किसान आंदोलन में गई एक और जान:अमृतसर में सांसद श्वेत मलिक की कोठी पर लगे मोर्चे में कमालपुर के किसान अंग्रेज सिंह को आया हार्ट अटैक

अमृतसरएक महीने पहले
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शव के पास एकत्रित किसान। - Dainik Bhaskar
शव के पास एकत्रित किसान।

किसान आंदोलन के बीच एक और किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना अमृतसर की है। यहां सांसद श्वेत मलिक के घर के बाहर लगे मोर्चे पर पहुंचे जिले के गांव कमालपुर में रहने वाले अंग्रेज सिंह (45) सुबह उठे ही नहीं। साथी किसानों ने संभाला तो उनका शरीर ठंडा पड़ चुका था। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद संयुक्त किसान मोर्चे के सदस्यों ने अंग्रेज सिंह को शहीद का दर्ज दिया।

मृतक आंदोलनकारी किसान अंग्रेज सिंह की फाइल फोटो।
मृतक आंदोलनकारी किसान अंग्रेज सिंह की फाइल फोटो।

अंग्रेज सिंह के चचेरे भाई राजपाल सिंह ने बताया कि सांसद श्वेत मलिक के घर के बाहर 27 सितंबर 2020 से मोर्चा लगा रखा है। एक सप्ताह के बाद उनकी मोर्चे पर ड्यूटी लगती थी। कई बार वह सिंघु मोर्चा पर भी जाते रहे हैं। वीरवार की सुबह ही वह सांसद के घर के बाहर पहुंच गए थे और रात यहीं रुके। रात 2.30 बजे वह पेशाब करने के लिए भी उठे और उसके बाद दोबारा सो गए। लेकिन अल सुबह उनकी नींद ही नहीं खुली। सुबह 5 बजे किसानों ने उन्हें हिलाया तो उनका शरीर ठंडा पड़ चुका था। जिसके बाद उनके परिवार में फोन करके जानकारी दी गई।

मौके पर पहुंचकर कार्रवाई में जुटी पुलिस किसानों के बयान लेते हुए।
मौके पर पहुंचकर कार्रवाई में जुटी पुलिस किसानों के बयान लेते हुए।

बेटा कनाड़ा और बेटी अमृतसर में पढ़ रही है

अंग्रेज सिंह का पूरा जीवन किसानी में ही गुजरा। 45 साल के अंग्रेज सिंह को जब पंजाब में भविष्य ना दिखा तो दस माह पहले ही उन्होंने अपने बेटे आज्ञापाल सिंह को कनाड़ा पढ़ने के लिए भेज दिया था। उनकी बेटी पवनप्रीत कौर अमृतसर में ही पढ़ती। अपने पीछे वह बेटा-बेटी के अलावा पत्नी राजबीर कौर भी छोड़ गए हैं।

कीर्ति किसान मोर्चा के स्टेट प्रेस सेक्रेटरी जतिंदर सिंह चीमा।
कीर्ति किसान मोर्चा के स्टेट प्रेस सेक्रेटरी जतिंदर सिंह चीमा।

सरकार ने सुविधाएं देने का किया वायदा

कीर्ति किसान मोर्चा के स्टेट प्रेस सेक्रेटरी जतिंदर सिंह चीमा ने कहा कि अंग्रेज सिंह संयुक्त मोर्चा में सबसे आगे रहने वाले उनके साथी थे। सिंघु बोर्डर पर भी गए तो वहां भी केंद्र के खिलाफ अपनी आवाज ऊंची रखी। अमृतसर में भी जब उनकी आवश्यकता हुई, उन्होंने कभी आने से मना नहीं किया। उन्होंने मोर्चे के लिए अपनी शहादत दी है। वहीं उन्होंने जानकारी दी कि सरकार के कहे अनुसार उनके परिवार को हर सुविधा दी जाएगी और परिवार के एक सदस्य को नौकरी का वायदा भी किया है।

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