अमृतसर में 1.48 लाख की ऑनलान ठगी:पहले क्रेडिट कार्ड दिलाया, फिर एनीडेस्क ऐप डाउनलोड करवा निकाल ली राशि

अमृतसरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब के अमृतसर में साइबर ठगों ने एक व्यक्ति के खाते से 1.48 लाख रुपए निकाल लिए। यह खेल मैसेज के झांसे में आने से शुरू हुआ और संधू कॉलोनी बटाला रोड में रहने वाले सतनाम सिंह ने अपनी राशि गंवा दी। इसकी शिकायत सतनाम ने पुलिस को दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सतनाम सिंह ने पुलिस को बताया कि उसके मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आया। इसमें क्रेडिट कार्ड और उसकी लिमिट के बारे में बताया गया था। वह पहले भी क्रेडिट कार्ड प्रयोग कर रहे थे, इसके चलते उन्होंने क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर दिया। कुछ समय बाद ही पोस्ट से क्रेडिट कार्ड भी उनके पास आ गया। तभी कंपनी ने उन्हें 8250175685 नंबर के बारे में भी बताया।

सतनाम के अनुसार इसके बाद उसे फोन आया। इसमें बात करने वाले व्यक्ति ने उसे एनीडेस्क ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। एनीडेस्क ऐप डाउनलोड होने के बाद उसने एक कोड मांगा। कोड देने के कुछ समय बाद पता चला कि उसके खाते से 1.48 लाख रुपए निकाले गए हैं।

RBI ने इस्तेमाल पर जारी की है एडवाइजरी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने चेतावनी जारी कर लोगों को रिमोट ऐप एनीडेस्क से सावधान रहने के लिए कहा था। इस ऐप के जरिए जालसाज कहीं भी बैठकर यूजर के फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथों में ले लेते हैं। ऐप का इस्तेमाल UPI के जरिए पैसे की चोरी करने के लिए भी हो रहा है।

दो तरह से होती है सेंधमारी

जालसाज एक बैंक एग्जीक्यूटिव बनकर फोन करते हैं। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें गूगल पर मौजूद गलत कस्टमर केयर नंबर पर यूजर खुद ही फोन कर देते हैं। इन दोनों ही मामलों में फर्जी बैंक बनकर ठग यूजर को ऐनीडेस्क या टीमव्यूअर क्विक सपोर्ट ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।

कोड देने के बाद शुरू होती है ठगी

ऐप के डाउनलोड होने के बाद साइबर ठगों को 9 अंकों वाले रिमोट डेस्क कोड की जरूरत पड़ती है। यह यूजर को 9 अंक बताने के लिए आसानी से मना लेते हैं। 9 अंक वाला कोड मिलते ही ये यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन को आसानी से देख और कंट्रोल कर सकते हैं। इतना ही नहीं ये स्क्रीन को रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।

डाउनलोड करने से पहले समझ लें ऐप

स्क्रीन शेयर करने वाले किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके काम करने के तरीके को ढंग से समझ लेना बेहतर रहता है। बिना जानकारी ये ऐप यूजर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही इस बात का जरूर ध्यान रखें कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों को ऐप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता।

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