाली था। लेकिन अब कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. परमिंदर सिंह के जॉइन करने के बाद एक बार फिर करोड़ों रुपए की लागत से बनी लैब में दोबारा इलाज शुरू होने की आस जगी है।

गुरु नानक देव अस्पताल में 2017 में पंजाब की एकमात्र कैथ लैब शुरू हो गई थी। 5 साल पहले गुरु नानक देव अस्पताल के डॉक्टर्स पीजीआई से ट्रेनिंग लेकर वापस लौटे थे और कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अरोड़ा की देखरेख में इस लैब में इलाज शुरू हुआ था। एक करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस कैथ लैब में फिलिप्स कंपनी की मशीन इंस्टाल है। लेकिन डॉक्टर ना होने के कारण पिछले साढ़े 3 साल से इस पर ताला लटका हुआ था। लेकिन अब जब डॉ. परमिंदर गुरु नानक देव अस्पताल को जॉइन कर लिया है तो यहां ओपन बाईपास सर्जरी करना भी संभव हो जाएगा। जिसके लिए लाखों रुपए प्राइवेट अस्पतालों में खर्च होते हैं।

आठ साल के इंतजार के बाद 2017 में शुरू हुई थी लैब
यह प्रोजेक्ट का फाइल वर्क वर्ष 2009 से शुरू हुआ था। कैथ लैब के निर्माण के लिए तैयार फाइलें पहले तो अधिकारियों के टेबलों पर पड़ी रहीं। इसके बाद जब लैब तैयार हुई तो स्टाफ की कमी के कारण यह पूरा मामला अटका रहा और लैब शुरू नहीं हो पाई। इतना ही नहीं तकरीबन ढाई साल पहले इस लैब की तारों को चूहे तक कुतर गए थे।

स्टंट से लेकर पेसमेकर तक इंस्टाल करने की होगी सुविधा
डॉ. परमिदर सिंह अब अस्पताल जॉइन कर चुके हैं और इलाज के लिए उनसे रिक्वायरमेंट भी मांगी गई है। लैब के शुरू होते ही यहां यहां एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर, आरपीएफ प्रोसीजर, स्टंटिग, कार्डियोग्राफी, टीएमटी जैसे ऑपरेशन करना संभव हो जाएगा।

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