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कांट्रेक्टर और पीडब्ल्यूडी एक-दूसरे पर फोड़ रहे देरी का ठीकरा:अमृतसर-रानियां रोड 14 माह में चौड़ा करना था, पौने 5 बरस में ढाई किमी ही काम पूरा

अमृतसर7 दिन पहलेलेखक: सतीश शर्मा
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सड़क पर गड्‌ढा। सिंगल लेयर डाली गई रोड पर कई जगह इसी तरह के गड्ढे हो चुके हैं। - Dainik Bhaskar
सड़क पर गड्‌ढा। सिंगल लेयर डाली गई रोड पर कई जगह इसी तरह के गड्ढे हो चुके हैं।

पीडब्ल्यूडी की ओर से 47 करोड़ से बनवाई जा रही अमृतसर-चौगावां-रानियां रोड पौने 5 साल (56 महीने) में भी तैयार नहीं हो सकी है। जिस रोड को 14 महीने में बनाकर और 5 बरस तक मेंटेनेंस भी करना था, वह रोड पौने 5 साल में महज ढाई किलोमीटर ही बन सकी, बाकी साढ़े 11 किलोमीटर सड़क पर सिंगल लेयर लुक (तारकाेल) ही बिछाई जा सकी, जिसमें भी कई जगह गड्‌ढे हो भी चुके हैं।

पीडब्ल्यूडी विभाग प्रोजेक्ट का 70% काम पूरा होने का दावा कर रहा है। उधर इसी रूट पर 2 पुलों का चौड़ीकरण, ग्रिल लगाने, इंटरलाॅकिंग टाइल्स का काम अभी शुरू ही नहीं हो सका है। अमृतसर-रानियां सड़क बनाने का ठेका 21 दिसंबर 2016 में सतीश अग्रवाल एंड कंपनी को सौंपा गया था। यह प्रोजेक्ट 14 महीने में 20 फरवरी 2018 तक पूरा किया जाना था।

प्रोजेक्ट में देरी को लेकर ग्राम पंचायत मदन लाल ढींगरा नगर, ब्लाॅक वेरका, ग्राम पंचायत धौल खुर्द ब्लाॅक वेरका, ग्राम पंचायत कोटला दल सिंह ब्लाॅक वेरका, नंबरदार गांव वडाला भिट्टेवड्ड और अन्य ने चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी बीएंडआर को शिकायत दी थी। शिकायत में सरपंच पलविंदर कौर, मदन सिंह, जोगा सिंह और अन्य ने सड़क में जगह-जगह गड्‌ढे पड़ने को लेकर गुणवत्ता का पूरा ख्याल नहीं रखे जाने सहित अन्य खामियां को गिनाया था।

पीडब्ल्यूडी कंपनी को कर चुका 25.55 करोड़ रुपए की पेमेंट

47 करोड़ के प्रोजेक्ट में पीडब्ल्यूडी ने एजे‌ंसी को 25 करोड़ 55 लाख 49 हजार 473 रुपए (54%) पेमेंट कर दी। है। प्रोजेक्ट के तहत रामतीर्थ रोड स्थित भगवान वाल्मीकि मूर्ति से माहल बाईपास तक रोड की स्ट्रेथनिंग की जानी थी। इससे आगे चौड़ीकरण किया जाना था। माहल बाईपास और इससे 10 किलोमीटर आगे एक ओर पुल चौड़ा किया जाना था। इस प्रोजेक्ट की सही माॅनिटरिंग नहीं होने से लोगों ने सीएम, पीडब्ल्यूडी विभाग के मंत्री तक से शिकायतें कीं। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

21 दिसंबर 2016 को कंपनी को दिया था कांट्रेक्ट, 42 महीने के बाद जुर्माना
पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से सड़क बनाने का ठेका 21 दिसंबर 2016 में सतीश अग्रवाल एंड कंपनी को सौंपा था। यह प्रोजेक्ट 20 फरवरी 2018 तक पूरा किया जाना था। वहीं प्रोजेक्ट का काम पूरा किए जाने का समय निकल जाने के 42 महीने बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने 9 मार्च 2021 से प्रोजेक्ट में देरी को लेकर कांट्रेक्टर को रोजाना 2.25 लाख रुपए जुर्माना लगाना शुरू किया है। इस हिसाब से अभी तक कंपनी को करीब 4.18 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है। लेकिन जुर्माने की वसूली अभी तक नहीं कंपनी से नहीं हो सकी है।

200 दिन पैनल्टी लगाने के बाद कांट्रेक्ट टर्मिनेट करेंगे: एक्सईएन
प्रोजेक्ट में देरी को लेकर कंपनी को रोज 2.25 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। नियम मुताबिक 200 दिन तक पैनल्टी लगाई जा सकती है, जो कि सितंबर में पूरे होने जा रहे हैं। इसके बाद कांट्रेक्ट टर्मिनेट करके कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। वहीं कई जगह लोगों ने सीवरेज के कनेक्शन लिए थे, उस जगह सड़क के गड्‌ढों का पेचवर्क भी कराया है।
-इंद्रजीत सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी

पीडब्ल्यूडी की ओर से साइट क्लियर नहीं दी गई: संजीव अग्रवाल
प्रोजेक्ट में देरी के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ही जिम्मेदार है। विभाग की ओर से साइट क्लीयर नहीं दी गई। रूट के 3 हजार पेड़ मार्च मेंे क्लीयर किए। फंड्स भी लेट दिया गया। डिपार्टमेंट कंपनी पर जुर्माना लगाकर धक्का कर रहा है। माहला वाला गंंदा नाला की नेशनल हाईवे से एनओसी नहीं आई और रामतीर्थ से अगले पुल पर अभी भी पेड़ क्लीयर नहीं किए हैं। बाकी प्रोजेक्ट 31 दिसंबर तक पूरा कर दिया जाएगा।
-संजीव अग्रवाल, मालिक सतीश अग्रवाल एंड कंपनी

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